पटना: गोमांस विवाद पर भाजपा के बचाव की मुद्रा में आने और बढ़ती असहिष्णुता के खिलाफ लेखकों के विरोध के बीच पार्टी प्रमुख अमित शाह ने कहा कि उन राज्यों में हुई घटनाओं के लिए भाजपा को दोषी नहीं ठहराया जा सकता जहां अन्य पार्टियां सत्ता में हैं। शाह ने बिहार में विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने के बाद पहली बार यहां एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया। शाह ने आरक्षण मामले पर आरएसएस (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) प्रमुख मोहन भागवत की टिप्पणी से उपजे विवाद को शांत करने का प्रयास करते हुए कहा कि भाजपा मौजूदा आरक्षण नीति का समर्थन करती है। राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने पिछड़ी जातियों के वोट हासिल करने के लिए भागवत के इस बयान को भुनाने की कोशिश की है।
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, सांसद साक्षी महाराज और उत्तर प्रदेश के विधायक संगीत सोम समेत कई पार्टी नेताओं की उनके विवादास्पद बयानों को लेकर खिंचाई करने के एक दिन बाद शाह ने कहा कि विरोध कर रहे लेखकों ने जिन घटनाओं का जिक्र किया है, उनके लिए उत्तर प्रदेश और कर्नाटक में सत्ता पर काबिज पार्टियां जवाबदेह हैं। शाह ने कहा कि दादरी में एक व्यक्ति की पीट पीट कर की गई हत्या और प्रतिष्ठित कन्नड़ लेखक एम एम कलबुर्गी की हत्या के मामले उत्तर प्रदेश और कर्नाटक मंे हुए हैं जहां क्रमश: समाजवादी पार्टी और कांग्रेस की सरकारें हैं। उन्होंने कहा, कानून व्यवस्था राज्य का मामला है। आप सभी यह जानते हैं। इससे हमारा कोई लेना देना नहीं है।
उन्होंने कहा कि लेखकों ने मुख्य रूप से इन दो घटनाओं को लेकर विरोध किया है। संख्यानुसार मजबूत पिछड़े समूहों को महागठबंधन का समर्थन करते देखा जा रहा है, ऐसे में शाह ने अत्यंत पिछड़ी जातियों और अनुसूचित जातियों तक राजग की पहुंच बनाने का प्रयास करते हुए कहा कि उन्हें उस सरकार की वापसी का भय है जिसका रिमोट कंट्रोल राजद प्रमुख लालू प्रसाद के हाथ में होगा। उन्होंने भागवत की टिप्पणियों और दादरी घटना एवं गोमांस को लेकर हाल में उपजे विवादों पर प्रश्न पूछने वाले पत्रकारों को भी आड़े हाथों लेते हुए कहा कि उन्हें भाजपा के एजेंडे के बारे में पूछने से पहले अपने एजेंडे के बारे में बताना चाहिए। शाह ने कहा, आप मुझसे बिहार या नीतीश कुमार की सरकार के बारे में कोई प्रश्न नहीं पूछ रहे। भाजपा का एजेंडा पूछने से पहले, आपको हमें अपना एजेंडा बताना चाहिए।