Highlights
- गांधीनगर में पशु निरीक्षक 22 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा गया।
- आरोपी ने मवेशियों को नहीं पकड़ने के बदले दिवाली की किस्त बताकर रिश्वत मांगी थी।
- 2022 में भी नगर निगम की पशु पकड़ने वाली टीम के दो कर्मचारी पकड़े गए थे।
गांधीनगर: गुजरात के गांधीनगर में भ्रष्टाचार का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां नगर निगम में काम करने वाले एक आउटसोर्स पशु निरीक्षक को 22,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया है। आरोप है कि उसने एक पशुपालक व्यवसायी से उसके मवेशियों को न पकड़ने और उसके खिलाफ केस दर्ज नहीं करने के बदले रिश्वत मांगी थी। भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो यानी कि ACB ने शिकायत मिलने के बाद जाल बिछाया और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
कौन है आरोपी पशु निरीक्षक?
आरोपी की पहचान 22 साल के जयदीपसिंह राजपूत के रूप में हुई है। वह गांधीनगर नगर निगम के पशु उपद्रव नियंत्रण विभाग (CNCD) में पशुधन निरीक्षक (श्रेणी तृतीय) के पद पर तैनात था। उसे एक आउटसोर्सिंग एजेंसी के जरिए नियुक्त किया गया था। वह उस टीम का हिस्सा था, जिसकी जिम्मेदारी शहर में आवारा पशुओं को पकड़ने की थी।
पहले 40 हजार मांगे, फिर 22 हजार पर बनी बात
ACB के मुताबिक, जयदीपसिंह राजपूत ने एक पशुपालक व्यवसायी से कथित तौर पर 40,000 रुपये की रिश्वत मांगी थी। उसने यह रकम शिकायतकर्ता के मवेशियों को नहीं पकड़ने और उसके खिलाफ कोई केस दर्ज नहीं करने के बदले मांगी थी। आरोप है कि उसने इस रकम को दिवाली त्योहार की किस्त भी बताया था। बातचीत के बाद रिश्वत की रकम घटाकर 22,000 रुपये कर दी गई। रिश्वत देने से इनकार करते हुए पशुपालक व्यवसायी ने गांधीनगर एसीबी से संपर्क किया और आरोपी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद अधिकारियों ने उसे पकड़ने की योजना बनाई।
शिकायत के बाद एसीबी ने बिछाया जाल
एसीबी ने 30 अक्टूबर को गांधीनगर के सेक्टर-28 में एक बगीचे के पीछे सड़क के पास जाल बिछाया। तय योजना के मुताबिक, आरोपी शिकायतकर्ता से मिला और कथित तौर पर उससे 22,000 रुपये ले लिए। रिश्वत की रकम लेते ही एसीबी की टीम ने जयदीपसिंह राजपूत को रंगे हाथों पकड़ लिया। अधिकारियों ने उसके पास से रिश्वत के पूरे 22,000 रुपये बरामद कर लिए। अधिकारियों के अनुसार, इस कार्रवाई के लिए गांधीनगर एसीबी पुलिस स्टेशन के पुलिस इंस्पेक्टर एम. एम. सोलंकी ने जाल बिछाया था।
2022 में भी सामने आया था ऐसा ही मामला
गांधीनगर नगर निगम की पशु पकड़ने वाली टीम से जुड़ा रिश्वत का ऐसा ही एक मामला अगस्त 2022 में भी सामने आया था। उस समय ACB ने आउटसोर्सिंग पर काम करने वाले 2 कर्मचारियों को एक पशुपालक से कथित तौर पर 15,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए पकड़ा था। इनमें एक पशु पकड़ने वाला कर्मचारी और दूसरा ड्राइवर था। दोनों की पहचान मनोज उर्फ बबलू शनाजी ठाकोर और बंटी जयंतीभाई वाघेला के रूप में हुई थी।
5 लोगों के नाम पर मांगी गई थी रकम
आरोप था कि मनोज और बंटी ने शिकायतकर्ता के आवारा पशुओं को नहीं पकड़ने के बदले 15,000 रुपये मांगे थे। बताया गया था कि यह रकम पांच लोगों के लिए तय की गई थी और प्रत्येक व्यक्ति के हिस्से में 5,000 रुपये आने थे। एसीबी ने उस मामले में दोनों कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज किया था। अब एक बार फिर नगर निगम की पशु पकड़ने वाली टीम से जुड़े कर्मचारी पर रिश्वत लेने का आरोप लगा है। (IANS से इपुट्स के साथ)
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