मुंबई: बॉलीवुड के ट्रैजडी किंग नाम से मशहूर अभिनेता दिलीप कुमार को केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने आज बांद्रा उपनगर स्थित उनके आवास पर पद्म विभूषण से सम्मानित किया। बीमार चल रहे कुमार का हिन्दी सिनेमा में करीब छह दशक लंबा करियर रहा है।
अभिनेता की पत्नी सायरा बानो (71) की मौजूदगी में सिंह ने 93 वर्षीय अभिनेता को पदक तथा प्रमाणपत्र दिया और शॉल भेंट किया। दिलीप कुमार नया दौर, जुगनू, अंदाज और देवदास जैसी फिल्मों के साथ हिन्दी सिनेमा में शीर्ष पर पहुंचे।
काले रंग का सूट पहने हुए कुमार बमुश्किल अपनी आंखें खोल पा रहे थे। जब उन्हें राष्ट्रीय सम्मान दिया गया तो सायरा ने उन्हें सहारा दिया। उन्होंने 60 से ज्यादा हिन्दी फिल्मों में बेहतरीन काम किया है।
जिस समय उन्हें सम्मानित किया जा रहा था उस समय महाराष्ट्र के राज्यपाल सी. विद्यासागर राव, मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या 25 जनवरी 2015 को सरकार ने हिन्दी फिल्म अभिनेता दिलीप कुमार, अमिताभ बच्चन और कुछ अन्य लोगों को प्रतिष्ठित पद्म विभूषण पुरस्कार देने की घोषणा की गयी थी।
बीमार होने के कारण कुमार अप्रैल में राष्ट्रपति भवन में आयोजित इस समारोह में शामिल नहीं हो सके थे जिसमें राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने अन्य पद्म पुरस्कार विजेताओं को सम्मानित किया था।
पेशावर में जन्मे मोहम्मद युसूफ खान ने दिलीप कुमार के रूप में 1944 में बॉम्बे टॉकीज द्वारा निर्मित ज्वार भाटा फिल्म से एक अभिनेता के रूप में अपने कैरियर की शुरूआत की थी।
अपने छह दशक से लंबे कैरियर में उन्होंने रोमांटिक अंदाज (1949), रोमांचक आन (1952), नाटकीय देवदास (1955), हास्यपूर्ण अंदाज (1955) और ऐतिहासिक मुगल-ए-आजम (1960) तथा सामाजिक गंगा जमुना (1961) जैसी विविधतापूर्ण फिल्मों में काम किया है।
हिन्दी फिल्म जगत में ट्रेजडी किंग के रूप में पहचाने जाने वाले कुमार ने क्रांति (1981), शक्ति 1982, कर्मा (1986) और सौदागर (1991) समेत विभिन्न फिल्मों में काम किया। उनकी अंतिम फिल्म किला 1998 में आयी थी।
भारतीय सिनेमा में अपने असाधारण और विशिष्ट योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें 1991 में पद्म भूषण से सम्मानित किया था। 1994 में उन्हें दादा साहेब फाल्के पुरस्कार और इस साल उन्हें पद्म विभूषण पुरस्कार दिया गया।
अमिताभ बच्चन ने यहां संवाददाताओं से कहा, मैं वर्षों से दिलीप कुमार का बहुत बड़ा प्रशंसक रहा हूं। यह हम सभी के लिए बहुत गर्व और खुशी का पल है.... जब भारतीय सिनेमा का इतिहास लिखा जाएगा तो वह दिलीप साहब से पहले और दिलीप साहब के बाद के काल में बंटेगा।