नई दिल्ली: केरल में वाम मोर्चा की जीत के बाद माकपा और भाजपा कार्यकर्ताओं की झड़प की गूंज रविवार को राष्ट्रीय राजधानी में भी सुनाई पड़ी तथा भाजपा के एक प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मुलाकात कर उनसे हस्तक्षेप की मांग की वहीं माकपा कार्यालय के बाहर दोनों दलों के कार्यकर्ताओं के बीच झड़प के बाद करीब 600 लोगों को हिरासत में ले लिया गया।
उधर माकपा ने पलटवार करते हुए भाजपा और आरएसएस को केरल में हिंसा के लिए जिम्मेदार ठहराया। पार्टी ने आरोप लगाया कि उनके कार्यकर्ताओं ने वाम दलों के नेताओं के विजय जुलूस पर हमला किया क्योंकि भगवा संगठन जनादेश को स्वीकार करने की इच्छुक नहीं हैं। केरल में वाम मोर्चे की जीत के बाद निकली एक रैली में भाजपा के एक कार्यकर्ता की कथित तौर पर वाम समर्थकों द्वारा हत्या किए जाने के खिलाफ पार्टी के कार्यकर्ताओं ने यहां माकपा कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया।
नई दिल्ली के गोल मार्केट इलाके में स्थित माकपा कार्यालय के चारों ओर आज सुबह चार चक्रीय सुरक्षा व्यवस्था की गई थी और पुलिस की कई टीमें तैनात की गई थीं। प्रदर्शनकारियों का विरोध करने के लिए इमारत से भी माकपा कार्यकर्ता बाहर आए और वहां उनके बीच मामूली झड़प भी हुई जब भाजपा कार्यकर्ताओं के एक समूह ने पुलिस बैरियर को तोड़ दिया और माकपा कार्यालय के साइनबोर्ड को क्षतिग्रस्त कर दिया। पुलिस ने दोनों समूहों को अलग किया। पुलिस के अनुसार किसी के घायल होने की खबर नहीं है।
डीसीपी (नई दिल्ली) जतिन नरवाल ने कहा, कानूनी प्रावधानों के तहत करीब 600 लोगों को हिरासत में लिया गया है और स्थिति नियंत्रण में है। भाजपा प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने किया। उन्होंने राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद संवाददाताओं से कहा कि भाजपा और आरएसएस के कार्यकर्ता माकपा के अत्याचारों का सामना कर रहे हैं जिसके नेतृत्व वाला गठबंधन राज्य में विधानसभा चुनाव जीता है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस उचित कार्रवाई नहीं कर रही।