अहमदाबाद: गुजरात में गोधरा कांड के बाद गुलबर्ग सोसाइटी में हुई हिंसा मामले में दोषी ठहराए गए लोगों को आज सजा का ऐलान अब 9 जून को होगा। इससे पहले मामले में जांच करने वाली एसआईटी अदालत ने 02 जून को 24 आरोपियों को दोषी ठहराया था। अभियोजन पक्ष हत्या के आरोप में दोषी ठहराए गए 11 लोगों के लिए फांसी की सजा की मांग कर सकता है जबकि उनके वकील उनके प्रति नरमी बरतने की मांग कर सकते हैं।
गुलबर्गा सोसाइटी हिंसा के 24 दोषियों को सीबीआई की विशेष अदालत 9 जून को सज़ा सुना सकती है। सीबीआई की विशेष अदालत ने दो जून को 66 आरोपियो में से 24 को हिंसा का दोषी करार दिया था। कोर्ट में इन 24 दोषियों में 11 को हत्या का दोषी माना है जबकि वीएचपी के नेता अतुल वैद्य सहित 13 आरोपियों को हल्के अपराधों में दोषी ठहराया है।
विशेष अदालत ने छत्तीस आरोपियों को बरी कर दिया था जबकि छह आरोपियों की केस की सुनवाई के दौरान ही मौत हो चुकी है। माना जा रहा है कि सरकारी वकील हत्या के ग्यारह दोषियों के लिए सज़ा ए मौत की मांग कर सकते है जबकि बचाव पक्ष की पूरी कोशिश होगी कि इन्हें उम्रक़ैद की सज़ा हो।
क्या है गुलबर्ग सोसाइटी हिंसा ?
फरवरी, 2002 में हुए गुजरात दंगों के दौरान अहमदाबाद के गुलबर्गा सोसाइटी पर दंगाइयों ने हमला किया था जिसमें कांग्रेस के पूर्व सांसद एहसान ज़ाफरी सहित 69 लोगों की जान गई थी। एहसान जाफरी उसी सोसाइटी में अपने परिवार के साथ रहते थे। 69 लोगों में से 39 लोगों के तो शव मिले लेकिन बाकी 30 शव नहीं जिन्हें सात साल बाद कानूनी परिभाषा के तहत मरा हुआ मान लिया गया।