नई दिल्ली: चक्रवाती तूफान रेमल इन दिनों काफी चर्चा में है। इस तूफान का प्रभाव पश्चिम बंगाल के तटीय इलाकों में देखा जाने लगा है। लैंडफॉल की प्रक्रिया आधी रात से शुरू हो चुकी है। इस दौरान समुद्र में चक्रवाती तूफान की अधिकतम रफ्तार 135 किमी प्रतिघंटा दर्ज की गई।
पश्चिम बंगाल के आस पास जिन इलाकों में इस चक्रवात का असर दिखाई दे रहा है, उसमें बीरभूम, नदिया, पूर्वी बर्धमान, बांकुड़ा, पूर्वी मेदिनीपुर, उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना, कोलकाता, बिधाननगर के अलग-अलग इलाके शामिल हैं। यहां तेज बारिश और हवा शुरू हो गई है।
रेमल अरबी शब्द है, जिसका मतलब होता है रेत। इसे यह नाम ओमान से मिला है। दरअसल इस तरह के नाम इसलिए रखे जाते हैं, जिससे जनता आसानी से आपदाओं को याद रख सके। ऐसी आपदाओं की जानकारी जनता तक पहुंचाने के लिए ही तूफानों का नामकरण किया जाने लगा।
तूफानों का नामकरण वर्ल्ड मेट्रोलॉजिकल ऑर्गेनाइजेशन (WMO) द्वारा किया जाता है। यूएन की इस संस्था के कुल 185 देश सदस्य हैं। दरअसल डब्ल्यूएमओ ने 1972 में पैनल ऑन ट्रॉपिकल साइक्लोन्स (Panel on Tropical Cyclones) की स्थापना की थी। साल 2000 में ओमान की राजधानी मस्कत में जब पीटीसी की 27वीं बैठक हुई, तो सभी देशों ने बंगाल की खाड़ी और अरब महासागर में उठने वाले तूफानों के नाम रखने का फैसला किया था।
जिसका असर ये हुआ कि साल 2004 के बाद से तूफानों के नामकरण किए जाने लगे। साल 2020 में कुल 169 तूफानों के नाम रखे गए और उन्हें रिलीज किया गया।
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