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Pehla Pyaar Doosri Baar: पुराने क्रश से दोबारा इश्क, युवा सितारों की केमिस्ट्री और राजकुमार राव के कैमियो ने बढ़ाया फिल्म का मजा

 Written By: Jaya Dwivedie
 Published : Oct 23, 2026 11:50 am IST,  Updated : Oct 23, 2026 12:11 pm IST

‘पहला प्यार दूसरी बार’ दोस्ती, अधूरे क्रश और आधुनिक रिश्तों की उलझनों पर आधारित रोमांटिक कॉमेडी है। युवा कलाकारों का अभिनय, राजकुमार राव का कैमियो और संगीत मनोरंजन बढ़ाते हैं, हालांकि कहानी में नयापन सीमित है।

pehla pyaar doosri baar
पहला प्यार दूसरी बार। Photo: IMDB
  • फिल्म रिव्यू: पेहला प्यार दूसरी बार
  • स्टार रेटिंग 3/5
  • पर्दे पर: 23/10/2026
  • डायरेक्टर: अनुज सैनी
  • शैली: रोमांटिक कॉमेडी

कुछ यादें ऐसी होती हैं, जिन्हें वक्त के साथ भुला देना आसान नहीं होता। स्कूल के दिनों का पहला क्रश, अधूरी रह गई मोहब्बत और वो बातें, जिन्हें कभी कहने की हिम्मत नहीं हुई, जिंदगी के किसी मोड़ पर फिर से याद आने लगती हैं। लेकिन क्या पुरानी यादों को दोबारा जीने से अधूरी प्रेम कहानी पूरी हो सकती है? या फिर बीते वक्त की खूबसूरत यादें वर्तमान की हकीकत से टकराकर रिश्तों को और उलझा देती हैं? निर्देशक अनुज सैनी की फिल्म 'पहला प्यार दूसरी बार' इसी सवाल को रोमांटिक कॉमेडी के अंदाज में पेश करती है। लव रंजन की लेखन शैली से जुड़ी इस फिल्म में दोस्ती, आकर्षण, कमिटमेंट का डर और आधुनिक रिश्तों की जटिलताओं को दिखाने की कोशिश की गई है। फिल्म की दुनिया रंगीन है, किरदार आज की युवा पीढ़ी से जुड़े नजर आते हैं और कहानी में हल्के-फुल्के मनोरंजन के कई मौके भी हैं। हालांकि, इसकी कुछ कमजोरियां भी हैं, लेकिन युवा कलाकारों की ऊर्जा और संगीत इसे एक बार देखने लायक बनाते हैं।

कहानी और प्लॉट

'पहला प्यार दूसरी बार' की कहानी तीन दोस्तों गौतम (स्पर्श वालिया), वेदांत (कुणाल वैद) और शिवि (सरगुन कौर लूथरा) के इर्द-गिर्द घूमती है। तीनों अपनी कॉर्पोरेट जिंदगी में व्यस्त हैं, जहां काम का दबाव, प्रमोशन की दौड़ और निजी जिंदगी में अकेलापन उनके रोजमर्रा का हिस्सा बन चुके हैं। उम्र बढ़ने के साथ उनके आसपास के लोग शादी करके अपनी जिंदगी में आगे बढ़ रहे हैं, लेकिन इन तीनों की प्रेम कहानी अब भी अधूरी है। ऐसे में स्कूल के दिनों का एक रीयूनियन उनके लिए पुरानी यादों को ताजा करने और अपने पहले क्रश के सामने दिल की बात रखने का मौका बन जाता है। गौतम स्वभाव से थोड़ा झिझकने वाला और रोमांस की दुनिया में अपनी कल्पनाओं में खोया रहने वाला इंसान है। रीयूनियन में उसकी मुलाकात गेहना (अलीशा चोपड़ा) से होती है, जो खूबसूरत, आत्मविश्वासी और अपने अंदाज में बेबाक है। गेहना हाल ही में दिल टूटने के दर्द से गुजर रही है। दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ती हैं और एक रात साथ बिताने के बाद गेहना इस रिश्ते को गंभीरता से लेने लगती है। लेकिन जब बात जिंदगी भर साथ निभाने और प्रतिबद्धता की आती है, तो गौतम के कदम पीछे हटने लगते हैं। यहां फिल्म आधुनिक रिश्तों की एक दिलचस्प समस्या सामने रखती है। किसी के करीब आना आसान हो सकता है, लेकिन उस रिश्ते की जिम्मेदारी उठाने के लिए तैयार होना अलग बात है।

