नई दिल्ली: कश्मीरी पंडितों की वापसी का मुद्दा नरेंद्र मोदी सरकार के एजेंडा में शीर्ष पर होने के साथ ही केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने घाटी में उनके लौटने के लिए अनुकूल माहौल बनाने की सोमवार को वकालत की। उन्होंने कहा कि प्रवासी लोगों को अपने जन्मस्थान पर लौटने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कश्मीर की संस्कृति, जिस मिश्रित संस्कृति की बात कश्मीर करता है, वह कश्मीरी पंडितों की मौजूदगी के बिना अपूर्ण है।
प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री सिंह ने उम्मीद जताई कि जम्मू कश्मीर में पीडीपी-भाजपा की गठबंधन सरकार समुदाय की चिंताओं और प्राथमिकताओं पर विचार करेगी तथा उनकी वापसी के लिए स्थिति बनाएगी। उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा, मैं कहना चाहूंगा कि मैं पूरी तरह से कश्मीरी पंडितों की वापसी के पक्ष में हूं लेकिन वापसी निश्चित रूप से सम्मान और सुरक्षा के साथ हो तथा हमें ऐसा माहौल बनाना होगा जहां पंडित अपने जन्म स्थान लौटने के लिए प्रेरित हों।
देश में कश्मीरी पंडितों के करीब 62,000 पंजीकृत परिवार हैं जो 1990 के दशक में जम्मू कश्मीर में आतंकवाद शुरू होने के कारण घाटी से बाहर चले गए थे। करीब 40,000 प्रवासी कश्मीरी परिवार जम्मू में रह रहे हैं जबकि करीब 20,000 परिवार दिल्ली-एनसीआर में हैं तथा करीब 2,000 परिवार देश के अन्य हिस्सों में रह रहे हैं।
मंत्री की टिप्पणी के पहले राज्य सरकार ने हाल ही में केंद्र से उन तीन स्थानों का आकलन करने को कहा था जिसकी पहचान उसने विस्थापित कश्मीरी पंडितों के लिए कालोनियां बनाने के लिए की है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने राज्य सरकार को जमीन की उपलब्धता जल्दी से जल्दी सुनिश्चित करने की सलाह दी ताकि कश्मीरी पंडितों के लिए कालोनियों का निर्माण कार्य शुरू हो सके।