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राम मंदिर चंदा चोरी कैसे हुई? कैश और ज्वेलरी चुराने की क्या थी तकनीक, जानें कैसे हुआ खुलासा

 Edited By: Kajal Kumari @lallkajal
 Published : Jun 26, 2026 03:16 pm IST,  Updated : Jun 27, 2026 02:45 pm IST

अयोध्या राम मंदिर में हुई करोड़ों की चंदा चोरी मामले में आठ आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं। कैश, सोना-चांदी जवाहरात को चुराने के लिए सीसीटीवी कैमरे से बचने के लिए क्या जुगत लगाई जाती थी, कैसे चोरी होती थी? जानें हर एक डिटेल्स...

राम मंदिर चंदा चोरी- India TV Hindi
राम मंदिर चंदा चोरी

अयोध्या राम मंदिर चंदा चोरी मामले में आई एसआईटी की रिपोर्ट में कई तरह के चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। इस केस में पुलिस ने आठ आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की और फिर उन्हें गिरफ्तार किया गया। इनकी गिरफ्तारी के बाद राम मंदिर तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और अनिल मिश्रा ने अपने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। जानकारी के अनुसार, एसआईटी की जांच में आंतरिक ऑडिट रिपोर्ट का भी परीक्षण किया है, जिसमें पता चला है कि वित्तीय वर्ष 2022-23, 2023-24 और 2024-25 की आंतरिक ऑडिट रिपोर्ट में कई प्रक्रियात्मक कमियां पाई गई हैं, इसमें हुंडियों की संख्या औरअभिलेखों में अंतर देखने को मिला है।

राम मंदिर में चंदा चोरी
Image Source : AI IMAGE (INDIATV)राम मंदिर में चंदा चोरी

चढ़ावा चोरी का कैसे हुआ शक?

मई महीने के आखिरी सप्ताह में राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारियो ने बैंक में जमा हो रही रकम का ब्यौरा देखा और रोजाना दान पेटियों के खाली होने के क्रम की पड़ताल की तो सबसे चोरी का शक पैदा हुआ। दरअसल एक दान पेटी में 6 से 7 लाख रुपए एक बार में जमा होते थे। लेकिन कुछ सप्ताह के क्रम में 500 की गड्डी में कमी देखी गई। इसके बाद शक गहराया तो नोट गिनने वाले कमरे में कुछ हिडन कैमरे लगवाए गए।

इन हिडन कैमरे की एक सप्ताह की फुटेज देखी गई तो पता चला नोट गिनने की प्रक्रिया में लगे कर्मचारी सामने दिख रहे सीसीटीवी के सामने खड़े हो जाते और दूसरा साथी बनाए गए नोटों की गड्डी में नोट चोरी कर  कपड़ों में छुपा लेते हैं। लेकिन हिडन कैमरे में उनकी यह चोरी पकड़ी गई। मिली जानकारी के अनुसार यह चोरी एक और तरह से हो रही थी।

राम मंदिर में चढ़ावा चोरी कैसे होती थी?
नोट गिनने वाले कर्मचारी हर गड्डी में एक्स्ट्रा नोट जमा कर देते। जब बैंक के पास रकम गिनने की बारी आती तो हर गड्डी के एक एक नोट को गिनने के बजाए सिर्फ गड्डी गिनी जाती और उसका वाउचर बन जाता। जब यह रकम बैंक में जमा करने के लिए मंदिर से बैंक में ले जाई जाती उस दौरान हर गड्डी में जो एक्स्ट्रा नोट लगाए गए थे वह निकाल दिए जाते। इस तरह वाउचर से रकम का मिलान भी हो जाता और रकम चोरी भी हो रही थी। अनुकल्प मिश्रा चढ़ावे के वाउचर बनाने की प्रक्रिया से जुड़ा था और वह यही हेरा फेरी अपने बहनोई लव कुश मिश्रा के जरिए कर रहा था।

चंदा चोरी मामला
Image Source : AI IMAGE (INDIATV)चंदा चोरी मामला

सभी कर्मचारी एक दूसरे के परिचित थे
मामला खुलने के बाद लव कुश मिश्रा के ही घर से पुलिस ने करीब 10 लाख रुपए बरामद भी किए थे। नोट गिनने की प्रक्रिया से जुड़े सभी कर्मचारी किसी न किसी के परिचित थे किसी न किसी की सिफारिश से काम करते थे। जैसे चंपत राय का ड्राइवर टिन्नू यादव व्यवस्थापक था तो टिन्नू यादव ने अपने चचेरे भाई मनीष यादव को नोट गिनने की प्रक्रिया में लगा दिया था। ऐसे ही सालों से कम कर रहे अनुकल्प मिश्रा ने अपने बहनोई लव कुश मिश्रा को लगवा दिया था।

लापरवाही भी बरती गई?
ड्यूटी से वापस जाते समय किसी भी कर्मचारी की तलाशी नहीं लेने की लापरवाही का ही नतीजा था कि धीरे-धीरे  उस कमरे से ही चोरी करने लगे थे जहां दान पेटियां खुलती, नोट छांटे जाते और गड्डी बनाई जाती थी। पकड़े गए अविनाश पांडे के सीसीटीवी फुटेज देखे गए और उसके द्वारा जो रकम चोरी की जा रही थी इस तारीख में बैंक में रकम जमा भी कराई गई है। राम मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारी ने पूछताछ के दौरान मिलान कराया तो पुष्टि हुई की चढ़ावा चोरी से जमा की गई रकम का एक हिस्सा अविनाश अपने बैंक खाते में जमा कर रहा था।

