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क्या आयुर्वेदिक ट्रीटमेंट से ओवरी सिस्ट ठीक हो सकती है? योग-पंचकर्मा से मिलता है फायदे, आयुर्वेदिक डॉक्टर ने बताया

 Written By: Bharti Singh
 Published : Oct 26, 2026 08:16 am IST,  Updated : Oct 26, 2026 08:16 am IST

महिलाओं को ओवरी में सिस्ट की समस्या काफी आम है। इसका आयुर्वेद में भी अच्छा इलाज है। योग और पंचकर्मा के जरिए इसे ठीक किया जा सकता है। आयुर्वेदिक डॉक्टर से जानते हैं ओवरी सिस्ट का इलाज क्या है?

ओवरी सिस्ट- India TV Hindi
ओवरी सिस्ट Image Source : INDIA TV

ओवेरियन सिस्ट का मतलब है ओवरी यानि अंडाशय के अंदर तरल पदार्थ से भरी थैली का बनना, चाहे वह छोटी हो या बड़ी। आम भाषा में इसे अक्सर ओवरी पर गांठ या उभार के रूप में बताया जाता है। यह समस्या महिलाओं में खासकर 15 से 45 साल की उम्र की महिलाओं में काफी आम है। अच्छी बात यह है कि ज्यादातर ओवेरियन सिस्ट नुकसानदायक नहीं होते और अक्सर बिना किसी इलाज के अपने-आप ठीक हो जाते हैं। आइये जानते हैं ओवेरियन सिस्ट कैसे बनते हैं, ये कितने प्रकार के होते हैं, लक्षण और इलाज के तरीके क्या हैं?

ओवेरियन सिस्ट कैसे बनती है?

आयुर्वेदिक डॉक्टर चंचल शर्मा (आशा आयुर्वेद क्लीनिक) के मुताबिक, हर महीने, महिला की ओवरी में एक अंडा बनता है और ओव्यूलेशन के दौरान बाहर निकलता है। यह पूरी प्रक्रिया हार्मोनल संतुलन पर निर्भर करती है। हालांकि, अगर किसी वजह से अंडा ओवरी से बाहर नहीं निकल पाता है या अंडा निकलने के बाद फॉलिकल सैक बंद नहीं होता है, तो उस सैक में तरल पदार्थ जमा होने लगता है। यह जमा हुआ तरल धीरे-धीरे बढ़ता है और एक गांठ या ओवेरियन सिस्ट का रूप ले लेता है।

ओवरी सिस्ट कितने प्रकार की होती हैं?

फंक्शनल सिस्ट- जिनमें फॉलिक्युलर और कॉर्पस ल्यूटियम सिस्ट शामिल हैं, हार्मोन से जुड़े होते हैं और आमतौर पर ओव्यूलेशन के दौरान बनते हैं।

डर्मॉइड सिस्ट- इसे मैच्योर सिस्टिक टेराटोमा भी कहते हैं, इसमें एक्टोडर्मल टिश्यू, जैसे बाल, त्वचा या दांत हो सकते हैं।

एंडोमेट्रियोमा ओवेरियन सिस्ट- जो एंडोमेट्रियोसिस से जुड़े एंडोमेट्रियल टिश्यू के जमा होने से बनते हैं।

सिस्टाडेनोमा- यह ओवरी की सतह के एपिथेलियम से बनते हैं और इनमें सीरस या म्यूसिनस फ़्लूइड भरा हो सकता है।

पॉलीसिस्टिक ओवरीज- PCOS वाली महिलाओं में अक्सर पॉलीसिस्टिक ओवरीज होती हैं, जिनकी पहचान कई छोटे फॉलिकल्स से होती है जिनमें ओव्यूलेशन नहीं होता है।

ओवरी सिस्ट का पता कैसे लगाएं?

