
वर्ष 1934 में जन्में भूमिहीन मांझी आर्थिक रूप से कमजोर महादलित मुसहर समुदाय से आते हैं। उनका गांव पहाड़ के बीच होने के कारण वह सड़क, बिजली, स्वास्थ्य सेवा सहित अन्य मूलभूत सेवाओं से वंचित थे। दुर्गम जगह पर गांव के होने पर वहां के लोग हमेशा खुद को कोसा करते थे।
पहाड़ को काट कर बनाए गए उस रास्ते के कारण उनके गांव की दूरी पास के वजीरगंज प्रखंड से 55 किलोमीटर से घट कर 15 किलोमीटर हो गयी।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा मांझी के नाम पर वर्ष 2010-11 में शुरू की गयी दशरथ मांझी कौशल विकास योजना के तहत अबतक कुल 83792 युवक एवं युवतियों को विभिन्न ट्रेडों में प्रशिक्षण दिया जा चुका है। वर्तमान वित्तीय वर्ष के दौरान इस योजना के तहत डेढ लाख युवक एवं युवतियों को 40 ट्रेडों में प्रशिक्षण दिये जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया। इसके तहत 112 केंद्रों पर 18200 को प्रशिक्षित किया जा चुका है।