Published : Jul 31, 2025 08:27 am IST, Updated : Jul 31, 2025 08:27 am IST
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31 जुलाई 1940 को भारतमाता के एक महान सपूत को ब्रिटिश सरकार ने फांसी दे दी थी। उस महान क्रांतिकारी का नाम था उधम सिंह, जिन्होंने न सिर्फ जलियांवाला बाग हत्याकांड का बदला लेने के लिए अपनी जान की बाजी लगा दी, बल्कि हिंदू, मुस्लिम और सिख एकता का प्रतीक बनकर उभरे। आज हम आपको उधम सिंह के बारे में कुछ ऐसी बातें बताएंगे, जो आपको शायद न पता हों।
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26 दिसंबर 1899 को पंजाब के सुनाम में जन्मे उधम सिंह का असली नाम शेर सिंह था। छोटी उम्र में माता-पिता को खोने के बाद वे अनाथालय में पले-बढ़े। 1919 में जलियांवाला बाग हत्याकांड ने उनकी जिंदगी बदल दी। उस खौफनाक मंजर को देखकर उन्होंने ठान लिया कि अंग्रेजी जुल्म का जवाब देना है। उधम सिंह ने 1924 में गदर पार्टी जॉइन की और भगत सिंह से प्रेरित होकर हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन के साथ जुड़े।
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उधम सिंह ने ब्रिटिश हिरासत में रहते हुए अपना नाम 'राम मोहम्मद सिंह आजाद' रखा था, जब वे माइकल ओ'डायर की हत्या के बाद गिरफ्तार हुए थे। उन्होंने भारत के प्रमुख धार्मिक समुदायों हिंदू, मुस्लिम और सिख के बीच एकता का प्रतीक बनने के लिए यह नाम रखा था। उनके नाम में 'राम' हिंदू धर्म, 'मोहम्मद' इस्लाम, 'सिंह' सिख धर्म और 'आजाद' उनकी आजादी की भावना को दिखाता था।
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उधम सिंह ने जलियांवाला बाग के लिए जिम्मेदार पंजाब के पूर्व लेफ्टिनेंट गवर्नर माइकल ओ'डायर को सबक सिखाने की ठानी। 13 मार्च 1940 को लंदन के कैक्सटन हॉल में उन्होंने ओ'डायर को गोली मार दी। बदला लेने के बाद वे भागे नहीं, बल्कि गिरफ्तारी दे दी। उनकी इस हिम्मत ने अंग्रेजों को हिला दिया। उधम सिंह ने जेल में 42 दिन की भूख हड़ताल भी की थी। 31 जुलाई 1940 को लंदन की पेंटनविल जेल में उन्हें फांसी दे दी गई। उस वक्त उनकी उम्र महज 40 साल थी।
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उधम सिंह ने कई नामों जैसे शेर सिंह, उड़े सिंह और फ्रैंक ब्राजील का इस्तेमाल किया ताकि ब्रिटिश पुलिस से बचा जा सके। उन्होंने यूरोप के कई शहरों में मजदूरी की, और हॉलीवुड फिल्मों में छोटे-मोटे रोल तक किए। उधम सिंह ने 'Elephant Boy' और 'The Four Feathers' फिल्मों में बतौर एक्स्ट्रा काम किया था। वह प्रथम विश्व युद्ध में ब्रिटिश इंडियन आर्मी में भी भर्ती हुए थे, लेकिन बगावती स्वभाव के कारण जल्दी वापस भेज दिए गए।