देहरादून: भगवान शंकर के बारह ज्योर्तिलिंगों में से एक केदारनाथ धाम के कपाट मंत्रोच्चारण के बीच सोमवार सुबह सात बजे शुभ लग्न में विधि विधान से खोल दिए गए। इसके साथ ही दोपहर गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट भी खुल गए। मुख्य अतिथि राज्यपाल डॉ. के.के. पॉल हेलीकप्टर से धाम पहुंचे और सबसे पहले बाबा केदार के दर्शन का पूजा अर्चना की। कपाट खुलने के दौरान धाम के हजारों की संख्या में भक्त मौजूद रहे।
इधर, सुबह दस बजे डोली गंगोत्री धाम पहुंची, जहां विशेष पूजा-अर्चना के बाद मां गंगा की डोली और मूर्ति को 12:30 मिनट पर मंदिर में स्थापित किया गया। इसके बाद श्रद्धालुओं ने मां गंगोत्री के दर्शन किए। धाम में करीब तीन हजार से अधिक यात्री पहुंचे। वहीं यात्रियों का आने का सिलसिला लगातार जारी है।
वहीं मां यमुना की डोली मायके खरसाली से सोमवार सुबह ही विदा होकर यमुनोत्री धाम पहुंची। यमुनोत्री धाम के कपाट शुभ मुहूर्त दोपहर सवा एक बजे खोल दिए गए। अधिकारियों के मुताबिक, यमुनोत्री में कपाट खुलने के समय साढ़े चार हजार से अधिक श्रद्धालु मौजूद रहे।
केदारनाथ यात्रा के लिए दस हेली कंपनियों को हेलीकाप्टर संचालन की अनुमति मिल गई है। संभावना है कि यात्रा के पहले दिन से धाम के लिए गुप्तकाशी सहित अलग-अलग हेलीपैड से हवाई सेवा भी शुरू हो जाएगी। 9 मई से शुरू हो रही केदारनाथ यात्रा को लेकर सड़क और हवाई मार्ग से यात्रा को लेकर उत्साह दिख रहा है।
इस बार यात्रा शुरू होने से पूर्व ही हेली कंपनियों को उड्डयन मंत्रालय, भारत सरकार से अनुमति प्राप्त हो चुकी है। 10 हेली कंपनियों के हेलीकॉप्टर संभवत: पहले दिन से ही केदारनाथ के लिए उड़ान भरना शुरू कर देंगे।
कंपनियों के हेलीकॉप्टर, गुप्तकाशी, नारायणकोटी, मस्ता, शेरसी, मैखंडा आदि हेलीपैड से संचालित होंगे। बताया जा रहा है कि शासन को 21 कंपनियों की ओर से आवेदन भेजे गए थे। ऐसे में उम्मीद है कि यात्रा आगे बढ़ने के साथ हवाई सेवाओं में भी विस्तार होगा।
आपको बता दें कि बीते वर्ष केदारनाथ यात्रा में एक लाख, 54 हजार से अधिक श्रद्धालु पहुंचे थे, जिसमें हेलीकॉप्टर से धाम पहुंचने वालों की संख्या 74 हजार से अधिक थी। बीते वर्ष 13 हेली कंपनियां आई थी, जिसमें कुछ एक माह बाद और अन्य जून में हुई बारिश के बाद लौट गई थी। इन कंपनियों को मिली अनुमति हिमालयन हेली सर्विस, डेक्कन, पिनेकल, सार एविएशन, पवनहंस, एरा एयर, ट्रांस भारत, यूटिएयर, हेरीटेज और आर्यन एविएशन।



केदारनाथ की पूजा के बारे में कुछ जानकारियां: केदारनाथ मंदिर आम दर्शनार्थियों के लिए प्रातः सात बजे खुलता है। दोपहर एक से दो बजे तक विषेश पूजा होती है और उसके बाद विश्राम के लिए मंदिर बंद कर दिया जाता है। पुनः शाम पांच बजे भक्तों के दर्शन के लिए मंदिर खोला जाता है। पांच मुख वाली भगवान शिव की प्रतिमा का विधिवत श्रृंगार करके साढ़े सात बजे से साढ़े आठ बजे तक नियमित आरती होती है। रात्रि साढ़े आठ बजे केदारेश्वर ज्योतिर्लिंग का मंदिर बंद कर दिया जाता है।
शीतकाल में केदारघाटी बर्फ से ढक जाती है। यद्यपि केदारनाथ मंदिर के खोलने और बंद करने का मुहुर्त निकाला जाता है, लेकिन यह सामान्यतः नवम्बर माह की 15 तारीख से पूर्व (वृश्चिक संक्रांति से दो दिन पूर्व) बंद होता जाता है और छह माह बाद अर्थात बैसाखी के बाद कपाट खुलते हैं। ऐसी स्थिति में केदारनाथ की पंचमुखी प्रतिमा को ऊखीमठ स्थित पंचकेदार गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर में लाया जाता है। इसी प्रतिमा की पूजा यहां भी रावल करते हैं।
केदारनाथ में भक्त शुल्क जमा कराकर रसीद प्राप्त करते हैं और उसके अनुसार ही वह मंदिर की पूजा-आरती कराते हैं या फिर भोग-प्रसाद ग्रहण करते हैं। भगवान की पूजाओं के क्रम में प्रातःकालीन पूजा, महाभिषेक पूजा, अभिषेक, लघु रुद्राभिषेक, षौडशोपचार पूजन, अष्टोपचार पूजन, सम्पूर्ण आरती, पांडव पूजा, गणेश पूजा, श्री भैरव पूजा, पार्वती जी की पूजा, शिव सहस्त्रनाम आदि प्रमुख है। मंदिर समिति द्वारा केदारनाथ मंदिर में पूजा कराने के लिए भक्तों से जो दक्षिणा ली जाती है, उसमें समिति समय-समय पर परिवर्तन भी करती है।