नई दिल्ली: पीवी सिंधु और साक्षी मलिक रियो ओलंपिक से देश के लिए मेडल ले आई। दीपा कर्माकार ने भी ओलंपिक में भारत का झंडा बुलंद किया। लेकिन आप ये जानकर हैरान हो जाएंगे कि कई सिंधु, कई साक्षी, कई दीपा आज भी सिस्टम के आगे दम तोड़ रही हैं। आपको भले ही यकीन न आए, लेकिन नेशनल लेवल की एक हैंडबॉल खिलाड़ी ने तो सिस्टम से तंग आकर खुदकुशी कर ली।
पटियाला में हैंडबॉल खिलाड़ी पूजा कुमारी का सुसाइड हमारे पूरे समाज, पूरे सिस्टम को आईना दिखाता है। वो समाज, वो सिस्टम जो आजकल इस चर्चा में डूबा हुआ है कि आखिर हमें ओलंपिक में मेडलों के लाले क्यों पड़ जाते हैं? जानिए आखिर इस चैंपियन ने सुसाइड क्यों किया। आखिर सिस्टम के चक्कर में क्यों लगाया मौत को गले।
खो दिया हैं उभरता हुआ सितारा
19 साल की हैंडबॉल खिलाड़ी पूजा पटियाला के संजय कॉलोनी इलाके में रहती थी। वो पटियाला के खालसा कॉलेज में बीए पार्ट-2 की थी छात्रा थी। हैंडबॉल में उसने नेशनल लेवल पर धाक जमाई थी, लेकिन विडंबना देखिए कि खेल में मैदान मारने वाली पूजा सिस्टम के आगे हार गई।
पूजा सैकड़ो मेडल, सर्टिफिकेट जीत चुकी थी। जिससे इस बात का अंदाजा जगाया जा सकता हैं कि आखिर वह देश के लिए क्या कर सकती थी। हमने आज एक देश का एक सितारा खो दिया। जो कबी लौट कर न सकती हैं। वो भी गरीबी के कारण। नेशनल लेवल की खिलाड़ी अपने फील्ड में क्या नहीं कर सकती थी और क्या नहीं करना चाहती थी, लेकिन उसने जो किया उसने हमारे पूरे सिस्टम पर सवाल उठा दिए, पूरे सिस्टम को कठघरे में खड़ा कर दिया।
हैंडबॉल की एक उभरती हुई खिलाड़ी पूजा कुमार ने गले में फंदा डालकर खुदकुशी कर ली और पीछे छोड़ गई दर्द से लिखी एक पाती और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम खून से लिखा एक संदेश कि मोदी जी मेरे परिवार की मदद करो।
अमीरी-गरीबी बनी मौत की वजह
पटियाला के खालसा कॉलेज की इस खिलाड़ी ने आखिर इतना बड़ा कदम कैसे उठा लिया। आखिर वो क्या मजबूरियां थीं कि एक हुनरमंद हैंडबॉल खिलाड़ी ने खुद की जान ले ली। उसे समझने से पहले सुनिए ये दर्द क्या कहता है। पूजा की मां का ये दर्द ज़िगर पर गहरे धंसता है।
ग़रीब आदमी की ज़िंदगी...नहीं है अमीरों की ही.. जिंदगी है....सिर्फ अमीरों को ही रोटी मिलती है...हमारे बच्चे के साथ धोखा किया। हमारे बच्चे की जान ले ली...
जिसे सुनकर सब हैरान रह जाते हैं कि गरीबी और अमीरी की खाई एक होनहार खिलाड़ी की जिंदगी लील गई। आरोप है कि गरीब परिवार की इस होनहार खिलाड़ी को उसके कॉलेज ने ही ज़लील कर दिया। पहले एडमिशन में अड़चन डाली गई और फिर उसे हॉस्टल नहीं दिया गया। यहां तक कि कहीं और एडमिशन लेने की नसीहत दे दी गई। जिसके बारें में पूजा ने अपने आखिरी खत में लिखा हैं।
पूजा का पापा के नाम आखिरी खत
मेरा आखिरी नमस्ते है पापा
नमस्ते पापा...यह आखिरी नमस्ते हैं जिसका कारण गिल सर हैं और उनकी गलती की वजह से ही मैं आत्महत्या करने जा रही हूं। गिल सर ने मेरी तथा कबड्डी और हॉकी की सभी लड़कियों को पिछले साल खालसा कॉलेज में एडमिशन दिया। आधी पढ़ाई करवाई मगर इस साल कबड्डी और हॉकी वाली लड़कियों को कॉलेज में एडमिशन नहीं दिया। उनकी ज़िंदगी ख़राब कर दी। कबड्डी वालों को इसलिए एडमिशन हीं दिया क्योंकि वो पिछले साल गेम में कोई मेडल लेकर नहीं लाई थी। अब एडमिशन दिया लेकिन हॉस्टल नहीं दिया।एडमिशन और हॉस्टल के बीच फंस बनी पूजा की मौत की वजह
पहले एडमिशन और फिर हॉस्टल का पेंच फंसाकर पूजा कुमारी को उसके पसंदीदा खेल हैंडबॉल से बाहर कर दिया गया जिसका सदमा वो बर्दाश्त नहीं कर पाई और उसने फांसी का फंदा लगा लिया।
पूजा कुमारी के सुसाइड नोट और उनके घरवालों के आरोप पर अभी खालसा कॉलेज का पक्ष सामने नहीं आया है। पुलिस भी कुछ कहने से बच रही है।
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