पंचकूला के स्कूल में केजी कक्षा की मासूम बच्ची के साथ हुई बेरहमी से मारपीट की घटना के बाद आखिरकार एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने हर किसी के चेहरे पर मुस्कान ला दी है। जिंदगी और मौत के बीच लंबी जंग लड़ने के बाद नन्ही परी पीजीआई चंडीगढ़ से छुट्टी मिलने पर अपने घर लौट आई। घर पहुंचते ही बच्ची का लोगों ने फूल बरसाकर स्वागत किया। जिस घर में पिछले कई दिनों से चिंता, डर और मायूसी का माहौल था, वहां आज खुशियां लौट आईं। बच्ची को सुरक्षित अपने बीच देखकर परिजनों की आंखें खुशी से नम हो गईं।
बच्ची के चाचा फाजिल ने भावुक होते हुए कहा कि यह हमारी बच्ची का दूसरा जन्म है। जिस हालत में वह हमारे सामने थी, उसे देखकर परिवार को लगने लगा था कि कहीं हम उसे हमेशा के लिए न खो दें। लेकिन आज उसे अपने घर में सुरक्षित देखकर ऐसा लग रहा है जैसे हमें हमारी बच्ची दोबारा मिल गई हो। उन्होंने कहा कि पूरे देश के लोगों ने बच्ची के लिए दुआएं कीं। हिंदुस्तान के कोने-कोने से लोगों ने उसके स्वस्थ होने की कामना की। परिवार उन सभी लोगों का दिल से आभार व्यक्त करता है, जिनकी दुआओं और शुभकामनाओं ने इस मुश्किल वक्त में उन्हें हिम्मत दी।
परिवार की आंखों में छलके खुशी के आंसू
बच्ची के पिता राशिद ने भावुक होते हुए कहा कि बेटी के घर लौटने की खुशी को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। बच्ची भी लगातार यही चाहती थी कि वह जल्द से जल्द अपने घर पहुंचे और परिवार के बीच रहे। उन्होंने बताया कि बच्ची की तबीयत में काफी सुधार हुआ है, हालांकि अभी वह पूरी तरह स्वस्थ नहीं हुई है। वह ठीक से बैठ नहीं पा रही, कभी चक्कर आते हैं तो कभी पेट में दर्द की शिकायत होती है। डॉक्टरों ने उसे घर पर रखकर धीरे-धीरे स्वास्थ्य में सुधार होने की उम्मीद जताई है।
पिता ने बताया कि बच्ची के चेहरे पर अभी भी चोटों के निशान हैं और शरीर पर तीन से चार जगह टांके लगे हुए हैं। उसे गंभीर चोटें आई थीं, जिनमें सिर पर लगी चोट सबसे ज्यादा थी। पीजीआई के डायरेक्टर ने भी बच्ची का हाल जाना था। उन्होंने पीजीआई के डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ का विशेष रूप से धन्यवाद करते हुए कहा कि मुश्किल समय में उन्होंने बच्ची का बहुत अच्छे से इलाज किया और परिवार को पूरा सहयोग दिया।
बच्ची के पूरी तरह स्वस्थ होने तक उसके लिए दुआ करें
सरकार की ओर से गठित कमेटी की कार्रवाई को लेकर पिता ने कहा कि कमेटी जो भी निर्णय लेगी, परिवार उसके साथ है। उन्होंने बेटी के भविष्य को लेकर कहा कि वह अपनी बच्ची को खूब पढ़ाएंगे और उसे बड़ा अधिकारी बनाएंगे। हालांकि बच्ची का अपना सपना डॉक्टर बनने का है और उसे पढ़ाई का बेहद शौक है। उन्होंने लोगों से अपील की कि बच्ची के पूरी तरह स्वस्थ होने तक उसके लिए दुआएं करते रहें।
वहीं, बच्ची की मां ने भावुक होते हुए कहा कि हमारी बच्ची अब ठीक है, हमारे लिए इससे बड़ी खुशी कुछ नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम में परिवार ने जिस दर्द और मानसिक पीड़ा को झेला है, उसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है। एक मां ही समझ सकती है कि जब उसकी बच्ची जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रही हो तो परिवार पर क्या गुजरती है।
बच्ची की मां ने सभी माता-पिता से अपील की कि वे अपने बच्चों का विशेष ध्यान रखें। इसके साथ ही स्कूलों में शिक्षकों को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। बच्चों की सुरक्षा स्कूल प्रबंधन और शिक्षकों की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर हर कोई अपनी जिम्मेदारी ईमानदारी से निभाए तो भविष्य में किसी दूसरे मासूम बच्चे और उसके परिवार को इस तरह के दर्दनाक दौर से नहीं गुजरना पड़ेगा। आज पंचकूला के इस घर में सिर्फ एक बच्ची की वापसी नहीं हुई, बल्कि एक परिवार की उम्मीदें और खुशियां भी लौट आईं। मौत के मुंह से निकलकर घर पहुंची इस नन्ही परी की मुस्कान ने उन हजारों लोगों को भी सुकून दिया है, जो पिछले कई दिनों से उसकी सलामती के लिए दुआएं कर रहे थे।
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रिपोर्टः उमंग श्योराण