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प्रशांत भूषण अवमानना मामले में कल सजा का ऐलान करेगा सुप्रीम कोर्ट, माफी मांगने से कर चुके हैं इंकार

 Edited By: IndiaTV Hindi Desk
 Published : Aug 29, 2020 10:05 pm IST,  Updated : Aug 29, 2020 10:05 pm IST

न्यायपालिका के खिलाफ अपने दो ट्वीट को लेकर न्यायालय की अवमानना के दोषी ठहराए गए वकील प्रशांत भूषण को सुप्रीम कोर्ट 31 अगस्त को सजा सुनाएगी। न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ भूषण के खिलाफ अपना फैसला सुनाएगी। 

Prashant Bhushan contempt case: SC set to pronounce quantum of sentence Monday- India TV Hindi
Prashant Bhushan contempt case: SC set to pronounce quantum of sentence Monday Image Source : PTI

नयी दिल्ली: न्यायपालिका के खिलाफ अपने दो ट्वीट को लेकर न्यायालय की अवमानना के दोषी ठहराए गए वकील प्रशांत भूषण को सुप्रीम कोर्ट 31 अगस्त को सजा सुनाएगी। न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ भूषण के खिलाफ अपना फैसला सुनाएगी। अदालत की अवमानना अधिनियम के तहत सजा के तौर पर भूषण को छह महीने तक की कैद या दो हजार रुपये का जुर्माना अथवा दोनों सजा हो सकती हैं। 

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भूषण द्वारा न्यायालय की तरफ से माफी मांगने के सुझाव को खारिज किए जाने के बाद वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवन ने 25 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया था सुप्रीम कोर्ट की ओर से ‘स्टेट्समैन जैसा संदेश’ दिया जाना चाहिए और भूषण को शहीद न बनाएं।

तीन न्यायाधीशों की पीठ की अध्यक्षता कर रहे न्यायमूर्ति मिश्रा ने सजा के मुद्दे पर उस दिन अपना फैसला सुरक्षित रखा था। न्यायमूर्ति मिश्रा दो सितंबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 14 अगस्त को भूषण को न्यायापालिका के खिलाफ उनके दो अपमानजनक ट्वीट के लिए उन्हें आपराधिक अवमानना का दोषी ठहराया था। 

भूषण का पक्ष रख रहे धवन ने भूषण के पूरक बयान का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया था कि वह अपने 14 अगस्त के फैसले को वापस ले ले तथा कोई सजा न दे। उन्होंने अनुरोध किया कि न सिर्फ इस मामले को बंद किया जाना चाहिए, बल्कि विवाद का भी अंत किया जाना चाहिए।

अटॉर्नी जनरल के. के. वेणुगोपाल ने अदालत से अनुरोध किया कि वह भूषण को इस संदेश के साथ माफ कर दे कि उन्हें भविष्य में ऐसा कृत्य नहीं दोहराना चाहिए। पीठ में न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी भी शामिल हैं। पीठ ने ट्वीटों को लेकर माफी न मांगने के रुख पर पुनर्विचार के लिए भूषण को 30 मिनट का समय भी दिया था। 

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