1. Hindi News
  2. भारत
  3. राष्ट्रीय
  4. तलाक पीड़ित महिला का दर्द: पति के साथ रहने के लिए ससुर के बाद देवर से हलाला की शर्त

तलाक पीड़ित महिला का दर्द: पति के साथ रहने के लिए ससुर के बाद देवर से हलाला की शर्त

 Reported By: Bhasha
 Published : Jul 09, 2018 11:21 pm IST,  Updated : Jul 09, 2018 11:21 pm IST

एक शख्स पर उसकी बीवी ने पहले तलाक देकर घर से निकालने और फिर से साथ रखने के लिए अपने ही ससुर के साथ ‘हलाला’ कराने और दोबारा तलाक देने के बाद अब देवर से हलाला कराने की जिद करने का आरोप लगाया है...

representational image- India TV Hindi
representational image

बरेली, (उ.प्र.): बरेली में तीन तलाक और हलाला का चौंकाने वाला एक कथित मामला सामने आया है। एक शख्स पर उसकी बीवी ने पहले तलाक देकर घर से निकालने और फिर से साथ रखने के लिए अपने ही ससुर के साथ ‘हलाला’ कराने और दोबारा तलाक देने के बाद अब देवर से हलाला कराने की जिद करने का आरोप लगाया है।

बरेली शहर के बानखाना निवासी शबीना ने कल आला हजरत हेल्पिंग सोसायटी की अध्यक्ष निदा खान के साथ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में बताया कि उसकी शादी गढ़ी-चैकी के रहने वाले वसीम से वर्ष 2009 में हुई थी। उसका आरोप है कि दो साल बाद शौहर ने उसे तलाक देकर घर से निकाल दिया। बाद में उसी साल वसीम ने अपने पिता के साथ उसका हलाला कराया। उसके बाद वह फिर वसीम के साथ रहने लगी, मगर लड़ाई-झगड़े खत्म नहीं हुए।

शबीना का आरोप है कि वर्ष 2017 में उसके शौहर ने उसे फिर तलाक दे दिया। अब वह अपने भाई के साथ हलाला करने की शर्त रख रहा है। शबीना ने ऐसा करने से इन्कार कर दिया है और अब वह तीन तलाक, हलाला और बहुविवाह पर सख्त कानून चाहती हैं ताकि औरतें इस जुल्म से बच सकें।

अपने ही ससुर के साथ हलाला करने के बारे में पूछे गए एक सवाल पर शबीना ने कहा कि उनके पास इसके सिवा और कोई रास्ता नहीं था। वह तो बस अपना उजड़ा घर बसाना चाहती थी। इस बीच, मुफ्ती खुर्शीद आलम ने बताया कि सबसे पहले तो यह देखना होगा कि ससुर के साथ हलाला कैसे हुआ? अगर ऐसा हुआ तो बड़ा गुनाह है। दूसरी बात, ससुर से हलाला होने पर बहू अपने पहले शौहर पर हराम हो गयी। वह दोबारा अपने पहले शौहर के साथ नहीं रह सकती।

आला हजरत हेल्पिंग सोसायटी की अध्यक्ष निदा खान ने इस मौके पर कहा कि औरतों को तीन तलाक, हलाला और बहुविवाह का दंश देने वाले मर्द शरीयत के नाम का खुलकर गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सही फैसलों के लिए जरूरी है कि शरई अदालतों (दारुल क़ज़ा) में औरतों को भी काजी बनाने की व्यवस्था की जाए। उन्होंने कहा कि वह नहीं मानती कि इस्लामी कानून ऐसा है जिसके तहत एकतरफा फैसले दिए जाते हों। इस्लाम में औरतों के अधिकारों के लिए जो व्यवस्थाएं हैं, उन्हें अक्सर छुपाया जाता है ताकि उन्हें इंसाफ ना मिले।

निदा ने कहा कि शौहर के जुल्म से बेघर हुईं औरतें अब कानून का सहारा चाहती हैं। ऐसा सख्त कानून, जो उनका घर उजड़ने से बचाए। साथ ही उन्हें पूरी सुरक्षा भी दे सके। उन्होंने कहा कि तीन तलाक पर अभी कानून संसद में पारित नहीं हुआ है। सरकार को चाहिए कि इसमें हलाला और बहु-विवाह को भी शामिल करे। इससे लाखों औरतों की जिंदगी नर्क बनने से बच जाएगी।

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। National से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें भारत