दूसरी तरफ वेदांत के मन में स्कूल के समय से ही सिमरन (साक्षी वैद्य) के लिए भावनाएं हैं। वह आखिरकार अपने दिल की बात कह देता है और दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ने लगती हैं। लेकिन कहानी में मुश्किल तब आती है, जब सिमरन का मंगेतर विकेश (गोबिंद सिंह मेहता) उसे लेने पहुंच जाता है। उसकी शादी की तैयारियां चल रही हैं और वेदांत के पास अपनी मोहब्बत को साबित करने के लिए बहुत कम समय बचा है। फिल्म का यह हिस्सा एकतरफा प्यार, पुराने आकर्षण और वर्तमान के रिश्तों के बीच पैदा होने वाले टकराव पर आधारित है। हालांकि वेदांत की भावनाएं समझ में आती हैं, लेकिन किसी पुराने क्रश के लिए मौजूदा जिंदगी का इतना बड़ा फैसला बदल देना कितना उचित है, यह सवाल कहानी के साथ बना रहता है।

शिवि की कहानी कुछ अलग है। वह अपने स्कूल के क्रश करण शेरगिल (तुषार छिब्बर) को प्रभावित करने के लिए अपने व्यक्तित्व और लुक में बदलाव करती है। करण महिलाओं के बीच लोकप्रिय रहने वाला ऐसा शख्स है, जो रिश्तों को लेकर गंभीर होने के बजाय आकर्षण और मौज-मस्ती को ज्यादा महत्व देता है। शिवि उसके करीब आती है, लेकिन धीरे-धीरे उसे एहसास होता है कि उसकी भावनाएं करण जैसी नहीं हैं। जिस मुलाकात से उसे प्रेम की उम्मीद थी, वही उसके लिए दिल टूटने का कारण बन जाती है। इन तीनों की अलग-अलग प्रेम कहानियां फिल्म को आधुनिक डेटिंग की दुनिया में ले जाती हैं, जहां आकर्षण, भावनात्मक जुड़ाव और प्रतिबद्धता को लेकर हर किसी की अपनी परिभाषा है। जब रीयूनियन के बाद दोस्त अपनी उलझनों के साथ वापस लौटते हैं तो वेदांत की मोहब्बत को बचाने की कोशिश उनकी जिंदगी का नया मिशन बन जाती है। यहीं से कहानी में हास्य, गलतफहमियां और कुछ अप्रत्याशित घटनाएं तेजी से सामने आने लगती हैं। फिल्म का आधार परिचित जरूर है, लेकिन दोस्ती और प्यार के बीच का संतुलन इसे हल्का-फुल्का मनोरंजन देने में मदद करता है।

अभिनय

फिल्म की सबसे बड़ी खूबियों में इसका युवा कलाकारों का समूह शामिल है। स्पर्श वालिया गौतम के किरदार में अच्छा प्रभाव छोड़ते हैं। वह एक ऐसे युवक की भूमिका निभाते हैं, जो प्यार को लेकर बड़े-बड़े सपने देखता है, लेकिन जब वास्तविक जिंदगी में फैसला लेने की बारी आती है तो उलझ जाता है। स्पर्श अपने किरदार की झिझक, असमंजस और कॉमिक परिस्थितियों को सहजता से निभाते हैं। उनके अभिनय में जरूरत से ज्यादा नाटकीयता नहीं है और उनकी स्क्रीन प्रेजेंस कहानी को आगे बढ़ाने में मदद करती है। कुणाल वैद वेदांत के रूप में अच्छे लगते हैं। उनके किरदार में पुराने प्यार को पाने की बेचैनी है और वह अपनी भावनाओं को व्यक्त करने की कोशिश करते हैं। स्पर्श और कुणाल के बीच दोस्ती की केमिस्ट्री फिल्म के मजबूत हिस्सों में से एक है। दोनों के संवाद और एक-दूसरे के प्रति उनका सहज व्यवहार कई दृश्यों को मनोरंजक बनाते हैं। फिल्म में उनकी दोस्ती कई बार रोमांटिक ट्रैक से भी ज्यादा प्रभावशाली लगती है।

