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7 साल से जेल में बंद, लेकिन हत्या किसकी की? दिल्ली हाईकोर्ट ने अजीबोगरीब मामले में शख्स को दी जमानत

 Edited By: Khushbu Rawal
 Published : Apr 23, 2025 07:53 am IST,  Updated : Apr 23, 2025 07:54 am IST

साल 2018 में टुकड़ों में कटा हुआ एक शव बरामद हुआ था। पुलिस ने दावा किया कि शव सोनी उर्फ छोटी का है और हत्या के आरोप में मंजीत को गिरफ्तार कर लिया गया था। लेकिन कुछ ही वक्त बाद सोनी को जीवित पाया गया।

प्रतीकात्मक तस्वीर- India TV Hindi
प्रतीकात्मक तस्वीर Image Source : FILE PHOTO

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक अजीबोगरीब मामले में एक व्यक्ति को जमानत दे दी जिसने हत्या के आरोप में लगभग 7 साल जेल में बिताए, जबकि मृतक की पहचान एक रहस्य बनी हुई है। इस व्यक्ति को जिस महिला की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया था, वह कुछ वक्त बाद ही जिंदा मिल गई। जबकि जिसकी लाश बरामद हुई थी, उसकी अबतक पहचान नहीं हो सकी है।

जस्टिस गिरीश कठपालिया ने 21 अप्रैल को शख्स को जमानत देते हुए कहा, ‘‘इस मामले की जांच से इस अदालत की अंतरात्मा को झटका लगा है। अभी तक मृतक की पहचान नहीं हो पाई है। जहां तक ​​‘अंतिम बार देखे जाने’ की परिकल्पना का सवाल है, शख्स को अंतिम बार सोनी उर्फ ​​छोटी के साथ देखा गया था, जो जीवित पाई गई है।’’

क्या है पूरा मामला?

यह घटना 2018 में हुई थी और मृतक की पहचान सोनी उर्फ ​​छोटी के रूप में हुई थी। 17 मई, 2018 को आरोपी की गिरफ्तारी के बाद सोनी को जीवित पाया गया था और मृत व्यक्ति की पहचान आज तक नहीं हो पाई है।

हत्या के मामले में आरोपी मंजीत करकेट्टा ने इस आधार पर जमानत मांगी कि हालांकि वह 2018 से जेल में बंद है, लेकिन किसी को नहीं पता कि किसकी हत्या हुई। जज ने कहा, ‘‘यह बेहद दुखद है कि एक इंसान ने वर्ष 2018 में इतने वीभत्स तरीके से जान गंवा दी और उसके शरीर को टुकड़ों में काट दिया गया, लेकिन आज तक मृतक की पहचान भी नहीं हो पाई है।’’

आखिरकार शख्स को मिला न्याय

सरकारी वकील ने जमानत याचिका का विरोध किया और कहा कि ‘‘अंतिम बार देखे जाने’’ के साक्ष्य आरोपी को हत्या से जोड़ते हैं। इसके विपरीत, व्यक्ति के वकील ने कहा कि उसकी उपस्थिति मोबाइल फोन टावरों से ली गई थी, जो एक बड़े क्षेत्र को कवर करते हैं और यह नहीं कहा जा सकता कि वह हत्या के समय सटीक अपराध स्थल पर मौजूद था।

अदालत ने कहा कि केवल इसलिए आरोपी को स्वतंत्रता से वंचित नहीं किया जा सकता कि मृतक की पहचान सुनिश्चित नहीं हो पाई है। इसने कहा, ‘‘अतः, आवेदन स्वीकार किया जाता है और निर्देश दिया जाता है कि आरोपी/आवेदक को तत्काल जमानत पर रिहा किया जाए, बशर्ते वह 10,000 रुपये का निजी मुचलके और इतनी ही राशि की जमानत राशि प्रस्तुत करे।’’ (भाषा इनपुट्स के साथ)

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