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'पिक्चर डूबेगी', सुनकर महेश भट्ट को सताया डर, हुए रुआंसे... फिर हफ्तों सिनेमाघरों में डटी रही फिल्म

 Written By: Priya Shukla
 Published : May 20, 2025 02:16 pm IST,  Updated : May 20, 2025 02:16 pm IST

महेश भट्ट ने 'आशिकी' से लेकर 'सड़क' जैसी फिल्मों के जरिए इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान बनाई है। लेकिन, क्या आप उस फिल्म के बारे में जानते हैं जिसकी रिलीज के बाद महेश भट्ट ये सोचकर ही आंसुओं में डूब गए थे कि ये फिल्म डूब जाएगी।

Mahesh Bhatt- India TV Hindi
महेश भट्ट Image Source : INSTAGRAM

महेश भट्ट ने कई शानदार फिल्मों का निर्माण किया है। उन्होंने हिंदी सिनेमा को 'आशिकी' और 'सड़क' जैसी शानदार फिल्में दी हैं, जो आज भी दर्शकों के बीच पसंद की जाती हैं। लेकिन, करियर के शुरुआती दिनों में उन्हें भी काफी संघर्ष का सामना करना पड़ा। महेश भट्ट तब 26 साल के थे, जब उन्होंने 'मंजिलें और भी हैं' के साथ निर्देशक के रूप में अपना करियर शुरू किया। लेकिन, फिल्मी दुनिया का दामन उन्होंने काफी पहले थाम लिया था। बात है 1996 की, जब राजेश खन्ना की दो फिल्मों ने सिनेमाघरों में दस्तक दी। पहली थी शक्ति सामंता की 'आराधना' और दूसरी राज खोसला की 'दो रास्ते'। महेश भट्ट, उन दिनों फिल्म में एक युवा 'प्रोडक्शन हैड' थे और इसी दौरान फिल्म की खराब स्थिति के बारे में सोचकर ही वह रोने लगे थे। इस बात का जिक्र राज खोसला की आने वाली बायोग्राफी में कही गई है, जिनकी 31 मई को  100वीं जयंती है।

5 दिसंबर 1969 को रिलीज हुई थी दो रास्ते

राज खोसला ने थ्रिलर 'सीआईडी' (1956), 'वो कौन थी?' (1964) और रोमांटिक ड्रामा 'दो बदन' (1966) जैसी फिल्मों में अपनी बहुमुखी प्रतिभा दिखाई। उन्होंने ही मराठी लेखक चंद्रकांत काकोडकर के उपन्यास 'नीलांबरी' पर आधारित 'दो रास्ते' बनाई। 5 दिसंबर, 1969 को जब फिल्म बॉम्बे के रॉयल ओपेरा हाउस में रिलीज हुई तो फिल्म के एडिटर वामन भोंसले, महेश भट्ट के साथ थिएटर पहुंचे।

पिक्चर डूबेगी सुनकर रो पड़े महेश भट्ट

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, बायोग्राफी के लेखक अंबोरिश रॉय चौधरी किताब में लिखते हैं, 'देसाई नाम का एक मैनेजर महेश भट्ट और भोंसले के पास आया और कहा, 'सामने वो शक्ति सामंत की पिक्चर चल रही है 'आराधना', वो फिल्म एडवांस में ही हाउसफुल है। यहां पर लोग नहीं आते। पिक्चर डूबेगी।' जैसे ही महेश भट्ट ने यह सुना उनके आंसू ही निकल पड़े। वामन भोंसले पहले भी इन सबका सामना कर चुके थे, लेकिन महेश भट्ट उस दौरान कुछ 19-20 साल के ही थे और फिल्म से भावनात्मक रूप से जुड़े हुए थे।'

महेश भट्ट को मिला 300 रुपये का बोनस

हालांकि जब 'दो रास्ते' रिलीज हुई तो उसी ओपेरा हाउस में ये फिल्म 50 हफ्तों से ज्यादा समय तक टिकी रही। फिल्म की सफलता के बाद राज खोसला ने भी कुछ स्टाफ मेंबर्स के लिए बोनस का ऐलान किया और महेश भट्ट को भी 300 रुपये का बोनस मिला। ये बोनस उन दिनों महेश भट्ट के लिए उनकी सैलरी के बराबर थी।

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