आम लक्षण

  • पेल्विक एरिया में दर्द
  • पेट फूलना
  • अनियमित पीरियड्स
  • संबंध बनाते समय दर्द
  • बार-बार पेशाब आना

गंभीर लक्षण

  • अचानक, तेज़ पेल्विक दर्द (ओवेरियन सिस्ट फटने के संकेत)
  • पेट में तेज दर्द के साथ जी मिचलाना या उल्टी होना (ओवेरियन टॉर्शन के लक्षण)
  • चक्कर आना या बेहोश हो जाना

ओवेरियन सिस्ट के कुछ गुप्त लक्षण

  • थकान
  • पाचन संबंधी समस्याएं, और
  • स्तनों में कोमलता या दर्द
  • ओवेरियन सिस्ट के इन लक्षणों को जल्दी पहचानने से महिलाओं को समय पर देखभाल और असरदार इलाज पाने में मदद मिलती है।

ओवरी सिस्ट को नैचुरली कैसे ठीक करें?

आयुर्वेद में ओवरी सिस्ट को नैचुरली ठीक करने के लिए पंचकर्म चिकित्सा बहुत प्रभावशाली मानी जाती है, ये पंचकर्म क्रिया इन पांच गतिविधिओं से मिलकर बनी है। 

वमन- गलत खानपान की वजह से शरीर में कई विषाक्त पदार्थ जमा हो जाते है आयुर्वेद में वमन क्रिया- उल्टी की इस पद्धति के द्वारा मरीज को बार बार वमन करने के लिए ओषधि दी जाती है ताकि विषाक्त पदार्थों वमन के जरिए बाहर निकल सकें और शरीर सक्रिय होकर काम कर सके । और जिन लोगों को अस्थमा की शिकायत होती है । उनको भी पंचकर्मा विधि से काफी फायदा मिलता है और सिस्ट में भी काफी आराम मिलता है।

विरेचन- इस प्रक्रिया में मल के जरिए शरीर के दूषित अवयवों को बाहर निकाला जाता है। इस प्रक्रिया में आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों से निर्मित औषधि रोगी को सेवन करवाया जाता है जिससे मल के माध्यम से शरीर के सारे विषाक्त पदार्थ बाहर निकल सके और शरीर अधिक सक्रिय होकर  काम कर सके।

नस्यम- इस प्रक्रिया में रोगी के नाक में आयुर्वेदिक ड्रॉप्स डाला जाता है जिससे मस्तिष्क के दूषित पदार्थ नाक के रास्ते बाहर आ जाते हैं। जिन लोगों को डिप्रेशन की समस्या होती है उनके लिए यह पद्धति बहुत कारगर साबित होती है और अंडाशय सिस्ट भी इन्हीं समस्याओं में से एक जिसका संबंध डिप्रेशन से भी है।

रक्तमोक्षन- इस प्रक्रिया में आपके शरीर में आयुर्वेदिक औषधि से शरीर के खराब खून को साफ किया जाता है जिससे शरीर में रक्त संचार बढ़ता है और शरीर ऊर्जावान बनकर नई सेल्स पैदा करता है।

डॉ चंचल शर्मा ने कुछ खास क्रिया भी बताई द्वारा बताई हैं जिससे सिस्ट की समस्या को काफी हद तक ठीक किया जा सकता है।

अनुवासन बस्ती- इस प्रक्रिया में शरीर को पौष्टिक आहार दिया जाता है वास्तव में तो यह प्रक्रिया पंचकर्म विधि का मुख्य आधार माना गया है पोस्टिक आहार खाने से रोगी में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और  ज्यादा ऊर्जावान होकर शरीर कार्य करने लग जाता है। सिस्ट का संबंध भी कहीं न कहीं हमारे गलत खान-पान से ही शुरू होता है ।

योग क्रिया- इस क्रिया के माध्यम से अण्डाशय की गांठ का सफल इलाज किया जाता है पर यह क्रिया कुशल एक्सपर्ट की देखरेख में ही की जानी चाहिए। सही तरीके से योग अपनाने पर तीन से चार महीने में नतीजा सामने आ जाता है।

इसके अलावा कुछ घरेलू उपाय भी है जिसको अपनाने से सिस्ट की प्रॉब्लम में राहत मिलती है।

दही का सेवन- दही के सेवन से पेट की सभी समस्याओं से राहत मिलती है।

अदरक का सेवन- आयुर्वेद के अनुसार अदरक के सेवन से सूजन में भी राहत मिलती है और मरीज को इसके सेवन से शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकाश होकर सिस्ट को घटाने में सहायता मिलती है।

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Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।)

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