अकल दाढ़ हमारे जबड़े के सबसे पीछे निकलने वाले 4 दांत को कहा जाता है, जिन्हें मेडिकल भाषा में 'थर्ड मोलर्स' भी कहते हैं। आमतौर पर ये 17 से 25 साल की उम्र में निकलते हैं। इस दांत का इस्तेमाल सखत खाने को चबाकर खाने के लिए किया जाता है। लेकिन वक्त के साथ इंसानों के खान-पान में बदलाव आया। पका हुआ और नरम भोजन खाने से हमारे जबड़े का आकार छोटा होता चला गया। आज के समय में अकल दाढ़ हमारे शरीर के लिए एक 'अवशेषी अंग' बन चुकी है, यानी इसके बिना भी हमारे चबाने या पाचन की प्रक्रिया पर कोई फर्क नहीं पड़ता। लेकिन सवाल ये है कि इसका काम क्या है और इसे कब निकलवाना चाहिए। डॉ. रितिका मल्होत्रा, एचओडी-डेंटल साइंसेज, एफएमआरआई, गुड़गांव बता रही हैं कब निकलवाना चाहिए अकल दाढ़।
क्या कहते हैं डॉक्टर
हर अकल दाढ़ को निकलवाना जरूरी नहीं होता। यदि दाढ़ पूरी तरह सीधी निकली हो, उसके आसपास जबड़े में पर्याप्त जगह हो, वह आसानी से साफ हो रही हो और उसमें कैविटी या मसूड़ों से जुड़ी कोई समस्या न हो, तो उसे निकलवाने की जरूरत नहीं। ऐसी दाढ़ लंबे समय तक स्वस्थ रह सकती है।
कब होती है समस्या
समस्या आमतौर पर तब होती है, जब जबड़े में पर्याप्त जगह न होने के कारण अकल दाढ़ आधी निकले, टेढ़ी निकले या हड्डी अथवा मसूड़े में फंसी रह जाए। ऐसी स्थिति में दाढ़ के आसपास भोजन फंस सकता है, जिससे बार-बार मसूड़ों में सूजन और दर्द हो सकता है। इसके अलावा कैविटी, मुंह खोलने में परेशानी, बदबू, आस पास के दाढ़ को नुकसान और कभी-कभी सिस्ट जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। यदि अकल दाढ़ में बार-बार दर्द या संक्रमण हो रहा हो, उसमें गंभीर कैविटी हो, वह पड़ोसी दांत को नुकसान पहुंचा रही हो या उसकी स्थिति ऐसी हो कि भविष्य में समस्या होने की आशंका अधिक हो, तो उसे निकलवाना बेहतर ऑप्शन हो सकता है।
हालांकि, केवल इस आशंका के आधार पर कि अकल दाढ़ आगे चलकर समस्या पैदा कर सकती है, हर व्यक्ति में उसे पहले से निकलवाना उचित नहीं है। दाढ़ की स्थिति डेंटल जांच और जरूरत पड़ने पर OPG एक्स-रे के आधार पर किया जाना चाहिए। समय-समय पर डेंटल चेक-अप करवाकर इसकी स्थिति पर नजर रखना सबसे बेहतर तरीका है।