नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोलते हुए बुधवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि देश की जनता के पास आम आदमी पार्टी के शासन मॉडल और साख खो चुके उस गुजरात मॉडल के बीच चुनने का विकल्प है जिसने जनता को धोखा दिया है।
पार्टी के आधार में विस्तार की इच्छा जाहिर करते हुए केजरीवाल ने कहा कि आप को 90 प्रतिशत सीटें जीतने और सरकार बनाकर व्यवस्था में बदलाव करने के लक्ष्य से चुनाव लड़ना होगा। आप के राष्ट्रीय संयोजक ने पार्टी की राष्ट्रीय परिषद की बैठक में कहा, हम चुनाव लड़ेंगे लेकिन उससे पहले हमें कड़ी मेहनत करनी होगी। हमें 100 में से 90 सीटें जीतने के उद्देश्य से चुनाव लड़ना है। हम सरकार बनाने और व्यवस्था बदलने के लक्ष्य से चुनाव लड़ेंगे।
केजरीवाल ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि भगवा पार्टी विकास के नाम पर वोट लेती है और बाद में भारत माता की जय नारे लगाने जैसे अन्य मुद्दों पर ध्यान केंद्रित कर देती है। उन्होंने कहा, अब वे कहते हैं कि भारत माता की जय का नारा लगाएं नहीं तो आपको पीटा जाएगा। अन्ना आंदोलन के दौरान लोग दिल से भारत माता की जय कहते थे। पर वे इसके लिए धमकियों का सहारा ले रहे हैं। छात्रों, किसानों और जौहरी समेत सभी गुस्से में हैं। भारत के प्रधान न्यायाधीश भी उनके सामने रो दिए।
केजरीवाल ने कहा, लोग राष्ट्रीय राजधानी में आप के शासन मॉडल से बहुत संतुष्ट हैं और अगर आज चुनाव कराए जाए तो भाजपा को एक सीट भी हासिल नहीं होगी। आप नेता ने कहा यहां एक ओर दिल्ली का शासन मॉडल है और दूसरी ओर गुजरात मॉडल। हम सभी को दोनों की तुलना करने को कहते हैं। गुजरात में स्कूलों की हालत खराब है और स्वास्थ्य सेवाओं की भी। अब सभी को पता है कि गुजरात मॉडल क्या है। गुजरात मॉडल के नाम पर लोगों को धोखा दिया गया है।
दिल्ली सरकार और केंद्र के बीच विभिन्न विवादों का हवाला देते हुए केजरीवाल ने मोदी सरकार पर आरोप लगाया, वह आप के प्रयासों को बरबाद करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं, फिर भी हम आगे बढ़ रहे हैं और दिल्ली की जनता के लिए काम कर रहे हैं।
केजरीवाल ने कहा, हम अपना घोषणापत्र रोज पढ़ते हैं और उस पर काम करते हैं जबकि उन्हें शायद ही अपने किए गए वादे याद हों। केंद्र ने कुछ नहीं किया है। वे कहते हैं कि हम 2023 में यह करेंगे क्योंकि उन्हें पता है कि वह उस समय सत्ता में नहीं होंगे। दिनभर चलने वाली इस बैठक में आप की राष्ट्रीय कार्यकारिणी का चुनाव किया जाएगा जो राजनीतिक मामलों की नई समिति का गठन करेगी।