सरगुन कौर लूथरा शिवि के किरदार में आत्मविश्वास के साथ नजर आती हैं। अपने दो दोस्तों के बीच सहज रहने वाली शिवि जब करण को प्रभावित करने के लिए खुद को बदलने की कोशिश करती है तो उसके किरदार के अलग-अलग पहलू सामने आते हैं। सरगुन आकर्षण, असुरक्षा और दिल टूटने की भावनाओं को अच्छी तरह संभालती हैं। तुषार छिब्बर के साथ उनकी केमिस्ट्री भी कहानी के मुताबिक प्रभावी है। अलीशा चोपड़ा गेहना के रूप में फिल्म की प्रमुख आकर्षणों में शामिल हैं। उनका किरदार केवल एक खूबसूरत लड़की तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसमें भावनात्मक असुरक्षा, बेबाकी और रिश्ते को लेकर गंभीरता भी दिखाई देती है। अलीशा अपने संवादों और स्क्रीन प्रेजेंस से किरदार को दिलचस्प बनाती हैं। साक्षी वैद्य सिमरन की भूमिका में संयमित अभिनय करती हैं। उनका किरदार अपेक्षाकृत शांत है, लेकिन लेखन उसे ज्यादा गहराई नहीं दे पाता। गोबिंद सिंह मेहता भी अपनी भूमिका में ठीक हैं। फिल्म का एक खास आकर्षण राजकुमार राव का विस्तारित कैमियो है, जो पुराने प्यार और एकतरफा मोहब्बत की भावनाओं को लोकप्रिय हिंदी सिनेमा के अंदाज में सामने लाता है। उनका हिस्सा फिल्म में अलग ऊर्जा लेकर आता है और दर्शकों के लिए यादगार पलों में शामिल हो सकता है।

निर्देशन और तकनीकी पक्ष

अनुज सैनी के निर्देशन में बनी इस फिल्म की कहानी का मूल विचार परिचित है, लेकिन इसे आज की पीढ़ी के रिश्तों से जोड़ने की कोशिश की गई है। लव रंजन, जेहान हांडा और अनुज सैनी की लेखन टीम कामकाजी जिंदगी, डेटिंग, कमिटमेंट के डर और एकतरफा प्यार जैसे विषयों को हल्के-फुल्के अंदाज में पेश करती है। कहानी में ऐसे संवाद हैं, जो युवा दर्शकों को अपनी जिंदगी से जुड़े लग सकते हैं। फिल्म की अच्छी बात यह है कि रिश्तों में पैदा होने वाली हर परेशानी का दोष किसी एक पक्ष पर डालने के बजाय किरदारों की व्यक्तिगत कमजोरियों को भी सामने रखा गया है।

फिल्म का पहला हिस्सा आसानी से आगे बढ़ता है। स्कूल रीयूनियन, पुराने दोस्तों से मुलाकात और अधूरे क्रश के दोबारा सामने आने की परिस्थितियां कहानी में एक परिचित आकर्षण पैदा करती हैं। हालांकि कुछ समय बाद पटकथा को यह तय करने में परेशानी होती है कि उसे किस प्रेम कहानी पर ज्यादा ध्यान देना है। दूसरे हिस्से में घटनाएं गति पकड़ती हैं और वेदांत की मोहब्बत को लेकर दोस्तों की कोशिशों से कॉमेडी के मौके पैदा होते हैं। क्लाइमैक्स कहानी को हल्के-फुल्के अंदाज में समेटता है। फिल्म की सिनेमैटोग्राफी और खूबसूरत लोकेशन इसे देखने में आकर्षक बनाती हैं। देहरादून और मसूरी के पहाड़ी परिवेश से जुड़ा माहौल कहानी के रीयूनियन और रोमांस वाले पक्ष को सूट करता है। प्रोडक्शन का अंदाज चमकदार है और युवा किरदारों की दुनिया को रंगीन तरीके से प्रस्तुत करता है।

संगीत फिल्म की प्रमुख खूबियों में शामिल है। जुबिन नौटियाल का 'प्यार मांगा है तुम ही से' और 'जाने किस मोड़ पे' जैसे गीत कहानी में रोमांटिक माहौल बनाते हैं। गाने उन भावनाओं को उभारते हैं, जिन्हें संवादों के जरिए पूरी तरह व्यक्त करना हमेशा आसान नहीं होता। हालांकि, बैकग्राउंड म्यूजिक का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल कुछ दृश्यों में खटकता है। कॉमेडी और भावनात्मक पलों के दौरान संगीत कई बार संवादों पर हावी होने लगता है, जिससे दृश्य का स्वाभाविक प्रभाव कम हो जाता है। कुछ बातचीत में जरूरत से ज्यादा उत्साह दिखाने की कोशिश भी बनावटी लगती है।

क्या काम नहीं आया?

