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रोजाना सिर्फ 10 मिनट प्राणायाम करने से लंग्स हो जाते हैं सुपर-स्ट्रॉन्ग, जानें इसके फायदे

आजकल प्रदूषण, धूम्रपान, शारीरिक गतिविधियों की कमी और तनाव के कारण लोगों की सांस लेने की आदतें भी प्रभावित हो रही हैं। ऐसे में नियमित रूप से प्राणायाम करना फायदेमंद हो सकता है। डॉ. कर्ण मेहरा, सीनियर कंसल्टेंट और यूनिट हेड, पल्मोनोलॉजी, फोर्टिस मानेसर बता रहे हैं इसके फायदे क्या क्या हैं।

Written By: Ritu Raj
Published : Oct 30, 2026 04:14 pm IST,  Updated : Oct 30, 2026 04:14 pm IST
प्राणायाम करते समय हमारा ध्यान सांस लेने और छोड़ने की प्रक्रिया पर केंद्रित रहता है। इससे सांसों की गति को नियंत्रित करने, सांस लेने वाली मांसपेशियों, विशेषकर डायफ्राम का बेहतर उपयोग करने और श्वसन प्रक्रिया पर नियंत्रण करने में मदद मिल सकती है।
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प्राणायाम करते समय हमारा ध्यान सांस लेने और छोड़ने की प्रक्रिया पर केंद्रित रहता है। इससे सांसों की गति को नियंत्रित करने, सांस लेने वाली मांसपेशियों, विशेषकर डायफ्राम का बेहतर उपयोग करने और श्वसन प्रक्रिया पर नियंत्रण करने में मदद मिल सकती है।
धीरे-धीरे व्यक्ति अधिक सहजता और बेहतर तालमेल के साथ सांस लेना सीख सकता है। कुछ अध्ययनों में यह भी पाया गया है कि नियमित योग और श्वास संबंधी अभ्यास फेफड़ों की कार्यक्षमता में कुछ सुधार ला सकते हैं।
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धीरे-धीरे व्यक्ति अधिक सहजता और बेहतर तालमेल के साथ सांस लेना सीख सकता है। कुछ अध्ययनों में यह भी पाया गया है कि नियमित योग और श्वास संबंधी अभ्यास फेफड़ों की कार्यक्षमता में कुछ सुधार ला सकते हैं।
रोजाना सिर्फ 10 मिनट प्राणायाम करना भी एक अच्छी शुरुआत हो सकती है। अनुलोम-विलोम और डायफ्रामैटिक ब्रीदिंग जैसे अभ्यास सांसों को नियंत्रित करने और श्वसन मांसपेशियों के बेहतर इस्तेमाल में मदद कर सकते हैं।
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रोजाना सिर्फ 10 मिनट प्राणायाम करना भी एक अच्छी शुरुआत हो सकती है। अनुलोम-विलोम और डायफ्रामैटिक ब्रीदिंग जैसे अभ्यास सांसों को नियंत्रित करने और श्वसन मांसपेशियों के बेहतर इस्तेमाल में मदद कर सकते हैं।
वहीं, भ्रामरी जैसे अभ्यास तनाव कम करने और मन को शांत रखने में सहायक हो सकते हैं। हालांकि, केवल 10 मिनट प्राणायाम करने से फेफड़ों की क्षमता में तुरंत या बहुत बड़ा बदलाव होने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। नियमित अभ्यास से धीरे-धीरे लाभ मिल सकता है।
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वहीं, भ्रामरी जैसे अभ्यास तनाव कम करने और मन को शांत रखने में सहायक हो सकते हैं। हालांकि, केवल 10 मिनट प्राणायाम करने से फेफड़ों की क्षमता में तुरंत या बहुत बड़ा बदलाव होने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। नियमित अभ्यास से धीरे-धीरे लाभ मिल सकता है।
यह समझना जरूरी है कि प्राणायाम फेफड़ों को प्रदूषण से पूरी तरह सुरक्षित नहीं रखता और न ही यह अस्थमा, सीओपीडी या फेफड़ों की अन्य बीमारियों का इलाज है। सांस से जुड़ी कोई बीमारी होने पर डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही अभ्यास करना चाहिए। शुरुआत सहज और धीमी सांसों से करें। सांस रोकने या बहुत तेजी से सांस लेने वाले अभ्यास विशेषज्ञ की देखरेख के बिना न करें। फेफड़ों को स्वस्थ रखने के लिए प्राणायाम के साथ नियमित शारीरिक गतिविधि, धूम्रपान से दूरी और प्रदूषण से बचाव भी उतना ही जरूरी है।
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यह समझना जरूरी है कि प्राणायाम फेफड़ों को प्रदूषण से पूरी तरह सुरक्षित नहीं रखता और न ही यह अस्थमा, सीओपीडी या फेफड़ों की अन्य बीमारियों का इलाज है। सांस से जुड़ी कोई बीमारी होने पर डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही अभ्यास करना चाहिए। शुरुआत सहज और धीमी सांसों से करें। सांस रोकने या बहुत तेजी से सांस लेने वाले अभ्यास विशेषज्ञ की देखरेख के बिना न करें। फेफड़ों को स्वस्थ रखने के लिए प्राणायाम के साथ नियमित शारीरिक गतिविधि, धूम्रपान से दूरी और प्रदूषण से बचाव भी उतना ही जरूरी है।
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