भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को दिल्ली में सेना की कमांडर्स कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया है। सेना कमांडरों को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने उनसे कहा कि वे भू-राजनीतिक और क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर कड़ी नजर रखें और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहें। अपने संबोधन के दौरान राजनाथ सिंह ने सेना के लिए अगले 20-30 वर्षों के लिए एक दीर्घकालिक रणनीतिक दृष्टिकोण की आवश्यकता पर जोर दिया और सेना के वरिष्ठ नेतृत्व से आग्रह किया कि वे तत्काल और उभरती चुनौतियों का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार रहें।
राजनाथ सिंह के संबोधन की प्रमुख बातें
20–30 साल की रणनीतिक सोच जरूरी: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 23 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में आर्मी कमांडर्स कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय सेना को अगले 20–30 वर्षों की चुनौतियों को ध्यान में रखकर दीर्घकालिक रणनीतिक दृष्टिकोण अपनाना होगा। साथ ही, तात्कालिक और उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए भी तैयार रहना होगा।
ऑपरेशन सिंदूर से मिली सीख: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर में नवाचार, बेहतर तालमेल, मजबूत समन्वय और आधुनिक हथियारों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ऑपरेशन ने स्पष्ट संदेश दिया कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।
आधुनिक युद्ध के लिए एकीकृत दृष्टिकोण जरूरी: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि आधुनिक युद्ध में सफलता के लिए विभिन्न सैन्य क्षमताओं और संयुक्त अभियानों के बीच निर्बाध समन्वय आवश्यक है।
ड्रोन और आधुनिक तकनीक पर जोर: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सेना में पुनर्गठन और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल की सराहना करते हुए उन्होंने ड्रोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), स्वायत्त प्रणालियों, डेटा एनालिटिक्स, साइबर सुरक्षा और सुरक्षित संचार नेटवर्क को मजबूत करने पर जोर दिया।
लैंड वॉरफेयर का महत्व बरकरार: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि हवाई, समुद्री, अंतरिक्ष और साइबर क्षेत्र में चुनौतियां बढ़ने के बावजूद भूमि पर लड़ा जाने वाला युद्ध और जमीनी सेना की भूमिका अपरिहार्य बनी रहेगी।
लैंड वॉरफेयर डॉक्ट्रिन जारी: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय सेना की लैंड वॉरफेयर डॉक्ट्रिन जारी की। इसका उद्देश्य युद्ध के बदलते स्वरूप और भविष्य के संघर्षों की चुनौतियों का सामना करने के लिए भारतीय सेना को तैयार करने हेतु एक व्यापक रणनीतिक ढांचा प्रदान करना है।
रक्षा उत्पादन में रिकॉर्ड वृद्धि: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा उत्पादन रिकॉर्ड 1.78 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जबकि रक्षा निर्यात लगभग 38,000 करोड़ रुपये के सर्वकालिक उच्च स्तर पर रहा।
सुधारों को जमीन पर उतारने की जरूरत: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वर्ष 2025 को ‘ईयर ऑफ रिफॉर्म्स’ बताते हुए कहा कि सुधार एक सतत प्रक्रिया है। कमांडरों को यह सुनिश्चित करना होगा कि सुधारों से सेना की परिचालन क्षमताओं में वास्तविक वृद्धि हो।
आत्मनिर्भरता और संयुक्त सैन्य क्षमता पर फोकस: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता, मानव संसाधन प्रबंधन, महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एकीकृत दृष्टिकोण को प्राथमिकता देने का आह्वान किया।
संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में योगदान का सम्मान: इस अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वार्षिक संयुक्त राष्ट्र जर्नल का अनावरण किया और संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले भारतीय सेना के जवानों को सम्मानित किया।
मुख्य संदेश: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारतीय सेना को भविष्य के युद्धों के लिए 20–30 साल की दीर्घकालिक रणनीति तैयार करने के साथ-साथ तकनीक, आत्मनिर्भरता, संयुक्त सैन्य अभियानों और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को मजबूत करना होगा।
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