PHOTOS: अपनी 63 बीवियों को पानी में डुबाकर मारने वाला सेनापति, खुद को भी मिली थी खौफनाक मौत
PHOTOS: अपनी 63 बीवियों को पानी में डुबाकर मारने वाला सेनापति, खुद को भी मिली थी खौफनाक मौत
General Who Killed His 63 Wives | बीजापुर की ‘साठ कब्र’ उस सेनापति की क्रूरता की गवाह हैं जिसने अपनी 63 पत्नियों को कुएं में डुबोकर मार डाला था। 1659 में छत्रपति शिवाजी महाराज से जंग से पहले ही अफजल खान को यकीन हो गया था कि वह युद्ध के मैदान से जिंदा वापस नहीं लौटेगा।
Published : Feb 10, 2026 07:09 pm IST, Updated : Feb 10, 2026 07:09 pm IST
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General Who Killed His 63 Wives: कर्नाटक के बीजापुर में एक सुनसान चबूतरे पर कब्रों की 7 कतारों में कुल 63 कब्रें मौजूद हैं, जिन्हें ‘साठ कब्र’ के नाम से जाना जाता है। यह स्थान शहर के एक कोने में छिपा हुआ है और आज भी पर्यटकों को अपनी खौफनाक कहानी सुनाता है। ये कब्रें किसी जंग या महामारी की नहीं, बल्कि एक सेनापति की क्रूरता और अंधविश्वास की गवाह हैं, जिसने अपनी सभी पत्नियों पानी में डुबोकर को खुद मार डाला था। उस सेनापति का नाम था अफजल खां, और काफी हद तक संभव है कि इस नाम से आप जरूर परिचित होंगे।
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साल 1659 में बीजापुर के सुल्तान अली आदिल शाह द्वितीय ने अफजल खां को शिवाजी महाराज से युद्ध करने भेजा। रवाना होने से पहले ज्योतिषियों ने साफ चेतावनी दी कि वह युद्ध से जिंदा नहीं लौटेगा। अफजल खां को इस भविष्यवाणी पर पूरा यकीन था और यही वजह है कि उसने कब्र के पत्थर पर अपनी मृत्यु की तारीख के रूप में बीजापुर से प्रस्थान का ही साल खुदवा दिया। बीजापुर छोड़ते समय उसे और उसके साथियों को उम्मीद ही नहीं थी कि वे वापस जिंदा लौटेंगे।
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अपने इसी डर और जिद ने अफजल खां को एक भयानक फैसला लेने पर मजबूर कर दिया। उसने अपनी 63 पत्नियों को एक-एक करके कुएं में धकेलकर मारने का निश्चय किया, ताकि उसके मरने के बाद वे किसी और के हाथ न पड़ें। उसकी क्रूरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उसने खुद यह काम अंजाम दिया। एक पत्नी ने जान बचाने की कोशिश की और भागने लगी, लेकिन उसे भी पकड़कर उसी तरह पानी में डुबोकर मार दिया गया।
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बीजापुर के इस कोने में आज भी 63 महिलाओं की कब्रें एक साथ बनी हुई हैं। उन कब्रों की कहानी जानकर ही लोगों के शरीर में सिहरन दौड़ जाती है। एक सेनापति ने अपनी सनक में एक साथ 63 जिंदगियों को मौत के हवाले कर दिया था। इनके अलावा एक कब्र खाली भी पड़ी है, जो शायद उस महिला के लिए बनाई गई हो जो उस दिन बचकर निकलने में कामयाब हो गई।
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अफजल खान की इच्छा थी कि मरने के बाद उसे भी इन्हीं कब्रों के पास दफनाया जाए, लेकिन उसकी यह आखिरी इच्छा पूरी नहीं हो सकी। प्रतापगढ़ में छत्रपति शिवाजी महाराज ने वाघ-नख के घातक वार से उसे मौत के घाट उतार दिया। उसका शव वहीं के पास दफना दिया गया, और उसे बीजापुर तक नहीं लाया गया। इस तरह वह सेनापति, जिसने अपनी पत्नियों को इतनी बेरहमी से डुबोकर मारा था, खुद भी एक खौफनाक मौत का शिकार बना।