Published : May 24, 2025 05:47 pm IST, Updated : May 24, 2025 05:49 pm IST
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सिंधु जल संधि के तहत जम्मू कश्मीर की 3 प्रमुख नदियों से पानी पाकिस्तान जाता है। सिंधु, झेलम और चिनाब ऐसी 3 प्रमुख नदियां हैं जिनसे पाकिस्तान को 80% पानी मिलता है।
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झेलम नदी का पानी दक्षिण से मध्य कश्मीर और फिर उत्तरी कश्मीर की सबसे बड़ी वुलर झील में बहता है, जिसके बाद वह पानी सीधे पाकिस्तान चला जाता है।
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भारत ने 1984 में वुलर झील पर तुलबुल नेविगेशन परियोजना का निर्माण शुरू किया लेकिन पाकिस्तान ने इसका विरोध किया और फिर 1987 में इसका काम फिर से रोकना पड़ा।
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इसके बाद 2012 में इस प्रोजेक्ट पर आतंकी हमला हुआ, क्योंकि जम्मू कश्मीर और लद्दाख से बहनी वाली तीन नदियों में झेलम नदी सब से बड़ी नदी है। जहां से सबसे ज्यादा पानी पाकिस्तान को जाता है।
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पहलगाम आतंकी हमले और दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव के बाद सिंधु जल संधि स्थगित होने के बाद पाकिस्तान की हताशा सामने आ गई है क्योंकि तुलबुल नेविगेशन प्रोजेक्ट के पानी का सबसे ज्यादा फायदा पाकिस्तान को होता है।
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अगर यहां फिर से निर्माण शुरू होता है तो इसका सबसे ज्यादा फायदा जम्मू-कश्मीर को होगा और सबसे ज्यादा नुकसान पाकिस्तान को होगा।
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इन नदियों का पानी बंद होने से पाकिस्तान की कृषि, बागवानी और बिजली परियोजनाएं बुरी तरह प्रभावित हो सकती हैं। अगर ऐसा हुआ तो न सिर्फ झेलम नदी का जलस्तर तीन गुना बढ़ जाएगा बल्कि निश्चित रूप से झेलम नदी को एक नया जीवन भी मिल जाएगा।
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ऐसे में पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस पर कार्रवाई करने की मांग कर रहा है... लेकिन भारत का साफ संदेश है कि जब तक पाकिस्तानी धरती से आतंकवाद को नहीं रोका जाता, तब तक पाकिस्तान को भारत के हिस्से के पानी से एक बूंद भी नहीं मिलेगा।
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इस संदेश को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने के लिए भारत ने पूरी दुनिया में अपने प्रतिनिधिमंडल भेजे हैं ताकि पाकिस्तान की असलियत पूरी दुनिया के सामने आ सके।