नई दिल्ली: राज्यसभा में भाकपा ने शुक्रवार को जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में दंडात्मक कार्रवाई के खिलाफ छात्रों द्वारा किए जा रहे अनिश्चितकालीन अनशन पर चिंता जताते हुए सरकार से इसमें हस्तक्षेप करने और इसका समाधान निकालने की मांग की। भाकपा के डी राजा ने शून्यकाल में यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि जेएनयू के छात्र विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा अपने कुछ सहपाठियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई किए जाने के विरोध में अनशन पर बैठे हैं।
उन्होंने कहा कि जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार भी अनशन पर हैं और उनकी हालत बिगड़ गई जिसके बाद उन्हें एम्स में भर्ती कराया गया है। उनकी हालत गंभीर है। अन्य छात्रों की भी हालत बिगड़ती जा रही है। राजा ने कहा कि जेएनयू की स्थापना संसद के एक कानून के तहत की गई और केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण, माकपा नेता सीताराम येचुरी जैसे लोगों ने इस संस्थान में अपनी पढ़ाई की। ऐसे संस्थान के परिसर में छात्र परेशान हो रहे हैं और यह चिंताजनक है। उन्होंने कहा मैंने मानव संसाधन विकास मंत्रालय से इस मामले में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है। संस्थान के कुलपति को भी चाहिए कि वह छात्रों के साथ बातचीत की पेशकश करें।
माकपा सहित अन्य दलों के सदस्यों ने इस मुद्दे से स्वयं को संबद्ध किया। जदयू के शरद यादव ने कहा यह एक गंभीर मामला है। नौजवान छात्रों के खिलाफ मामले दर्ज करना और उन्हें सजा देना देश के लिए अच्छी बात नहीं है। यादव ने कहा कि वह भी लंबे समय तक छात्र राजनीति का हिस्सा रहे हैं लेकिन उन्हें इस तरह का अनुभव कभी नहीं हुआ। उप सभापति पी जे कुरियन ने संसदीय कार्य राज्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी से कहा कि सरकार को यह मुद्दा यथाशीघ्र सुलझाने की कोशिश करनी चाहिए।
गौरतलब है कि जेएनयू ने पिछले माह शोधार्थी उमर खालिद तथा अनिर्वाण भट्टाचार्य को निष्कासित कर दिया था तथा कन्हैया कुमार पर 10,000 रुपए का जुर्माना किया था। यह कार्रवाई उस विवादास्पद कार्यक्रम में उनकी कथित संलिप्तता को ले कर की गई जो संसद पर हमले के दोषी अफजल गुरू की याद में विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित किया गया था। जदयू की कहकशां परवीन ने हरियाणा के रेवाड़ी जिले के दो गांवों में कथित छेड़छाड़ की वजह से लड़कियों का उनके अभिभावकों द्वारा स्कूल जाना बंद कराए जाने का मुद्दा उठाया।