नई दिल्ली: जेएनयू सहित कुछ केंद्रीय विश्वविद्यालयों के छात्रों के निलंबन के मुद्दे पर हस्तक्षेप से साफ तौर पर इंकार करते हुए केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने शुक्रवार को कहा कि चूंकि ये शिक्षण संस्थान स्वायत्त संस्थाएं हैं इसलिए वह हस्तक्षेप कर नए विवादों को जन्म देना नहीं चाहतीं। मानव संसाधन विकास मंत्रालय के कामकाज पर हुई चर्चा का राज्यसभा में जवाब देते हुए स्मृति ने यह बात कही।
उन्होंने कहा कि वह संसद द्वारा पारित किए गए कानूनों से बंधी हुई हैं। इसलिए वह विश्वविद्यालयों द्वारा किए गए प्रशासनिक निर्णयों में हस्तक्षेप नहीं कर सकतीं। इन मामलों में संबंधित विश्वविद्यालय का प्रशासन ही निर्णय कर सकता है। उन्होंने कहा कि वह नहीं चाहतीं कि उनके हस्तक्षेप करने से नए विवादों का जन्म हो जाए। इससे पहले कांग्रेस के आनंद भास्कर रपोलू ने उनसे स्पष्टीकरण मांगते हुए यह जानना चाहा था कि क्या कुछ केंद्रीय विश्वविद्यालयों द्वारा पिछले दिनों कुछ छात्रों को निष्कासित करने के मामले में वह हस्तक्षेप करेंगी और प्रभावित छात्रों को राहत दिलवाएंगी।
गौरतलब है कि जवाहरलाल नेहरू (जेएनयू) विश्वविद्यालय ने पिछले माह शोधार्थी उमर खालिद तथा अनिर्वाण भट्टाचार्य को निष्कासित कर दिया था तथा कन्हैया कुमार पर 10,000 रुपए का जुर्माना किया था। यह कार्रवाई उस विवादास्पद कार्यक्रम में उनकी कथित संलिप्तता को लेकर की गई जो संसद पर हमले के दोषी अफजल गुरू की याद में विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित किया गया था। केंद्र द्वारा स्कूली पाठ्यक्रमों में हस्तक्षेप के आरोपों से इंकार करते हुए स्मृति ने कहा कि यह राज्य का विषय है और राज्य ही स्कूली पाठ्यक्रम तय करते हैं। हमारी भूमिका महज सुविधा प्रदाता की है।
मानव संसाधन विकास मंत्री ने कहा कि सरकार देश के सभी सरकारी स्कूलों में बच्चों की निगरानी की प्रणाली (चाइल्ड ट्रैकिंग मैकेनिज्म) शुरू करने पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि इसे आधार संख्या से जोड़ा जाएगा। स्मृति ने कहा कि इसमें न केवल बच्चों बल्कि अध्यापकों को भी शामिल किया जाएगा। इससे बच्चों के शिक्षा प्रदर्शन पर नजर रखी जा सकेगी। साथ ही शिक्षा अधूरी छोड़ने वाले बच्चों के बारे में भी जानकारी मिल सकेगी। इससे शिक्षा संबंधी नीतियों को तय करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि 15 राज्यों में इस योजना पर काम चल रहा है।