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ठंड में चिपक जाती हैं बच्चे की आंखें? तो अपनाएं ये कुछ आसान और सुरक्षित तरीके

 Written By: India TV Health Desk
 Published : Jan 18, 2022 09:20 am IST,  Updated : Jan 18, 2022 10:57 am IST

ठंड के मौसम में हम अक्सर देखते हैं कि बच्चों की आखों की पलकें आपस में चिपक जाती हैं। कई बार हम देखते हैं कि बच्चे जब सोकर उठते हैं, तो अपनी आंखें खोल नहीं पाते हैं।

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ठंड में चिपक जाती हैं बच्चे की आंखे Image Source : FREEPIK

इन दिनों ठंड का कहर जारी है। हर कोई इससे बचने के उपाय करता है। वहीं सर्दी के मौसम में बच्चों के शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता सामान्य दिनों से कम हो जाती है, जिसके चलते हम कई बीमारियों की चपेट में ई जाते हैं। ऐसे ही मौसम में बच्‍चों को ठंड लगने का खतरा बढ़ जाता है । ठंड के मौसम में हम अक्सर देखते हैं कि बच्चों की आखों की पलकें आपस में चिपक जाती हैं। कई बार हम देखते हैं कि बच्चे जब सोकर उठते हैं, तो अपनी आंखें खोल नहीं पाते हैं। साथ ही उनकी आंखों के पास पीले रंग का चिपचिपा पदार्थ भी दिखाई देता है। उस समय समझदारी का परिचय दें और कॉटन की मदद से उनकी आंखों को खोलें। आज हम आपको बाएंगे बच्चों की आंखें चिपक क्यों जाती है, इसके कारण और लक्षण के बारे में-

पलकों के चिपकने का कारण-

- हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक बच्चों के आंकों की नलियां छोटी होती हैं और बच्चे दूसरों के मुकाबले अधिक रोते हैं और उनके आंसू जमा हो जाते हैं। इस कारण उनकी पलके आपस में चिपक जाती हैं।
-बच्चा मां के योनि से गुजरता है जिस कारण उसको कई बीमिरियां हो सकती हैं। ये भी एक कारण हो सकता है पलकों के चिपकने का।
- यदि आपके परिवार में किसी को आंखों से संबंधित कोई समस्या है और वह उन्हीं हाथों से बच्चे को छूता है तब भी बच्चा संक्रमण की चपेट में आ सकता है। तो ध्यान रहे ऐसे लोग बच्चे को न छुएं।

छिपकी हुई पलकों को कैसे करें अलग-

1. स्टरलाइज्ड वॉटर का करें इस्तेमाल-
 स्टरलाइज्ड वॉटर को गुनगुना कर लें। इसके बाद रुई लें और रुई को उसमें डुबाएं और फिर इससे हल्के हाथों से बच्चे की आंखें साफ करें।
रुई को आंखों के अंदरूनी कोने में धीरे धीरे पोछें शुरू करें और धीरे-धीरे आंखों के बाहरी कोने को भी साफ करें। इस बात का विशेष रखें कि हर बार रुई बदल लें। इस प्रकिया से बच्चे की आंखें आसानी से खुल जाएंगी।

2. एंटीबायोटिक
बच्चे की आंखों को साफ रखने के लिए आप डॉक्टर की सलाह के बाद आई ड्रॉप या एंटीबायोटिक दवाएं डाल सकते हैं। इससे बच्चे किसी तरह के नुकसान का कम खतरा है।

3.सलाइन वॉटर 
स्लाइन वॉटर की मदद से भी बच्चे की आंखों को साफ किया जा सकता है। यह बच्चों के लिए सुरक्षित भी माना जाता है। इससे जीवाणु संक्रमण से बचा सकता है और आंखों का पीलापन भी कम हो सकता है। 

4. मालिश
आंखों और नाक के पास अच्छे से मालिश करने से भी सूजन और दर्द में बच्चे को काफी आराम मिलता है। आंखों के चिपकने की समस्या भी कम हो सकती है। 

Disclaimer: यह जानकारी आयुर्वेदिक नुस्खों के आधार पर लिखी गई है। इंडिया टीवी इनके सफल होने या इसकी सत्यता की पुष्टि नहीं करता है। इनके इस्तेमाल से पहले चिकित्सक का परामर्श जरूर लें।

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