'पहला प्यार दूसरी बार' की सबसे बड़ी कमजोरी इसकी कहानी का कई जगह पुरानी रोमांटिक कॉमेडी के फॉर्मूले पर निर्भर रहना है। स्कूल के क्रश से दोबारा मिलना एक आकर्षक शुरुआत हो सकती है, लेकिन केवल पुरानी यादों के आधार पर किसी रिश्ते को मजबूत प्रेम कहानी में बदलना आसान नहीं है। वेदांत का सिमरन के लिए अचानक इतना गंभीर हो जाना, जबकि दोनों के बीच स्कूल के समय ज्यादा बातचीत नहीं हुई थी, कुछ हद तक अविश्वसनीय लगता है। सिमरन की शादी के बेहद करीब होने के बावजूद घटनाओं का तेजी से आगे बढ़ना भी कहानी को सुविधाजनक मोड़ देता है। गौतम और गेहना के रिश्ते में भी कुछ दिलचस्प सवाल उठते हैं, लेकिन फिल्म हर स्थिति को पर्याप्त गहराई से नहीं तलाशती। शिवि की कहानी भावनात्मक रूप से जुड़ाव पैदा कर सकती थी, लेकिन उसके अनुभवों को भी और विस्तार देने की जरूरत थी। तीन अलग-अलग प्रेम कहानियों को एक साथ संभालने की कोशिश में कुछ किरदार अधूरे रह जाते हैं।

इसके अलावा बैकग्राउंड स्कोर का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल, कुछ दृश्यों में ऊंचे स्वर में संवाद और बार-बार हास्य पैदा करने की कोशिश कहानी की सहजता को प्रभावित करती है। फिल्म की अवधि भी कुछ जगह लंबी महसूस होती है। लव रंजन की पिछली रोमांटिक कॉमेडी फिल्मों में जिस तरह के तीखे संवाद और यादगार टकराव देखने को मिले थे, वैसा प्रभाव यहां लगातार नहीं बन पाता। फिल्म में अच्छे पल जरूर हैं, लेकिन लेखन और संपादन में थोड़ी और कसावट इसे अधिक प्रभावशाली बना सकती थी।

क्या रहा फिल्म का प्लस पॉइंट?

इन कमियों के बावजूद फिल्म में कई ऐसी बातें हैं, जो इसे देखने लायक बनाती हैं। सबसे पहले, तीनों दोस्तों की आपसी केमिस्ट्री कहानी को सहज बनाती है। उनकी बातचीत और एक-दूसरे की मदद करने का अंदाज फिल्म में दोस्ती का एक प्यारा पक्ष सामने लाता है। इसके अलावा, आधुनिक रिश्तों से जुड़े विषय आज के युवा दर्शकों को आकर्षित कर सकते हैं। कमिटमेंट से बचना, किसी के प्रति आकर्षण को प्यार समझ लेना और एकतरफा भावनाओं में उलझ जाना ऐसे अनुभव हैं, जिनसे कई लोग खुद को जोड़ पाएंगे।

स्पर्श वालिया, कुणाल वैद, सरगुन कौर लूथरा और अलीशा चोपड़ा का अभिनय फिल्म को मजबूती देता है। राजकुमार राव का कैमियो भी एक खास सिनेमाई आकर्षण जोड़ता है। संगीत रोमांटिक माहौल को बेहतर बनाता है और खूबसूरत लोकेशन फिल्म को देखने में अच्छा अनुभव देती हैं। सबसे अहम बात यह है कि फिल्म रिश्तों को केवल लड़के बनाम लड़की की बहस में बदलने के बजाय व्यक्तिगत असुरक्षाओं और भावनात्मक अपरिपक्वता के नजरिए से देखने की कोशिश करती है। यही इसका सकारात्मक पक्ष है।

वर्डिक्ट

'पहला प्यार दूसरी बार' एक हल्की-फुल्की रोमांटिक कॉमेडी है, जो पहले प्यार, अधूरे क्रश और दोस्ती की यादों को नए अंदाज में पेश करने की कोशिश करती है। स्पर्श वालिया, कुणाल वैद, सरगुन कौर लूथरा और अलीशा चोपड़ा का अभिनय फिल्म को संभालता है, जबकि राजकुमार राव का कैमियो और सुरीला संगीत इसे अतिरिक्त आकर्षण देते हैं। हालांकि, कहानी कई जगह पुराने फॉर्मूले पर चलती है और कुछ रोमांटिक मोड़ विश्वसनीय नहीं लगते। इसके बावजूद फिल्म में मनोरंजन के पल हैं। युवा रिश्तों पर बनी हल्की फिल्म देखना चाहते हैं, तो इसे एक बार मौका दे सकते हैं।

रेटिंग: 3/5

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