Published : Apr 04, 2026 01:27 pm IST, Updated : Apr 04, 2026 01:27 pm IST
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ईरान का बंदर अब्बास शहर जिसका भारत से खास रिश्ता रहा है, जहां आज भी हिंदू समुदाय के काफी लोग लंबे समय से रह रहे हैं। यह ईरान का एक प्रमुख बंदरगाह शहर है, जो अपनी सांस्कृतिक विविधता के लिए जाना जाता है। जानिए क्यों खास है बंदर अब्बास से भारत का खास रिश्ता?
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बंदर अब्बास ईरान के दक्षिणी हिस्से में है और ये शहर फारस की खाड़ी के किनारे बसा हुआ है। बंदर अब्बास शहर व्यापार और समुद्री गतिविधियों का बड़ा केंद्र रहा है। भारत और ईरान के बीच काफी लंबे समय से समुद्री व्यापार होता था, ईरान का दोस्त होने की वजह से इस शहर में भारतीयों का आना-जाना लगा रहता था।
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आज की नहीं, पुरानी है दोस्ती जिसकी वजह से भारतीय व्यापारी खासकर गुजरात और सिंध इलाके सेयहां आए और बंदर अब्बास शहर में बस गए। धीन धीरे उन्होंने अपनी एक छोटी लेकिन मजबूत कम्युनिटी बना ली है। ये
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भारतीय व्यापारी कई पीढ़ियों से बंदर अब्बास शहर में रह रहे हैं और अपने देश की परंपराओं को संभालकर रखे हुए हैं। आज भी वे अपने त्योहार, रीति रिवाजों को यहां जिंदा रखे हुए हैं। यहां हिंदुओं के मंदिर हैं।
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बंदर अब्बास में बस गए हिंदू समुदायों के लिए कई हिंदू मंदिर भी बनाए गए हैं और इन मंदिरों में भारतीय शैली की झलक साफ दिखाई देती है। यहां अपने रीति रिवाजों के साथ पूजा-पाठ होता है और खास मौकों पर त्योहार भी मनाए जाते हैं।
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बंदर अब्बास शहर की खास बात यह है कि यहां हिंदू समुदाय के लोग स्थानीय ईरानी समाज के साथ मिलजुल कर रहते हैं। फिलहाल बंदर अब्बास में हिंदूओं की संख्या बहुत बड़ी नहीं है, लेकिन उनकी मौजूदगी इतिहास और सांस्कृतिक जुड़ाव को दर्शाती है।
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बंदर अब्बास सिर्फ ईरान का एक बंदरगाह शहर नहीं है, बल्कि यह भारत और ईरान के पुराने रिश्तों की एक जीवित मिसाल भी है। यहां रहने वाले हिंदू और उनके मंदिर उनका इस शहर से जुड़ाव इस बात को दर्शाते हैं कि सदियों पहले शुरू हुआ भारतीयों का इस शहर से संबंध आज भी किसी न किसी रूप में कायम है।
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बंदर अब्बास एक ऐसा शहर है जहां इतिहास, व्यापार और संस्कृति का अनोखा संगम देखने को मिलता है। इस शहर में एक छोटे लेकिन महत्वपूर्ण हिंदू समुदाय ने अपनी पहचान को बरकरार रखा है।