
नवंबर, 2006
उड़ीसा के पुरी में जगन्नाथ मंदिर में अधिकारियों के देर से दरवाजा खोलने से हुई भगदड़ में करीब 4 लोगों की मौत हो गई थी और कम से कम 18 लोग घायल हो गए थ। इस बारें में प्रत्यक्षदर्शियों का कहना था कि अधिकारियों ने मंदिर का दरवाज़ा खोलने में देर कर दी जिसके कारण भगदड़ मच गई थी।
जनवरी 2005
महाराष्ट्र के दूरवर्ती मंढारा देवी मंदिर में अधिक मात्रा में भीड़ एकत्रित हो गई थी। संकरा रास्ता होने के कारण मची भगदड़ में करीब 265 लोग मारें गए थे। जिसमें मरने वालों से में सबसे ज्यादा बच्चें और मगिलाएं थी।
अगस्त 2003
महाराष्ट्र के नासिक में कुंभ मेले में मची भगदड़ में 125 लोगों की मौत हो गई थी। सूत्रों के अनुसार लकड़ियों से बनी सुरक्षा बाड़ के पीछे क़रीब पचास हज़ार लोग थे जो आगे बढ़ने के लिए धक्का-मुक्की कर रहे थे। वह बाड़ टूट गई जिससे आगे चल रहे बहुत से लोग गिर पड़े। पीछे चलने वाले लोग उनके ऊपर से चलने लगे जिससे बड़ी भगदड़ मच गई और नीचे दबे लोग दबे ही रह गए।
साल 1986
हरिद्वार में एक धार्मिक आयोजन के दौरान भगदड़ में करीब 50 लोगों की मृत्यु हो गई थी।
साल 1954
इलाहाबाद में कुंभ मेले के दौरान भगदड़ का भयानक मंजर देखने को मिला। जिसमें लगभग 800 लोगों इस दर्दनाक हादसे के शिकार हुए।