'क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2' में पार्थ मर्डर केस में आया नया ट्विस्ट, तुलसी और नंदिनी के बीच हुई सीक्रेट डील!
'क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2' में पार्थ मर्डर केस में आया नया ट्विस्ट, तुलसी और नंदिनी के बीच हुई सीक्रेट डील!
'क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2' में जब नंदिनी ने पार्थ को गोली मारी थी तो तुलसी को वो पुरानी घटना याद आ जाती है। वह उसके मर्डर का इल्जाम खुद पर ले लेती है और 10 साल के लिए जेल में सजा काटती है।
Published : Jun 28, 2026 04:13 pm IST, Updated : Jun 28, 2026 04:13 pm IST
1/7Image Source : Screen grab from jiohotstar
'क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2' में देखने को मिलेगा कि नंदिनी ने अपने ही बेटे पार्थ को गोली मार दी। यह सब देखने के बाद तुलसी को वो पुरानी घटना याद आ जाती है, जब उसने अपने बेटे अंश को गोली मारी थी। वह अपनी बहू नंदिनी का इल्जाम खुद पर ले लेती है और पार्थ मर्डर केस में 10 साल के लिए जेल में सजा काटती है।
2/7Image Source : Screen grab from jiohotstar
स्टार प्लस के शो 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2' में पार्थ वैष्णवी की जान तो बचाता है, लेकिन उसका क्रूर रूप फिर से सामने आ जाता है और वह उसे शारीरिक रूप से प्रताड़ित करने लगता है। अचानक नंदिनी वहां पहुचती है और अपने बेटे पार्थ का ऐसा भयानक व्यवहार देखकर टूट जाती है। उसने कभी नहीं सोचा था कि उसमें उसे 'अंश' की इतनी झलक देखने को मिलेगी।
3/7Image Source : Screen grab from jiohotstar
पार्थ वैष्णवी के साथ बदसलूकी करता है और पति होने के नाते उस पर अपना हक जताता है। जिद करता है कि वह जो चाहे कर सकता है और वैष्णवी उसे मना नहीं कर सकती। नंदिनी गुस्से में आ जाती है और सवाल करती है कि पार्थ किसी महिला को उसकी मर्जी के बिना कैसे छू सकता है, लेकिन पार्थ उसके गुस्से को नजरअंदाज कर देता है और उसे और भी चौंका देता है।
4/7Image Source : Instagram/@starplus
जब वह आरोप लगाता है कि अंश बेगुनाह था और उसकी मौत के लिए नंदिनी और तुलसी जिम्मेदार थीं। वह हैरान रह जाती है। सारी हदें पार करते हुए, पार्थ नंदिनी को कड़वे सच का सामना करने पर मजबूर करता है। एक दिल दहला देने वाले पल में वह अपनी ममता को किनारे रखकर उसे गोली मार देती है। इतिहास खुद को दोहराता है। नंदिनी एक लड़की की खातिर अपने ही बेटे को मार डालती है और बुरी तरह टूट जाती है।
5/7Image Source : Instagram/@starplus
तुलसी नंदिनी को जुर्म कबूल करने से रोकती है। तुलसी यह सब मंजर देखती है और टूट जाती है। उसे एहसास होता है कि इतिहास ने खुद को दोहराया है। वह नंदिनी को वहां से ले जाती है। जल्द ही तुलसी और नंदिनी के बीच एक सीक्रेट समझौता होता है।
6/7Image Source : Instagram/@jiohotstar
तुलसी, जो नंदिनी को अपनी बेटी मानती है, उसे तकलीफ में नहीं देख सकती। अंश को मारने के अपराधबोध से पहले ही दबी हुई तुलसी, पार्थ की हत्या और वैष्णवी को चोट पहुंचाने का इल्जाम खुद पर लेने का फैसला करती है।
7/7Image Source : Screen grab from jiohotstar
तुलसी को जेल हो जाती है और उसके जाने से शांति निकेतन की नींव हिल जाती है। 10 साल के लीप के बाद घर की हालत बहुत खराब हो जाती है और तुलसी के घर में आने पर रोक लगा दी जाती है।