नई दिल्ली: इंसान अपनी जिंदगी में कई किरदार निभाता है, लेकिन कभी-कभी वो अपने किरदार में इतना रम जाता है कि वो किरदार ही उसकी पहचान बन जाता है। अपनी जिंदगी में कोई रोडवेज का कंडक्टर था, कोई पुलिसवाला तो कोई सब्जी बेचने वाला। लेकिन रामलीला के मंच पर उनकी पहचान लंकेश, केवट या हनुमान के रूप में होती है। कई बार तो ऐसा होता है कि रामलीला में उनके द्वारा निभाया गया किरदार ही उनकी पहचान बन जाती है।
ऐसा ही कुछ हुआ मध्य प्रदेश के मुरैना गांव के 67 वर्षीय बृज बिहारी शर्मा के साथ। शर्मा कई सालों तक रामलीला में लंकेश यानी रावण का करिदार निभाते रहे। इसी के चलते लोगों ने उनका नाम ही लंकेश रख दिया और बेटों का नाम हो गया मेघनाद व अक्ष कुमार। बेटों की मार्कशीट से लेकर शादी के कार्ड तक में यही नाम छपे और आज भी यही नाम उनकी पहचान है।
रामलीला से मिला लंकेश नाम, बदल गई परिवार की पहचान
शर्मा को उनके मूल नामबृज बिहारी से कोई नहीं जानता। वह एमपी रोडवेज में कंडक्टर की नौकरी करते थे। 20 साल तक रामलीला में लगातार लंकेश का किरदार निभाते-निभाते लोगों ने उन्हें यही नाम दे दिया।
जब उनके बड़े बेटे का जन्म हुआ तो उसका नाम वृंदावन रखा गया लेकिन लोगों ने उसे मेघनाद नाम से पुकारना शुरू कर दिया। इसके बाद स्कूल सहित शैक्षणिक दस्तावेजों में भी उनके बेटे का नाम मेघनाद ही लिखा गया। बेटे की शादी के कार्ड पर भी यही नाम छपा। लंकेश की पत्नी को लोग मंदोदरी और छोटे बेटे वेद प्रकाश को लोग अक्ष कुमार कहते हैं। शर्मा ने बताया कि सभी से अपनेपन के संबंध होने की वजह से इन नामों से कोई बुलाता है तो बुरा नहीं लगता।
इसी तरह कई और लोग ऐसे है जिनके द्वारा निभाए गए किरदारों के नाम ही उनकी असल जिंदगी की पहचान बन गए।
अगले पेज पर पढ़िए कैसे असल जिंदगी के मनीष कुमार ने रावण बनकर बटोरी तालियां