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होर्मुज को लेकर क्यों आमने-सामने हैं अमेरिका और ईरान? जानिए अब आगे क्या हो सकता है

 Written By: Vineet Kumar Singh @VickyOnX
 Published : Jul 11, 2026 08:50 am IST,  Updated : Jul 11, 2026 08:50 am IST

अमेरिका ने ईरान से सार्वजनिक रूप से 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को सुरक्षित और जहाजों के लिए खुला घोषित करने की मांग की है। युद्धविराम के बावजूद हमले, ईरान में सत्ता संघर्ष, इजरायल की चेतावनी और खाड़ी देशों की सक्रियता से तनाव बना हुआ है। ओमान में होने वाली वार्ता संकट की दिशा तय कर सकती है।

अमेरिका और ईरान के बीच...- India TV Hindi
अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का मुद्दा अब होर्मुज पर टिक गया है। Image Source : INDIA TVC/AP

Highlights

  • अमेरिका चाहता है कि ईरान सार्वजनिक रूप से होर्मुज को सुरक्षित और जहाजों के लिए खुला घोषित करे।
  • ईरान का कहना है कि जलडमरूमध्य पर नियंत्रण सिर्फ उसका होगा और बाहरी दखल स्वीकार नहीं होगा।
  • युद्धविराम के बावजूद हमले और ईरान के अंदरूनी सत्ता संघर्ष ने संकट को और जटिल बना दिया है।

वॉशिंगटन/तेहरान: ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव अब होर्मुज जलडमरूमध्य पर आकर टिक गया है। अमेरिका चाहता है कि ईरान दुनिया के सामने आधिकारिक तौर पर यह घोषणा करे कि यह समुद्री रास्ता पूरी तरह खुला है और यहां से गुजरने वाले किसी भी जहाज पर हमला नहीं किया जाएगा। अमेरिका के वरिष्ठ अधिकारियों ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर न्यूज एजेंसी AP को बताया कि शुक्रवार को बताया कि यह मांग इसलिए की जा रही है ताकि दुनिया को भरोसा मिल सके कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति फिर से सामान्य हो सकेगी।

अमेरिका ने यह मांग क्यों की?

अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, इस हफ्ते फिर से हुए हमलों की वजह ईरान के कट्टरपंथी धड़े हैं, जिन्होंने तेहरान और वॉशिंगटन के बीच हुए अंतरिम युद्धविराम को कमजोर करने की कोशिश की। अधिकारियों का कहना है कि ईरान के भीतर सत्ता संघर्ष चल रहा है और इसी वजह से किसी भी समझौते तक पहुंचना और उसे लंबे समय तक बनाए रखना मुश्किल हो गया है।

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Image Source : APडोनाल्ड ट्रंप ने सीजफायर के खात्मे का ऐलान कर दिया है।

ट्रंप का इस पर क्या कहना है?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर लिखा कि वह अंतरिम युद्धविराम समझौते को 'खत्म' मानते हैं। इसके बावजूद उन्होंने साफ किया कि अमेरिका स्थायी रूप से युद्ध समाप्त करने के लिए ईरान के साथ बातचीत जारी रखेगा। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक ट्रंप ने वार्ताकारों को समझौते के लिए सीमित समय दिया है। अगर बातचीत विफल होती है तो राष्ट्रपति के पास कई दूसरे विकल्प भी मौजूद हैं।

ईरान में सत्ता संघर्ष क्यों बढ़ा?

अमेरिका का कहना है कि युद्ध की शुरुआत में अमेरिका और इजरायल के हमलों में ईरान के लंबे समय तक सर्वोच्च नेता रहे आयतुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद वहां सत्ता को लेकर खींचतान चल रही है। इसी वजह से ईरान के भीतर अलग-अलग गुट अलग रुख अपना रहे हैं और हालात लगातार बदल रहे हैं।

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Image Source : APईरान में अयातुल्ला अली खामनेई की मौत के बाद से सत्ता संघर्ष चल रहा है।

होर्मुज इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। युद्ध शुरू होने से पहले दुनिया में होने वाले कुल तेल और प्राकृतिक गैस के व्यापार का करीब 20 प्रतिशत इसी रास्ते से गुजरता था। युद्ध के दौरान ईरान के इस मार्ग पर नियंत्रण की वजह से वैश्विक ऊर्जा संकट पैदा हो गया था। उस समय कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं। हालांकि अब युद्ध के दौरान के उच्च स्तर से तेल की कीमतों में काफी गिरावट आ चुकी है।

ईरान ने जवाब में क्या कहा है?

संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत अमीर सईद इरावानी ने कहा कि 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को खोलने, वहां से बारूदी सुरंगें हटाने या किसी भी तरह की गतिविधि का अधिकार केवल ईरान के पास है। उन्होंने कहा कि अगर कोई बाहरी देश इस क्षेत्र में दखल देता है या वहां अपनी व्यवस्था लागू करने की कोशिश करता है तो इससे अंतरिम समझौते का उल्लंघन होगा, सामान्य समुद्री व्यापार बहाल होने में देरी होगी, समुद्री सुरक्षा खतरे में पड़ेगी और क्षेत्रीय तनाव और बढ़ जाएगा।

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Image Source : APस्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अभी भी बड़ी संख्या में जहाज फंसे हुए हैं।

ईरान पहले ही कह चुका है कि होर्मुज पर उसका ही नियंत्रण रहेगा और वहां से गुजरने वाले जहाजों को तेहरान को शुल्क देना चाहिए। हालांकि दुनिया के अधिकांश देश इस समुद्री मार्ग को अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग मानते हैं।

युद्धविराम के बाद भी हमले क्यों हो रहे?

अमेरिका द्वारा अपने हमले समाप्त करने की घोषणा के बाद भी शुक्रवार को ईरान में हवाई हमले हुए, लेकिन किसी भी देश ने इनकी जिम्मेदारी नहीं ली। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिन्स ने कहा कि युद्धविराम की घोषणा के बाद फिलहाल कोई नई सैन्य जानकारी नहीं है। उधर, खाड़ी के अरब देशों और इजरायल ने भी हालिया हमलों पर तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

ईरान ने किन देशों पर जवाबी हमला किया?

गुरुवार को जब ईरान अपने दिवंगत सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को सुपुर्द-ए-खाक करने की तैयारी कर रहा था, उसी दौरान दक्षिणी ईरान के कई इलाकों पर हमले हुए। इसके जवाब में ईरान ने पूरे पश्चिम एशिया में बड़ा मिसाइल हमला किया और बहरीन, जॉर्डन, कुवैत और कतर को निशाना बनाया। कुवैत में एक व्यक्ति के घायल होने की खबर है, जबकि कई देशों की वायु रक्षा प्रणालियों ने मिसाइलों को रास्ते में ही रोकने की कोशिश की। ईरान ने इन हमलों के लिए सीधे किसी देश को जिम्मेदार नहीं ठहराया, लेकिन एक सांसद ने UAE पर अमेरिका की मदद करने का आरोप लगाया।

अब तेज हुई हैं कूटनीतिक कोशिशें

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरगची शनिवार को ओमान में अपने ओमानी समकक्ष से मुलाकात करेंगे। तुर्किये के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि इस सप्ताहांत ओमान की मध्यस्थता से कोई समाधान निकल सकता है। ईरानी हमले के तुरंत बाद संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान कुवैत पहुंचे और वहां के अमीर से मुलाकात की। खाड़ी देशों ने कतर के विदेश मंत्री से भी बातचीत की। कतर, पाकिस्तान के साथ मिलकर ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता में अहम भूमिका निभा रहा है।

पूरे मामले पर इजरायल का रुख क्या है?

इजरायल की सरकार के मुताबिक, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गुरुवार रात राष्ट्रपति ट्रंप से बातचीत की। इस दौरान ट्रंप ने उन्हें खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका की गतिविधियों की जानकारी दी। इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज़ ने भी ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो इजरायल पहले से भी अधिक ताकत के साथ कार्रवाई करेगा। उन्होंने कहा, 'अगर हमें दोबारा लौटना पड़ा, तो हम पहले से कहीं ज्यादा ताकत के साथ लौटेंगे।'

ईरान ने अपनी ताजा चेतावनी में क्या कहा?

ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के सदस्य और रिवोल्यूशनरी गार्ड के पूर्व कमांडर इस्माइल कौसारी ने सरकारी मीडिया से कहा कि अमेरिका का साथ देने की कीमत संयुक्त अरब अमीरात को चुकानी पड़ेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि हालिया अमेरिकी हमलों में यूएई ने पर्दे के पीछे से भूमिका निभाई थी। इस बीच अमेरिका अब भी जहाजों को सलाह दे रहा है कि वे ईरानी जलक्षेत्र से बचने के लिए ओमान के समुद्री क्षेत्र वाले दक्षिणी मार्ग का इस्तेमाल करें।

होर्मुज के इर्द-गिर्द ही घूमेगी सारी बात

युद्धविराम के बावजूद ईरान और अमेरिका के बीच भरोसे की कमी बनी हुई है। अमेरिका चाहता है कि ईरान सार्वजनिक रूप से दुनिया को भरोसा दिलाए कि 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' पूरी तरह सुरक्षित है, जबकि ईरान इस पर अपना पूर्ण नियंत्रण बनाए रखने पर अड़ा है। दूसरी ओर, लगातार हो रहे हमले, ईरान के अंदर सत्ता संघर्ष, इजरायल की चेतावनी और खाड़ी देशों की बढ़ती सक्रियता यह संकेत दे रही है कि हालात अभी पूरी तरह सामान्य होने से काफी दूर हैं। आने वाले दिनों में ओमान में होने वाली बातचीत इस संकट की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है।

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