श्रीनगर: आतंकी समूह इस्लामिक स्टेट के समर्थकों से इंटरनेट पर संपर्क में आने वाले कुछ युवाओं से सुरक्षा एजेंसियों ने पिछले माह पूछताछ की थी। यह पूछताछ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कश्मीर दौरे से पहले की गई थी। एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि युवाओं को चेतावनी देकर और आईएस के खतरों के बारे में सलाह देकर रिहा करते हुए उनके माता-पिता के हवाले कर दिया गया था। अधिकारी ने पहचान उजागर न करने के अनुरोध के साथ कहा कि कश्मीरी युवाओं ने आईएस में ज्यादा रूचि नहीं दिखाई है लेकिन ऐसी कुछ घटनाएं जरूर हुई हैं कि इनमें से कुछ युवा सोशल नेटवर्किंग साइटों की मदद से आईएस के समर्थकों के संपर्क में आए।
सुरक्षा अधिकारी ने कहा, हां, ये लोग इंटरनेट पर (IS के साथ) संपर्क में हैं। कुछ को प्रधानमंत्री के दौरे से पहले घेर लिया गया था। यह उस दौरान हुआ था। उन्होंने कहा, जिन युवाओं को हिरासत में लिया गया, उनसे पुलिस ने पूछताछ की। कुछ तो था... उन्हें चेतावनी दी गई, सलाह दी गई और फिर उन्हें उनके माता-पिता के हवाले कर दिया गया। ये वे युवा लड़के थे, जो इंटरनेट पर :आईएस संपर्कों: तक पहुंच बना रहे थे। कई बार लोग इंटरनेट पर चर्चा करने लग जाते हैं जबकि उन्हें पता भी नहीं होता कि वे बात किससे कर रहे हैं।
अधिकारी ने कहा कि, अभी तक आईएस के कश्मीर में आने की संभावना इतनी अधिक नहीं हुई है, फिर भी यह एक ऐसी चिंता है, जिसपर हमें नजर रखनी है क्योंकि इंटरनेट के जरिए कश्मीरी युवाओं से संपर्क बनाने की कोशिशें हुई हैं। आये जापानी प्रधानमंत्री ने भारती एयरटेल, आईसीआईसीआई बैंक और टीसीएस समेत कई प्रमुख कारपोरेट घरानों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की।
अधिकारी ने कहा, इस समय, हमें लगता है कि दिलचस्पी के मामले में यह :इस्लामिक स्टेट: अभी बेहद नवजात किस्म का है। अधिकारी ने कश्मीर में शुक्रवार को विरोध प्रदर्शनों के दौरान झंडे लहराए जाने की वजह उस प्रचार को बताया, जो कि आईएस को मीडिया के जरिए मिल रहा है। उन्होंने कहा, झंडे लहराने की घटना कभी कभार शुक्रवारों को होती है। जो लड़के झंडे लहरा रहे हैं...पहले उन्हें ज्यादा प्रचार मिल जाता था और फिर ज्यादा झंडे लहराए जाते थे। अब प्रचार कम है इसलिए झंडा लहराने की घटनाएं भी कम हो गई हैं।
कश्मीर में आईएस की भौतिक मौजूदगी की बात को खारिज करते हुए अधिकारी ने कहा कि ऐसी किसी घटना का तो लश्कर-ए-तैयबा और हिज्बुल मुजाहिद्दीन जैसे संगठन भी विरोध करेंगे। उन्होंने कहा, लश्कर और हिज्बुल द्वारा इस्लामिक स्टेट से दूरी बनाकर रखने की वजह यह है कि सभी संगठन समान लोगांे के लिए ही होड़ कर रहे हैं। वे :आतंकी: या तो लश्कर में शामिल होंगे या फिर आईएस में।
अधिकारी के अनुसार, खुफिया एजेंसियां कश्मीर में आईएस के प्रति पनप सकने वाली दिलचस्पी पर नजर रखने के लिए इंटरनेट ट्रैफिक की निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने कहा, खुफिया एजेंसियां इस तरह की गतिविधि की निगरानी कर रही हैं।
लश्कर-ए-तैयबा ने पिछले माह खुद को आईएस से दूर बताते हुए एक बयान जारी किया था। लश्कर-ए-तैयबा के प्रवक्ता ने कहा था, कश्मीरी लोग किसी बाहरी समूह से मदद और समर्थन नहीं चाहते। प्रवक्ता ने आईएस को इस्लाम विरोधी पश्चिमी देशों की उपज भी बताया।