बाली, झुमकी, नथ भी चुरा लिए 
जो श्रद्धालु दानपेटी में जेवरात दान करते थे उसको भी यह लोग चोरी कर लेते थे। बाली, झुमकी, नथ,  बाल रूप राम लाल के कंगन, पैजनिया जैसे जेवरात भी चोरी कर लेते थे। सबसे अहम बात की चोरी पहले करते बाद में नोटों की गिनती या दान पेटी में मिले जेवरात की लिखा पढ़ी होती थी। इसके अलावा इस मामले में राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव और सुभाष चंद्र ऐसे व्यक्ति हैं जो बराबर राम मंदिर ट्रस्ट के उस कमरे में आते जाते थे जहां दान पेटियां खुलती थी।

चंदा चोरी का खुलासा
Image Source : AI IMAGE (INDIATV)चंदा चोरी का खुलासा

अयोध्या में चढ़ावे चोरी मामले में FIR की पूरी डिटेल्स
राम जन्मभूमि की चढ़ावा धनराशि की गणना के संबंध में राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट अयोध्या के अनुरोध पर गठित विशेष जांच दल की जांच आख्या एवं उपलब्ध साक्ष्य के परीक्षण से यह तथ्य स्पष्ट रूप से प्रकाश में आया है कि गणना प्रक्रिया में कुछ कर्मियों द्वारा चढ़ावा धनराशि की चोरी अपराधिक ढंग से की गई है। विशेष जांच जल की प्रारंभिक जांच में वर्णित तथ्यों के आधार पर अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष यादव, करुणेश पांडे, रमाशंकर मिश्रा के विरुद्ध चढ़ावा धनराशि चोरी की संपत्ति रखने/प्राप्त करने तथा सुसंगत धाराओं में साथ ही सुभाष श्रीवास्तव, रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू के विरुद्ध सुसंगत धाराओं में अभियोग पंजीकृत किया जाना आवश्यक है। अतः निवेदन है कि उपरोक्त तथ्यों के आधार पर सुसंगत धाराओं में अभियोग पंजीकृत कर नियम अनुसार वैधानिक कार्यवाही करने का कष्ट करें।

किस आरोपी की क्या भूमिका थी

करुणेश पांडेय-राम मंदिर में चंदा चोरी में गिरफ्तार करुणेश पांडेय का काम मंदिर में चढ़ाए जाने वाले चढ़ावों का गणना कक्ष तक पहुंचाने का था और उस चढ़ावे को गणना कक्ष सिर्फ ले जाने का ही नहीं बल्कि गिनने का काम भी करता था।

रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव- श्रीराम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के करीबी रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू  राम मंदिर में मंदिर में श्रद्धालुओं के दर्शन कराने से लेकर जनसुविधाओं का ध्यान रखता था।वह एक अकेला ऐसा शख्स था, जो बेरोकटोक मंदिर में कही आ जा सकता था। टुन्नू यादव का काम दानपात्रों की देखरेख करना और उन्हें बेसमेंट तक पहुंचाने का था।

सुभाष चंद्र श्रीवास्तव- सुभाष चंद्र श्रीवास्तव एसबीआई से रिटार्ड बैंक कर्मी है और राम मंदिर में आने वाले चढ़ावे वाले नोट गिनने की पूरी प्रक्रिया का इंचार्ज था। कैश काउंटिंग सेंटर के स्टाफ की निगरानी करना, काउंटिंग सेंटर के स्टाफ का प्रभार भी इसके पास था।

लवकुश मिश्रा-अयोध्या के राम मंदिर में आने वाले तमाम चढ़ावा और नकदी को गिनने वाली टीम में लवकुश मिश्रा शामिल थे. लवकुश मिश्र मंदिर में आने वाले चढ़ावे को गिनने का काम करता था. लवकुश मिश्र के घर से करीब 10 लाख रुपए बरामद हुए थे.

अनुकल्प मिश्रा- चढ़ावे को गणना कक्ष में गिनने की जिम्मेदारी अनुकल्प मिश्रा के पास थी और वह चढ़ावे वाले रुपये को गिनने का काम कर रहा था। वह नोट गिनने की प्रक्रिया में शामिल था। रिश्ते में लवकुश मिश्रा का साला है।

मनीष यादव- राम मंदिर के दानपात्रों में चढ़ाए गए चढ़ावे में नकली नोट निकालने और उसे गिनकर अलग रखने की जिम्मेदारी मनीष यादव पर थी।

अविनाश शुक्ला- चढ़ावे वाले पैसे और नकदी को दान पात्रों से निकालने और धनराशि को गणना कक्ष तक ले जाने का काम अविनाश शुक्ला करता था। वह चढ़ावे में आई नकदी की गिनती करने वाली टीम में शामिल था।

अब आगे क्या होगा?
पुलिस सूत्रों ने बताया कि आरोपियों की जांच अभी सिर्फ वादी की शिकायत के आधार पर चल रही है। SIT की रिपोर्ट के बाद जांच में कई और नाम शामिल हो सकते हैं। एक एक करके आरोपियों के स्टेटमेंट रिकॉर्ड हो रहे हैं और उनको एक दूसरे से मिलाकर वेरिफाई किया जा रहा है। वहीं, पुलिस सभी आरोपियों के बैंक खाते की भी जांच करेगी, जिससे मनी ट्रेल स्टैबलिश हो सके। आगे जैसे जैसे तथ्य सामने आयेंगें, जांच का दायरा बढ़ता जाएगा।

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