नई दिल्ली: देश में पिछले कुछ सालों से आम आदमी को लुभाने के लिए राजनीतिक दल चुनावी वादों का पिटारा खोल रहे हैं और चुनाव में उनका यह तरीका खासा लोकप्रिय भी हो चला है। इस कोशिश का तमाम राजनीतिक दलों को फायदा भी होता हुआ दिखा है। कहीं सस्ता चावल तो कहीं लैपटॉप देने के वादे के साथ राजनीतिक दल चुनाव में लाभ की स्थिति में रहे हैं।
सवाल यह है कि आखिर यह कितना सही है और क्या यह भारतीय लोकतांत्रिक प्रणाली के लिए खतरे का संकेत तो नहीं है? चुनाव आयोग ने चुनाव प्रकिया में तमाम सुधार किए हैं, लेकिन राजनीतिक दल जिस तरह से मतदाताओं को लुभाने की कोशिशें कर रहे हैं वह उस पर लगाम लगाने में अभी उतना कामयाब होता हुआ नजर नहीं आया है।
चुनाव का मौसम आते ही नेता अपने वादों के साथ और दुकानें वादों की सूची के साथ तैयार रहती हैं। इन वादों और इनामों के साथ वोट और वोटर्स को लुभाने की कोशिश होती है, जिससे सत्ता हासिल की जाती है। देश का दक्षिणी राज्य तमिलनाडु हो या फिर सबसे बड़ा सूबा उत्तर प्रदेश, ‘सस्ते ऑफर्स’ और आम आदमी की आम जरूरतें न्यूनतम दरों पर पूरी करने रवायत खबरों में रहती हैं।
ऐसा अक्सर चुनावी माहौल में देखा जा सकता है। तमिलनाडु में इसी महीने और उत्तर प्रदेश में साल 2017 में चुनाव होने हैं। ऐसे में वादों और इनामों की चर्चा करना जरूरी हो जाता है। आज हम आपको अपनी खबर में बताएंगे कि किन-किन राज्यों में वादों और इनामों के दम पर वोटर्स को खींचने की जुगत भिड़ाई जाती है।
तमिलनाडु में करुणानिधि और अम्मा ब्रांड में जंग:
राज्य के खजाने को खैरात की तरह बांटने की परंपरा तमिलनाडु में साल 2006 से ज्यादा प्रचलन में है। डीएमके सुप्रीमो ने 2 रुपए प्रति किलो की दर से चावल उपलब्ध कराने का वादा किया था। चुनाव जीतने के बाद इस दर को और कम कर 1 रुपए प्रति किलो कर दिया गया। तमिलनाडु जैसे राज्य में चावल की खपत ज्यादा होती है, इसे देखते हुए यह आइडिया वोटर्स को लुभाने के लिए सबसे उपयुक्त था।
AIADMK की जयललिता को करुणानिधि की इस खैरात का काट निकालने के लिए थोड़ा बेहतर करना था, उन्होंने ऐसा किया भी जिसके बाद राज्य के कोष से खैरात बांटने का सिलसिला काफी आगे बढ़ गया। आज हम सभी जानते हैं कि तमिलनाडु में अम्मा ब्रांड का पानी ही नहीं, फॉर्मेसी, बेबी किट, सीमेंट, मोबाइल, कैंटीन और न जाने क्या क्या सस्ती दरों पर उपलब्ध है। लोकतंत्र में इस तरह के चलन से सीधा नुकसान राज्य की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
यूपी में मजदूरों को 10 रुपए में भरपेट खाना देने को तैयार अखिलेश सरकार:
हाल ही में उत्तर प्रदेश की सपा सरकार ने वादा किया है कि वो राज्य के मजदूरों को मात्र 10 रुपए में भरपेट खाना उपलब्ध करवाएगी। इंडियन रेलवे कैटरिंग एवं टूरिज्म कॉरपोरेशन (IRCTC)राज्य सरकार की मदद से सरकारी योजनाओं के अंतर्गत काम करने वाले मजदूरों को भरपेट खाना 10 रुपए में उपलब्ध करवाने की दिशा में काम कर रह है। सस्ती दरों में मजदूर वर्ग को भोजन उपलब्ध करवाकर यह कहीं न कहीं एक खास वर्ग का वोट हासिल करने की राजनीति ही है। इससे पहले भी सपा सरकार छात्रों को लैपटॉप और वजीफा देकर एक खास वर्ग को लुभाने की कोशिश कर चुकी है।
दिल्ली में जल्द खुलेगी आम आदमी कैंटीन, मिलेगा 5 से 10 रुपए में खाना:
आम आदमी का नारा देकर दिल्ली की सत्ता पर काबिज होने वाली आम आदमी पार्टी ने भी साल 2015 में गरीबों को 10 रुपए में खाना उपलब्ध करवाने की तैयारी की थी। दिल्ली सरकार ने इसके लिए सब्सिडी युक्त कैंटीन योजना भी लॉन्च की था। मौजूदा समय में कुछ जगहों पर इस तरह की कैंटीन की शुरुआत भी हो चुकी है।