नई दिल्ली: मेघालय में एनडीए की सरकार बनेगी और 6 मार्च को सुबह 10:30 बजे शपथग्रहण समारोह होगा। नेशनल पीपुल्स पार्टी (NPP) के कोनराड संगमा मेघालय के अगले मुख्यमंत्री होंगे। कोनराड संगमा आज शाम मेघालय के राज्यपाल गंगा प्रसाद से मिले और राज्य में सरकार के गठन के लिए अपने पास 60 सदस्यीय विधानसभा में 34 विधायकों का समर्थन होने का दावा किया। बता दें कि इससे पहले गोवा और मणिपुर में भी सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद कांग्रेस सरकार बनाने में असफल रही थी।
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कल आए चुनाव नतीजे में बंटा हुआ जनादेश आया। सत्तारूढ़ कांग्रेस 21 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। हालांकि पिछले चुनाव की तुलना में उसने आठ कम सीटें जीतीं। एनपीपी 19 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही। एनपीपी केंद्र एवं मणिपुर में भाजपा की सहयोगी है। संगमा ने यहां राजभवन के बाहर संवाददाताओं से कहा, ‘‘हम राज्यपाल से मिले और 34 विधायकों के समर्थन का पत्र दिया जिनमें एनपीपी के 19, यूनाईटेड डेमोक्रेटिक पार्टी (UDP) के छह, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) के चार, हिल स्टेट पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (HSPDP) एवं भाजपा के दो-दो विधायक और एक निदर्लीय विधायक शामिल हैं।’’
कौन है कोनराड संगमा?
कोनराड संगमा पूर्व लोकसभा स्पीकर पी ए संगमा के बेटे हैं। कोनराड NPP के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। उनकी पार्टी ने 19 सीटें जीती हैं। वह 2008 में पहली बार मेघालय विधानसभा के लिए चुने गए और 2008 में ही मेघालय के सबसे कम उम्र के वित्त मंत्री बने। वह फिलहाल तूरा सीट से सांसद हैं। कोनराड संगमा लंदन युनिवर्सिटी से पढ़ाई कर चुके हैं और स्कूल की पढ़ाई दिल्ली में रहकर की।
एनपीपी नेता पूर्व लोकसभा अध्यक्ष दिवंगत पी ए संगमा के सबसे छोटे बेटे हैं। कोनराड अपने पिता के निधन के बाद तुरा सीट के उपचुनाव में लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए। गठबंधन सरकार चलाने की चुनौतियों के बारे में पूछे जाने पर 40 वर्षीय नेता ने कहा, ‘‘यह आसान काम नहीं है। लेकिन हमारा समर्थन कर रहे दल लोगों एवं राज्य के कल्याण के लिए काम करने की खातिर प्रतिबद्ध हैं। हम एक समान एजेंडे पर काम करेंगे।’’
मेघालय में 27 फरवरी को विधानसभा चुनाव हुए थे और तीन फरवरी को उसके नतीजे आए। पिछले चुनाव में एक भी सीट जीतने में नाकाम रही भाजपा के खाते में इस बार दो सीटें गईं। राज्य विधानसभा की 59 सीटों के लिए ही चुनाव हुआ था क्योंकि आईईडी विस्फोट में राकांपा के एक उम्मीदवार के मारे जाने के बाद एक सीट पर चुनाव रद्द कर दिया गया था।