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पेट से जुड़ी समस्या बन न जाए कोलोरेक्टल कैंसर का कारण, जान लें कब करवाएं टेस्ट

 Written By: Ritu Raj
 Published : Aug 07, 2026 01:59 pm IST,  Updated : Aug 07, 2026 01:59 pm IST

पेट की आम लगने वाली समस्याएं, जैसे लंबे समय तक कब्ज, गैस, या अपच, को अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं। हालांकि, इनमें से कुछ लक्षण बड़ी आंत या मलाशय से जुड़े रोगों और कोलोरेक्टल कैंसर का शुरुआती संकेत हो सकते हैं। चलिए जानते हैं कब करवाना चाहिए टेस्ट।

पेट से जुड़ी समस्या बन न जाए कोलोरेक्टल कैंसर का कारण- India TV Hindi
पेट से जुड़ी समस्या बन न जाए कोलोरेक्टल कैंसर का कारण Image Source : MAGNIFIC

आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी, बिगड़ी लाइफस्टाइल और असंतुलित खान-पान के कारण पेट से जुड़ी समस्याएं बेहद आम हो गई हैं। हम अक्सर कब्ज, गैस या अपच जैसी तकलीफों को साधारण समझकर घरेलू नुस्खों या ओवर-द-काउंटर दवाइयों से दबाने की कोशिश करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि पेट और आंतों से जुड़ी लंबे समय की समस्याएं आगे चलकर कोलोरेक्टल कैंसर का रूप ले सकती हैं। ऐसे में डॉ. विनीत गोयल, कंसल्टेंट, सर्जिकल ऑन्कोलॉजी, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हार्ट इंस्टीट्यूट, ओखला बता रहे हैं कि कब इसका टेस्ट करवाना चाहिए। चलिए जानते हैं। 

क्या कहते हैं IARC के अनुमान

इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (IARC) के GLOBOCAN अनुमानों के अनुसार, कोलोरेक्टल कैंसर दुनिया भर में तीसरा सबसे ज्यादा होने वाले कैंसर में से एक है। वहीं कोलोरेक्टल कैंसर दुनिया में मौत का दूसरा सबसे बड़ा कारण है। हर साल इसके लगभग 19.3 लाख नए मामले सामने आते हैं और लगभग 9.04 लाख लोगों की मौत होती है। कोलोरेक्टल कैंसर के सबसे कॉमन लक्षणों में बिना दर्द वाली गांठ, पेट में ऐंठन जैसा दर्द, आंत में रुकावट, एनीमिया, मल में खून आना और बहुत ज्यादा थकान महसूस होना शामिल हैं। भूख कम लगना, पीलिया और हड्डियों में दर्द कैंसर भी कैंसर के कारण हैं।

ये लक्षण अन्य गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल कैंसर, जैसे छोटी आंत के ट्यूमर और पेट के कैंसर से भी मिलते-जुलते हो सकते हैं। साथ ही, इन लक्षणों का होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि शरीर में कैंसर है। लेकिन यदि ये लक्षण बार-बार दिखाई दें या 2 से 3 सप्ताह तक ठीक न हों, तो कोलोनोस्कोपी और बायोप्सी, मल में छिपे हुए ब्लड की जांच, नॉर्मल ब्लड टेस्च के जरिए पता लगाया जा सकता है। 

कैसे लगाएं कैंसर का पता
कैंसर का पता लगाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण जांच बायोप्सी है, जिसमें गांठ से टिशू का सैंपल लेकर जांच की जाती है। इस जांच से ही कैंसर का पता लगाने में मदद मिलती है। वहीं सोसाइटी में ऐसी धारणा भी है कि  बायोप्सी कराने से कैंसर फैल जाता है, जबकि यह पूरी तरह गलत है। इस गलतफहमी के कारण कई मामलों में डायग्नोसिस करने में देरी होती है, जिससे बीमारी के एडवांस चरण में नहीं पहुंच पाते और मौत का खतरा बढ़ जाता है।

अंतरराष्ट्रीय दिशानिर्देश के मुताबिक एक हेल्दी व्यक्ति को 45–50 वर्ष की उम्र में स्क्रीनिंग कोलोनोस्कोपी कराने की सलाह दी जाती है, जिसे हर 10 सालों में एक बार कराया जाना चाहिए। कोलोरेक्टल कैंसर जेनेटिक भी हो सकता है। यह पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ सकता है। ऐसे परिवारों को कम उम्र से ही नियमित कोलोनोस्कोपी कराने की सलाह दी जाती है, ताकि बिना किसी लक्षण के भी शुरुआती स्टेज में कैंसर का पता लगाया जा सके।

 

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