Published : Aug 23, 2026 04:05 pm IST, Updated : Aug 23, 2026 04:05 pm IST
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'क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2' के अपकमिंग एपिसोड में देखने को मिलेगा कि तुलसी की जिंदगी में खुशी और दुख साथ आने वाला है। वहीं, तृप्ति और मिहिर के बीच भी अनबन देखने को मिलेगी। पसंदीदा टीवी शो का नया एपिसोड करण के समायरा को गणेश जी की मूर्ति गिफ्ट करने और भावुक होकर यह समझाने से शुरू होता है कि माता-पिता का अपने बच्चे के लिए प्यार कितना गहरा होता है। वह उसे बताते हैं कि बच्चे अक्सर भूल जाते हैं कि उनके माता-पिता उनसे कितना प्यार करते हैं और कुछ गलतियों का माता-पिता पर कितना गहरा असर पड़ता है।
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'क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2' की कहानी में एक के बाद एक दुखद मोड़ देखने को मिलने वाला है। करण की बात सुनकर समायरा को रोना आ जाता है और अपने पिता को गले लगा लेती है। आखिरकार उसे अपनी हरकतों और गलती का एहसास होता है। वह समझ जाती है कि उसने अपने पिता और परिवार को कितनी परेशानियां दी होंगी।
कहानी में हैरान करने वाला मोड़ तब आता है, जब सगाई की रस्म में दीदी भाई ने नॉन-वेज खाने की मांग की। जैसे-जैसे रस्म आगे बढ़ती है और दोनों परिवार इस शुभ अवसर का जश्न मनाते हैं। इस बीच दीदी भाई एक अजीब सी मांग रखती हैं। वह सभी को बताती हैं कि वह इस रस्म में नॉन-वेज खाना चाहती हैं, जिससे सब हैरान रह जाते हैं। जब तुलसी उन्हें बताती हैं कि घर में अभी ऐसा खाना बनाने वाला कोई नहीं है तो दीदी भाई अपनी बात पर अड़ी रहती हैं और नॉन-वेज खाने का इंतजाम करने की मांग करती हैं।
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वह विरानी परिवार से कहती है कि उन्हें उसके लिए खास तौर पर ऐसा खाना तैयार रखना चाहिए था, क्योंकि उन्हें पता था कि वह सगाई की रस्म में आ रही है। तुलसी स्थिति को संभालते हुए कहती है कि अगर यह कोई होटल होता तो उन्हें नॉन-वेज खाना ऑर्डर करने में कोई दिक्कत नहीं होती। फिर भी वह दीदी भाई को याद दिलाती है कि शांति निकेतन के कुछ नियम हैं, जिनमें से एक नियम के तहत परिसर में नॉन-वेज खाना या उसे पकाना मना है।
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वह उन्हें बताती है कि यह घर अंबा विरानी का है, जिन्होंने सालों पहले यह नियम बनाया था और किसी ने भी उनकी इच्छाओं में कभी दखल नहीं दिया। तुलसी आगे कहती है कि उसे यकीन है कि दीदी भाई घर में मौजूद शाकाहारी खाने का आनंद ले सकती हैं और वे सिर्फ एक व्यक्ति के लिए अपनी मान्यताओं को नहीं बदल सकते। दीदी भाई अनिच्छा से उसके नियमों को मान लेती हैं और शांत हो जाती हैं।
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तृप्ति मिहिर का जिक्र करती है और सबसे पूछती है कि वह कहां है? समारोह के दौरान तृप्ति, मिहिर का जिक्र करती है, जिससे सब असहज हो जाते हैं। वह सबसे पूछती है कि मिहिर कहां है और कहती है कि सगाई के समय उसे वहां होना चाहिए था, क्योंकि वह घर का मुखिया है। तृप्ति समारोह को किसी और दिन करने का सुझाव देती है, जबकि दीदी भाई तुलसी से पूछती हैं कि उन दोनों के बीच क्या हुआ था और मिहिर कार्यक्रम में क्यों नहीं है।
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तृप्ति कहती रहती है कि मिहिर को समारोह में शामिल होना चाहिए था। वह यह भी कहती है कि परिवार के सभी मामलों से उसका गायब रहना काफी चौंकाने वाला है और वह जानना चाहती है कि वह कहां है। एपिसोड के आखिर में तुलसी हालात को लेकर बेबस महसूस करती है और परिवार के सभी लोगों को भरोसा दिलाने की कोशिश करती है कि सब ठीक हो जाएगा।