डायरेक्टर बनने से पहले बने संगीतकार, फिर हिट फिल्में देकर बनाई अलग पहचान
डायरेक्टर बनने से पहले बने संगीतकार, फिर हिट फिल्में देकर बनाई अलग पहचान
विशाल भारद्वाज एक भारतीय फिल्म निर्माता, संगीतकार और पार्श्व गायक हैं। उन्हें हिंदी सिनेमा में उनके योगदान के लिए जाना जाता है और वे नौ राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और एक फिल्मफेयर पुरस्कार से सम्मानित हैं।
Published : Aug 04, 2025 06:00 am IST, Updated : Aug 04, 2025 06:00 am IST
1/7Image Source : Instagram/@vishalrbhardwaj
तस्वीर में दिख रहे भारतीय फिल्म निर्माता, संगीतकार और प्लेबैक सिंगर को हिंदी सिनेमा में उनके योगदान के लिए जाना जाता है और वे नौ राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और एक फिल्मफेयर पुरस्कार से सम्मानित हैं। ये कोई और नहीं बल्कि विशाल भारद्वाज हैं। विशाल ने फिल्म इंडस्ट्री में टैलेंट को एक नई तरह से परिभाषित किया है, जिसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता है। वह बेहतरनी फिल्मों के अलावा अपनी सुरीली आवाज के लिए भी खूब पसंद किए जाते हैं।
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मशहूर फिल्म निर्माता-संगीतकार विशाल भारद्वाज 4 अगस्त, 2025 को 60 साल के हो गए। 1965 को उत्तर प्रदेश के बिजनौर में जन्मे विशाल किसी परिचय का मोहताज नहीं हैं। 'मकबूल' और 'हैदर' जैसी बेहतरीन हिंदी फिल्में देने वाले इस फिल्म निर्माता ने कुछ बेहद यादगार और मधुर गीत भी लिखे हैं। हालांकि, वह एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में नहीं बल्कि स्पोर्ट्स में अपना करियर बनाना चाहते थे, लेकिन उनकी किस्मत में कुछ और ही लिखा था।
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विशाल का जन्म राम भारद्वाज और सत्या भारद्वाज के घर हुआ। उनके पिता हिंदी फिल्मों के लिए कविताएं व गीत लिखते थे। विशाल का बचपन में क्रिकेटर बनाने का सपना था। इतना ही वह उत्तर प्रदेश की अंडर-19 टीम से खेल चुके थे, लेकिन एक प्रैक्टिस सेशन के दौरान अंगूठे की चोट ने उनके क्रिकेट करियर को खत्म कर दिया और आज वह फिल्म इंडस्ट्री में अपना जलवा दिखा रहे हैं।
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17 साल की उम्र में विशाल ने एक गीत बनाया था, जिसे उनके पिता ने संगीतकार उषा खन्ना को सुनवाया। यह गीत साल 1985 में आई फिल्म 'यार कसम' में सुनने को मिला था, जिसके बाद उनका संगीत का सफर शुरू हुआ। विशाल ने अपने करियर की शुरुआत साल 1995 में फिल्म 'अभय : द फीयरलेस' से बतौर संगीतकार की, लेकिन गुलजार की फिल्म 'माचिस' से उन्हें खास पहचान मिली, जिसके लिए उन्हें बतौर संगीतकार फिल्मफेयर आर.डी. बर्मन अवॉर्ड मिला।
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इसके बाद 'सत्या' और 'गॉडमदर' से उसके संगीत के करियर को नई उड़ान मिली। 'गॉडमदर' के लिए उन्हें बेस्ट म्यूजिक डायरेक्टर का नेशनल अवॉर्ड मिला। साल 2002 में विशाल ने फिल्म 'मकड़ी' से निर्देशन की शुरुआत की जो बॉक्स ऑफिस पर हिट साबित हुई। विशाल को जबरदस्त नेम-फेम फिल्मी दुनिया में साल 2003 में आई 'मकबूल', साल 2006 की 'ओमकारा' और साल 2014 की 'हैदर' से मिली।
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विशाल भारद्वाज की 'हैदर' ने पांच नेशनल अवॉर्ड जीते हैं। हालांकि, फिल्म को लेकर काफी विवाद भी हुआ था, लेकिन यह उनके करियर की सबसे बेहतरीन फिल्मों में एक मानी जाती है। हर जॉनर की फिल्मों से लोगों का दिल जीतने वाले विशाल ने साल 2009 में 'कमीने' और 2011 में '7 खून माफ' की अनोखी कहानी से लोगों के दिलों में खास जगह बना ली। विशाल ने एक बार खुलासा किया था कि आमिर खान ने ही उन्हें शेक्सपियर के नाटक 'ओथेलो' पर फिल्म (ओमकारा) बनाने के लिए प्रेरित किया था।
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विशाल को 9 नेशनल अवॉर्ड और एक फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला है। उनकी फिल्म 'मकड़ी' को शिकागो अंतरराष्ट्रीय बच्चों के फिल्म फेस्टिवल में बेस्ट फिल्म का पुरस्कार मिला, जबकि 'ओमकारा' और 'हैदर' को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर खूब सराहा गया। खास बात यह है कि फिल्मी दुनिया के साथ-साथ उन्होंने बतौर संगीतकार भी अपनी पहचान बनाई।