लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य सरकार के कर्मचारियों को सातवें केंद्रीय वेतन आयोग की संस्तुतियों के अनुसार वेतन एवं भत्तों के पुनरीक्षण पर युक्तियुक्त संस्तुति देने के एक वेतन समिति के गठन का निर्णय किया है, जो छह महीने में अपनी रिपोर्ट देगी। सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि यह निर्णय सोमवार को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में लिया गया।
उन्होंने बताया कि मंत्रिपरिषद ने इस समिति के अध्यक्ष को नामित करने का अधिकार मुख्यमंत्री को सौंप दिया है। प्रवक्ता ने यह भी बताया कि इसके साथ ही प्रमुख सचिव नियोजन विभाग तथा प्रमुख सचिव कार्मिक विभाग की तरफ से नामित प्रतिनिधि के सदस्य तथा सचिव वित्त (वेतन आयोग) इस समिति के सदस्य सचिव होंगे।
यह समिति राज्य कर्मचारियों और सहायता प्राप्त शिक्षण एवं प्राविधिक शिक्षण संस्थाओं के शिक्षकों एवं शिक्षणेतर कर्मचारियों, स्थानीय निकायों और जिला पंचायतों, विकास प्राधिकरणों, सार्वजनिक उपक्रमों, निगमों एवं स्वशासी संस्थाओं के कर्मचारियों के संबंध में अपनी संस्तुतियां राज्य सरकार को छह माह में प्रस्तुत करेगी।
उन्होंने बताया कि समिति से यह भी कहा गया है कि वह अपनी संस्तुतियां देते समय राज्य के वित्तीय संसाधनों एवं विकास संबंधी अन्य प्रतिबद्धताओं को भी ध्यान में रखेगी।