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Agnipath Scheme Protest: उत्तराखंड में 'अग्निपथ' योजना को लेकर विरोध, सड़कें जाम, वाहनों की लगी लंबी कतार

 Published : Jun 16, 2022 04:01 pm IST,  Updated : Jun 16, 2022 04:01 pm IST

हंगामा कर रहे युवाओं ने अग्निपथ योजना को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने की मांग की। उन्होंने कहा यह युवाओं के साथ धोखा है। वहीं दूसरी ओर केंद्र सरकार की अग्निपथ योजना के तहत अग्निवीरों की भर्ती प्रक्रिया 90 दिन बाद शुरू हो जाएगी। इससे पहले सैन्य प्रबंधन दूर-दराज के क्षेत्रों तक पहुंचकर युवाओं को जागरूक करेगा।

protest against Agnipath scheme- India TV Hindi
Youngsters protest against Agnipath scheme Image Source : PTI

Highlights

  • 90 दिन बाद शुरू हो जाएगी अग्निवीरों की भर्ती प्रक्रिया
  • सैन्य प्रबंधन दूर-दराज के क्षेत्रों तक पहुंचकर युवाओं को करेगा जागरूक
  • हंगामा कर रहे युवाओं ने अग्निपथ योजना को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने की मांग की

Agnipath Scheme Protest: अग्निपथ योजना लागू करने के विरोध में बेरोजगार संगठनों के पदाधिकारियों, युवाओं ने राजधानी सहित प्रदेश के अलग-अलग जिलों में जमकर हंगामा किया। युवाओं ने भाजपा की ओर से शहर के विभिन्न इलाकों में लगाए गए पोस्टरों, बैनरों को फाड़ डाला और केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। वहीं पिथौरागढ़ में युवाओं ने सिल्थाम में जाम लगाया, जिस कारण यहां हजारों लोग जाम में फंस गए। हंगामा कर रहे युवाओं ने अग्निपथ योजना को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने की मांग की। उन्होंने कहा यह युवाओं के साथ धोखा है। वहीं दूसरी ओर केंद्र सरकार की अग्निपथ योजना के तहत अग्निवीरों की भर्ती प्रक्रिया 90 दिन बाद शुरू हो जाएगी। इससे पहले सैन्य प्रबंधन दूर-दराज के क्षेत्रों तक पहुंचकर युवाओं को जागरूक करेगा।

रक्षा मंत्री ने किया था अग्निपथ योजना का ऐलान

जीओसी गोल्डन की डिवीजन मेजर जनरल जीएस चौधरी ने कहा कि योजना से सशस्त्र सेनाओं को युवा व नई तकनीक से युक्त सैनिक मिलेंगे। सेना में भर्ती का जुनून रखने वाले अधिक युवाओं के लिए भी एक अवसर होगा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विगत दिनों सेना के तीनों प्रमुखों की मौजूदगी में दिल्ली में अग्निपथ योजना का ऐलान किया था। क्लेमेंटटाउन स्थित सेना की 14 इंफ्रेंट्री डिवीजन (गोल्डन की डिवीजन) के जनरल ऑफिसर कमांडिंग मेजर जनरल जीएस चौधरी ने भी योजना को क्रांतिकारी बताया है। सैन्य परिसर में पत्रकारों से कहा कि योजना से सेना में भर्ती होने की ख्वाहिश रखने वाले युवा आत्मनिर्भरता की उड़ान भरेंगे। युवाओं को सेना में भर्ती होने के साथ ही देशसेवा का भी अवसर मिलेगा।

ज्यादा से ज्यादा युवाओं को सेना में भर्ती होने का मिलेगा मौका
उन्होंने कहा कि योजना को लेकर हमारी पहली कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा जागरुकता पैदा की जाए। स्कूल, कॉलेज, एनसीसी के जरिए युवाओं को इस योजना के बारे में बताया जाएगा। योजना से ज्यादा से ज्यादा युवाओं को सेना में भर्ती होने का मौका मिलेगा। उन्होंने बताया कि पहले साल सेना की जनरल ड्यूटी के लिए होने वाली भर्ती प्रक्रिया की ही तरह अग्निपथ योजना के अंतर्गत अग्निवीरों के लिए भर्ती होगी। कोशिश है कि पहली भर्ती प्रक्रिया अगले तीन माह के अंतर्गत की जाए। भर्ती प्रक्रिया पुरुष और महिला दोनों के लिए होगी। चयन सेना द्वारा निर्धारित कड़े मापदंडों पर ही होगी। पहली भर्ती में देशभर से 40 हजार युवाओं को बतौर अग्निवीर सेना में भर्ती किया जाएगा। चयनितों को पहले छह माह का प्रशिक्षण दिया जाएगा, उसके बाद अगले साढ़े तीन साल वह सेना में तैनात रहेंगे। चार साल पूरे होने पर अग्निवीरों को स्थायी होने के लिए स्वेच्छा से आवेदन करने का अवसर मिलेगा। योग्यता व जरुरत पर 25 फीसदी तक रेगुलर कैडर के लिए चयनित होंगे।

पुलिस और अन्य भर्तियों में इन युवाओं को प्राथमिकता
उन्होंने कहा कि चार साल की सैन्य सेवा के बाद जो युवा कार्यमुक्त होंगे उन्हें दूसरी नौकरी दिलवाने में सेना सक्रिय भूमिका निभाएगी। कहा कि सेना में अगर कोई चार साल काम कर लेगा तो उसकी प्रोफाइल मजबूत बन जाएगी और सरकारी या गैर सरकारी क्षेत्र ऐसे युवाओं को नौकरी देने में प्राथमिकता देंगे। राज्य सरकारों ने भी पुलिस और अन्य भर्तियों में इन युवाओं को प्राथमिकता देने की बात कही है। इस मौके पर डिप्टी जीओसी ब्रिगेडियर तपन लाल साह, कर्नल जीएस विक्रांत मेहता व पीआईबी के एडीजी विजय कुमार भी मौजूद रहे।

जीओसी ने बताया कि शुरूआत में पूर्व भर्ती प्रक्रिया से ही हिमवीरों की भर्ती और उनकी ट्रेनिंग होगी, लेकिन आगे ट्रेनिंग में भी बदलाव किया जाएगा। इसकी प्रक्रिया चल रही है। अगले साल से ऑनलाइन टेस्ट लिया जाएगा, जिससे दूरदराज के युवाओं को कोई परेशानी न हो। टेस्ट में पास होने के बाद उन्हें फिजिकल के लिए बुलाया जाएगा। जीएस चौधरी, मेजर जनरल जीजीओ 14 इंफ्रेंटरी डिवीजन के अनुसार सेना चाहती है कि उन्हें पहले से ट्रेड युवा सैनिक मिले, जिससे वर्तमान में जो आधुनिक तरीके से युद्ध हो रहे, उसमें वह दक्षता हासिल कर सके। इसके लिए आईटीआई संस्थानों के कोर्स में बदलाव की पहल की योजना भी है। आईटीआई में सेना के मतलब के कोर्स युवाओं को कराए जाएंगे।

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