नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने कोलेजियम व्यवस्था को बहाल कर एनजेएसी को रद्द कर दिया है। 6 सदस्यों वाले इस आयोग में तीन ऐसे सदस्यों की नियुक्ति का प्रावधान है जिनमें कानून मंत्री भी शामिल होंगे और शेष दो सदस्य ऐसे होंगे जिनका कानून से कोई ताल्लुक नहीं होगा। ऐसे में जजों की नियुक्ति में राजनीतिक हस्तक्षेप की गुंजाइश ही नहीं रहेगी।
1. कोर्ट ने कहा कि सरकार द्वारा लाए गए परिवर्तन जजों के चयन और नियुक्ति में न्यायपालिका की प्रधानता सुनिश्चित नहीं करते।
2. अगर उच्च न्यायलय के जजों के चयन की प्रक्रिया एनजेएसी के माध्यम से की जाती है तो संविधान के बुनियादी ढांचे का स्पष्ट रूप से उल्लंघन होगा।
3. सुप्रीम कोर्ट ने एनजेएसी में केंद्रीय कानून मंत्री को शामिल करना संविधान में दिए गए न्यायपालिका की स्वतंत्रता और शक्तियों के बंटवारे के सिद्धांत के खिलाफ माना।
4. अंतिम निर्धारक प्रक्रिया में कानून मंत्री और विपक्ष के नेता की प्रख्यात व्यक्ति के चयन में भागीदारी स्वीकार नहीं की जा सकती।
5. जजों के चयन की संवेदनशीलता बहुत बड़ी है और अनुचित नियुक्तियां खतरनाक है।
6. जजों की नियुक्ति में हुई त्रुटियों के लिए कोलेजियम को दोषी नहीं ठहराया जा सकता है।
7. यह सच है कि कोलेजियम सिस्टम की आलोचना हुई है लेकिन यह नहीं भूला जाना चाहिए कि जजों की नियुक्ति में कार्यकारी की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
8. जजों ने सहमति जताई कि प्रणाली में पारदर्शिता और निष्पक्षता की कमी है इसलिए इसमें सुधार की जरूरत है।
9. इस मुद्दे पर बहस और इस मामले को आगे सुने जाने की जरूरत है।