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PM मोदी के US कांग्रेस को संबोधित करने पर भड़का चीन

 Written By: India TV News Desk
 Published : Jun 09, 2016 01:07 pm IST,  Updated : Jun 09, 2016 02:22 pm IST

अमेरिका और भारत की करीबी पर चीन भड़क गया है। चीन के सरकारी मीडिया में छपी खबरों के अनुसार, मोदी और ओबामा की मुलाकातों से चीन चिंतित है।

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नई दिल्ली: अमेरिका और भारत की करीबी पर चीन भड़क गया है। चीन के सरकारी मीडिया में छपी खबरों के अनुसार, मोदी और ओबामा की मुलाकातों से चीन चिंतित है। उसने कहा है कि चीन को भला-बुरा कहकर भारत अपना सपना सच नहीं कर सकता है। चीन मोदी के यूएस कांग्रेस को संबोधित करने से भी खफा है। 1943 के बाद से अब तक किसी भी चीनी नेता को यूएस कांग्रेस के संयुक्‍त संत्र को संबोधित करने के लिए नहीं बुलाया गया है। 18 फरवरी, 1943 को चीन की तत्‍कालीन प्रथम महिला सूंग-मे-लिंग ने संबोधित किया था।

चीन के सरकारी अखबार ‘ग्‍लोबल टाइम्‍स’ ने बुधवार को लिखा कि दो साल में अमरीका की 4 यात्राएं और राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ 7 बैठकें भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत और अमरीका के संबंध को एक अभूतपूर्व स्तर पर ले गई हैं।

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मोदी की हालिया अमेरिका यात्रा का संदर्भ देते हुए अखबार ने कहा, 'चीन के साथ कई पहलुओं पर प्रतिद्वंद्विता के बावजूद भारत जानता है कि उसका बड़ा सपना चीन को भला बुरा कहकर या उसे रोककर हकीकत में नहीं बदल सकता। इसके बजाय, उन्हें अपने हित के लिए सहयोग को विस्तार देना चाहिए, संभावनाओं को तलाशना चाहिए और आपसी विश्वास कायम करना चाहिए। चीन भारत के लिए एक प्रतिद्वंद्वी से ज्यादा सहयोगी है। यह चीन के प्रति भारत की मौलिक समझ बनाएगा।'

लेख में कहा गया है 'भारत उम्मीद करता है कि अमेरिका के साथ संबंध मजबूत करके वह विकास में लाभ ले सकता है और अपनी क्षमता के अनुरूप एक अंतरराष्ट्रीय दर्जा हासिल कर सकता है। मोदी ने भारत को शक्ति का एक वास्तविक केंद्र बनाने के सामान्य नजरिए के साथ अमेरिका के साथ अपनी बातचीत की है। वह अमेरिका के साथ एक व्यापक और बेहतर आर्थिक संबंध को बढ़ावा देने के लिए उत्सुक थे।'

इसमें कहा गया, 'उन्होंने साजोसामान आदान-प्रदान समझौता पत्र पर हस्ताक्षर की अपील की। यह एक ऐसी ऐतिहासिक संधि है, जो अमेरिका के साथ साजो सामान और रक्षा सहयोग को बढ़ावा देती है और वह भारत को परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह का सदस्य बनाने में मदद के लिए अमेरिकी समर्थन की भी उम्मीद करते हैं। यह परमाणु शक्ति केंद्र के रूप में भारत के दर्जे को ठोस रूप देने का अंतिम कदम है।'

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