5 अगस्त 1962 को सुबह इन्हें डॉ. हैमन एंगलबर्ग का फ़ोन आया जिन्होंने बताया कि मर्लिन मॉनरो की घर पर मृत्यु हो गई है। उन्हें ये भी बताया गया कि मर्लिन मॉनरो की मौत अधिक मात्रा में नींद की गोली खाने से हुई है।
मर्लिन मॉनरो का शव में बिस्तर पर था और उसमें ऐंठन शुरु हो गई थी जो किसी व्यक्ति के मरने के छह से आठ घंटे के बाद शुरु हो जाती है। शव की अंत्येष्टि की तैयारी के लिए एबोट की कंपनी को बुलाया गया। मर्लिन मॉनरो का केस इतना जटिल था कि शव के पोस्टमॉर्टम में लगभग तीन घंटे लग गए।