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कृषि बिल, किसान और विरोध-प्रदर्शन, जानिए क्या है किसान का डर और सरकार का पक्ष

 Written By: IndiaTV Hindi Desk
 Published : Nov 27, 2020 07:58 pm IST,  Updated : Nov 27, 2020 08:39 pm IST

किसानों के विरोध-प्रदर्शन के बीच आप भी जानिए आखिर नए कृषि कानूनों को लेकर किसानों और सरकार के बीच टकराव की स्थिति क्यों बनी हुई है।

Agriculture law farmers protest and government stand all about this agitation- India TV Hindi
Agriculture law farmers protest and government stand all about this agitation Image Source : INDIA TV

नई दिल्ली। केंद्र सरकार के हाल ही में पास हुए जिन 3 नए कृषि कानूनों को लेकर किसान 'दिल्ली चलो' का नारा लगाते हुए धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। उसको लेकर सरकार ने पहले ही बहुत कुछ साफ कर दिया है लेकिन इसके बाद भी किसानों के मन में कुछ बिन्दुओं को लेकर डर बना हुआ है। नए कृषि कानूनों को लेकर राजनीतिक दलों ने भी रोटियां सेंकनी शुरू कर दी हैं। किसानों के विरोध-प्रदर्शन के बीच आप भी जानिए आखिर नए कृषि कानूनों को लेकर किसानों और सरकार के बीच टकराव की स्थिति क्यों बनी हुई है। 

दरअसल, किसानों को नए कृषि कानून को लेकर एमएसपी व्यवस्था खत्म होने, मंडियों का समाप्त होने, कृषि क्षेत्र पर उद्योगपतियों के कब्जा होने, कॉन्ट्रैक्ट फॉर्मिंग से उद्योगपतियों के जमीन छीन लेने और बिना मंडी के उपज कौन खरीदेगा जैसे अन्य सवालों को लेकर दुविधा बनी हुई है। हालांकि, सरकार इन तमाम सवालों का पहले ही जवाब दे चुकी है। सरकार ने साफ कर दिया है नए कृषि कानून में एमएसपी की व्यवस्था खत्म करने का कोई जिक्र नहीं है। एमएसपी पर पहले की तरह खरीद होती रहेगी। सरकार ने कृषि उपज मंडियों को लेकर भी पहले ही साफ कर दिया है कि मंडियों को कोई खतरा नहीं है। मंडियां पहले की तरह बनी रहेंगी अच्छी बात ये होगी कि किसान बिचौलियों के चंगुल से निकल जाएंगे। किसान की मंडी में उपज बेचने की बाध्यता भी खत्म हो चुकी है किसान जहां चाहे अपनी उपज बेच सकता है। 

नए कृषि कानूनों में कॉन्ट्रैक्ट फॉर्मिंग के जरिए फसल बुआई के समय ही उपज के भाव की गारंटी होगी और किसान को यह अधिकार है कि वह जब चाहे कॉन्ट्रैक्ट तोड़ दे। जहां तक रही बात किसान और फसल खरीरददार के बीच कॉन्ट्रैक्ट की तो सरकार ने साफ कर दिया है कि केवल उपज खरीद के लिए ही कॉन्ट्रैक्ट होगा, इसमें जमीन खरीद फरोख्त का सवाल ही नहीं है। नए कृषि कानूनों से सरकार ने कृषि उपज मंडी समिति यानी मंडी से बाहर भी कृषि कारोबार का रास्ता खोल दिया है। हालांकि, सरकार ने नए कृषि कानूनों में मंडियों को खत्म करने की बात कहीं पर भी नहीं कही है, लेकिन उसका प्रभाव मंडियों को तबाह कर सकता है, इसका अंदाजा लगाकर भी किसान डरा हुआ है।  

पीएम मोदी ने कृषि कानूनों को लेकर पहले ही स्थिति कर दी थी साफ

आपको बता दें कि, नए कृषि कानूनों को लेकर बिहार विधानसभा चुनाव में चुनावी रैली के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद ही सभी तरह के फैलाए जा रहे भ्रमों पर पूर्ण विराम लगा दिया था। प्रधानमंत्री मोदी ने कृषि बिलों को लेकर पहले भी स्थिति साफ करते हुए कहा था कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) व्यवस्था पहले की तरह ही लागू रहेगी। किसी किसान की जमीन पर कोई भी कॉन्ट्रैक्ट करने वाला कब्जा नहीं कर सकेगा। किसान अपनी फसल को देश के किसी भी कोने में बेच सकेगा। वह चाहे तो मंडी में फसल बेच सकेगा या फिर चाहे तो सीधे रिटेलर को या किसी प्रोसेसिंग इंडस्ट्री को बेच सकेगा। फसल को मंडी में ही बेचने का दबाव नहीं होगा।

पीएम मोदी ने कहा था कि सरकार ने नए कृषि विधेयक में कृषि के अंदर निजी क्षेत्र और विदेशी निवेश की बात भी कही है। किसान इसके जरिए कॉन्ट्रेक्ट फार्मिंग जैसी सुविधाएं उठा सकेंगे। यानि फसल के लगने से पहले ही वह उद्योग के साथ उसे बेचने के लिए करार कर लेगा और फसल के उत्पादन तथा प्रोसेसिंग में उद्योग भी किसान की मदद करेंगे। कुल मिलाकर देखें तो कृषि विधेयक आने वाले दिनों में कृषि और किसानों के लिए लाभदायक हो सकते हैं।

हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा है कि उनसे (प्रदर्शन कर रहे किसान) बातचीत करके समाधान निकाला जाए, उनकी मांग जायज़ हैं। हम उनका समर्थन करते हैं। जो तीन कानून बनाए गए हैं वो किसान के हित में नहीं हैं। गौरतलब है कि देशभर में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर पंजाब और हरियाणा के किसान ही सबसे ज्यादा फसल बेचते हैं। 

कृषि मंत्री किसानों से बात करने के लिए तैयार, 3 दिसंबर को हो सकती है बात

नए कृषि कानून के किसानों द्वारा विरोध को लेकर केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने शुक्रवार (27 नवंबर) को कहा कि भारत सरकार किसानों से चर्चा के लिए तैयार थी, तैयार है और तैयार रहेगी। मैं सभी किसानों से आग्रह करता हूं कि सर्दी के मौसम में और कोविड के संकट में आंदोलन स्थगित करें और चर्चा का रास्ता अपनाएं। भारत सरकार उनसे चर्चा करने के लिए तैयार है। इससे पहले भी 2 चरण अपने स्तर पर, सचिव स्तर पर किसानों से वार्ता हो चुकी है। 3 दिसंबर को बातचीत के लिए किसान यूनियन को हमने आमंत्रण भेजा है। 

दिल्ली के बुराड़ी में निरंकारी समागम ग्राउंड में विरोध-प्रदर्शन करने पहुंचे आंदोलनकारी किसान

उधर दिल्ली से सटे बार्डर पर किसानों के साथ हिंसक झड़प के बाद आखिरकार आंदोलनकारी किसानों को दिल्ली में प्रवेश की अनुमति मिल गई। दिल्ली पुलिस ने आंदोलनकारी किसानों को बुराड़ी के निरंकारी समागम ग्राउंड में शांति पूर्ण विरोध-प्रदर्शन करने की इजाजत दे दी है। बता दें कि, हरियाणा और पंजाब से किसान अपना विरोध दर्ज कराने के लिए दिल्ली पहुंच चुके हैं। 

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