नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने मंगलवार को अपनी मौद्रिक नीति समीक्षा में प्रमुख नीतिगत ब्याज दरों और आरक्षित अनुपात को पुराने स्तर पर बरकरार रखा। दरों में बदलाव नहीं करने का फैसला आरबीआई के गवर्नर रघुराम राजन ने 2016-17 की दूसरी दोमाही मौद्रिक नीति समीक्षा में की। राजन ने कहा, "अप्रैल महीने में मिले महंगाई दर के झटके से भविष्य में महंगाई दर का अनुमान थोड़ा अनिश्चित हो गया।"
प्रथम दोमाही समीक्षा में पांच अप्रैल को आरबीआई ने रेपो दर में 25 आधार अंकों की कटौती कर इसे 6.75 फीसदी से घटाकर 6.5 फीसदी कर दिया था। रेपो दर वह दर है, जिस पर वाणिज्यिक बैंक अल्पावधि के लिए रिजर्व बैंक से उधार लेते हैं। इसके साथ ही प्रथम समीक्षा में रिवर्स रेपो दर को 5.75 फीसदी से बढ़ाकर छह फीसदी कर दिया गया था।
रिवर्स रेपो दर वह दर है, जिस पर आरबीआई वाणिज्यिक बैंकों से अल्पावधि के लिए ली जाने वाली राशि पर ब्याज देता है। आरबीआई के मुताबिक महंगाई में बढ़ोतरी अनुमान से अधिक होने की वजह से दरों में कटौती नहीं की गई है। सब्जियों, फल, चीनी, मांस और मछली के दाम अनुमान से ज्यादा बढ़े हैं, जबकि दालें महंगी बनी हुई हैं। वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और मेटल के दाम भी बढ़े हैं। आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन ने मुद्रास्फीति बढ़ने के जोखिम के बारे में बताते हुए अपनी दरों में कोई बदलाव नहीं किया है।
इस दौरान अपने कार्यकाल पर भी राजन ने चुटकी ली। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि इस बारे में मेरी ओर से कुछ भी कहना बहुत क्रूर होगा क्योंकि इससे वह मजा किरकिरा हो जाएगा जो कि मीडिया इन दिनों ले रहा है। साथ ही राजन ने कहा कि सरकार, मौजूदा पदाधिकारी रिजर्व बैंक गवर्नर के कार्यकाल विस्तार पर फैसला लेते हैं। बता दें कि राजन का कार्यकाल सितंबर में समाप्त हो रहा है।