स्वाइन फ्लू, जिसे H1N1 इन्फ्लुएंजा भी कहा जाता है, एक वायरल संक्रमण है जो आमतौर पर बुखार, खांसी, गले में खराश, बदन दर्द और कमजोरी जैसे लक्षणों के साथ सामने आता है। अधिकांश मरीज सही देखभाल के साथ ठीक हो जाते हैं। हालांकि, कुछ मरीजों में यह संक्रमण फेफड़ों को प्रभावित कर सकता है और निमोनिया जैसी गंभीर बीमारी का खतरा बड़ा सकता है। लेकिन एक सवाल जो कई लोगों के मन में रहता है वो है कि स्वाइन फ्लू में किन मरीजों को निमोनिया का खतरा रहता है। डॉ. संजय वर्मा, अतिरिक्त निदेशक, आंतरिक चिकित्सा विभाग, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हार्ट इंस्टीट्यूट, ओखला बता रहे हैं कि किन मरीजों को निमोनिया का खतरा रहता है।
किन मरीजों को रहता है निमोनिया का खतरा
निमोनिया का खतरा विशेष रूप से उन लोगों में अधिक रहता है जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है। इसमें बुजुर्ग, छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएं और ऐसे मरीज शामिल हैं जिन्हें पहले से डायबिटीज, अस्थमा, COPD, हृदय रोग, किडनी की बीमारी या कोई अन्य गंभीर बीमारी है। कैंसर का इलाज करा रहे या किसी कारण से इम्युनिटी कम होने वाले मरीजों में भी विशेष सावधानी जरूरी है।
कई बार शुरुआत में फ्लू और निमोनिया के लक्षण एक जैसे लग सकते हैं। लेकिन अगर बुखार लगातार बना रहे या दोबारा बढ़ जाए, खांसी और सांस फूलने की समस्या बढ़ने लगे, सीने में दर्द हो, ऑक्सीजन का लेवल कम हो या मरीज को असामान्य कमजोरी महसूस हो, तो इसे सामान्य फ्लू मानकर घर पर इलाज करते रहना सही नहीं है। ऐसे लक्षणों में मेडिकल जांच जरूरी है।
डॉक्टर की सलाह है कि हाई-रिस्क मरीज फ्लू के लक्षणों को नजरअंदाज न करें। बीमारी के शुरुआती चरण में डॉक्टर से परामर्श लेने से यह तय करने में मदद मिलती है कि मरीज को केवल लक्षणों का इलाज की जरूरत है या आगे की जांच और एंटी वायरल ट्रीटमेंट की जरूरत है। वहीं इससे बचाव के लिए फ्लू वैक्सीन, हाथों की नियमित सफाई, बीमार व्यक्ति के संपर्क से बचना और संक्रमण होने पर मास्क का इस्तेमाल करना बेहद जरूरी है। सबसे जरूरी बात है कि सांस लेने में परेशानी होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।