फेसलेस असेसमेंट से लेकर न्यू टैक्स रिजीम तक, PM मोदी के 12 सालों में बदली टैक्सपेयर्स की दुनिया; हुए 5 बड़े बदलाव
फेसलेस असेसमेंट से लेकर न्यू टैक्स रिजीम तक, PM मोदी के 12 सालों में बदली टैक्सपेयर्स की दुनिया; हुए 5 बड़े बदलाव
पिछले 12 वर्षों में भारत की टैक्स सिस्टम में कई बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने टैक्स सिस्टम को अधिक पारदर्शी, डिजिटल और आसान बनाने पर जोर दिया है।
Published : Jun 10, 2026 01:21 pm IST, Updated : Jun 10, 2026 01:21 pm IST
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज लगातार सबसे लंबे समय तक देश के चुने हुए प्रधानमंत्री रहने का एक ऐतिहासिक कीर्तिमान अपने नाम कर लिया है। बीते 12 सालों के उनके इस कार्यकाल में देश की अर्थव्यवस्था ने कई बड़े पड़ाव पार किए हैं। लेकिन आम नागरिक, नौकरीपेशा मध्यम वर्ग और व्यापारियों की जिंदगी पर जिस बदलाव का सबसे सीधा असर पड़ा है, वह है देश का डायरेक्ट टैक्स रिफॉर्म। पिछले 12 सालों में मोदी सरकार ने न सिर्फ दशकों पुराने कठिन नियमों को खत्म किया, बल्कि टैक्सपेयर्स को कानूनी उलझनों और दफ्तरों के चक्कर काटने से भी मुक्ति दिलाई है। आइए नजर डालते हैं मोदी राज के उन 5 बड़े बदलावों पर, जिन्होंने टैक्सपेयर्स की पूरी दुनिया को बदलकर रख दिया है।
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1. मोदी सरकार का सबसे ऐतिहासिक और साहसिक कदम छह दशक पुराने जटिल टैक्स कोड को उखाड़ फेंकना रहा। 1 अप्रैल, 2026 से देश में साल 1961 के पुराने कानून की जगह पूरी तरह से नया इनकम टैक्स एक्ट, 2025 लागू हो चुका है। इस नए एक्ट ने टैक्स से जुड़े सैकड़ों जटिल प्रावधानों, धाराओं और कानूनी पेंचों को खत्म कर दिया है। अब टैक्स कानून की भाषा को इतना सरल और स्पष्ट बना दिया गया है कि एक आम टैक्सपेयर भी बिना किसी एक्सपर्ट की मदद के अपनी टैक्स देनदारी और अधिकारों को आसानी से समझ सकता है।
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2. टैक्स को आसान बनाने के उद्देश्य से मोदी सरकार ने न्यू टैक्स रिजीम की शुरुआत की, जिसे अब देश की मुख्य और डिफॉल्ट टैक्स सिस्टम बना दिया गया है। इसके तहत टैक्सपेयर्स को निवेश के पुराने कागजात (जैसे LIC, PPF की रसीदें) सहेजने के झंझट से मुक्ति मिल गई। कम टैक्स दरों वाले इस स्लैब स्ट्रक्चर ने मध्यम वर्ग के हाथ में ज्यादा कैश बनाए रखने में मदद की है।
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3. मोदी सरकार के शुरुआती सालों में जहां ढाई से तीन लाख रुपये की आय पर भी टैक्स की गणना शुरू हो जाती थी, वहीं आज देश के करोड़ों नौकरीपेशा लोगों के लिए ₹12 लाख तक की सालाना कमाई प्रभावी रूप से पूरी तरह टैक्स-फ्री हो चुकी है।
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4. वेतनभोगी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को बड़ी राहत देते हुए मोदी सरकार ने न सिर्फ स्टैंडर्ड डिडक्शन की व्यवस्था को दोबारा बहाल किया, बल्कि समय-समय पर इसकी सीमा को भी बढ़ाया है। न्यू टैक्स रिजीम के तहत मिलने वाले इस हायर स्टैंडर्ड डिडक्शन (₹75,000) के चलते अब सैलरीड क्लास को सीधे अपनी ग्रॉस इनकम में से ₹75,000 की फ्लैट छूट मिल जाती है, जिससे उनकी शुद्ध टैक्स देनदारी काफी घट गई है।
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5. इनकम टैक्स विभाग में पारदर्शिता लाने और 'टैक्स टेररिज्म' को खत्म करने के लिए मोदी सरकार ने फेसलेस असेसमेंट और फेसलेस अपील की व्यवस्था शुरू की। इसके तहत टैक्स स्क्रूटनी और विवादों की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल कर दिया गया है। अब किसी भी टैक्सपेयर को किसी अधिकारी के सामने व्यक्तिगत रूप से पेश होने या आयकर दफ्तर के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं होती। स्क्रूटनी के लिए केस का चयन और अधिकारियों का आवंटन पूरी तरह से ऑटोमैटिक और रैंडम सॉफ्टवेयर के जरिए होता है, जिससे भ्रष्टाचार की गुंजाइश पूरी तरह खत्म हो गई है।