दिल्ली के जंतर मंतर पर चल रहा छात्र आंदोलन देश के कई शहरों में फैल गया है। इस बीच छात्रों की सबसे बड़ी मांग को देखते हुए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेज दिया है। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद छात्र जश्न मना रहे हैं, वहीं इसे लेकर छात्रों के आंदोलन की शुरुआत से ही शामिल सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने भी छात्रों को बधाई दी है। सोनम वांगचुक ने अपने ट्वीट में लिखा, यह लोकतंत्र की जीत है - सीधी लोकतंत्र की जीत, जो सीधे सड़कों से आई है। यह शांति, धैर्य और दृढ़ता की जीत है। CJP और देश की Gen Z को बधाई; साथ ही उन सभी नागरिकों का धन्यवाद जिन्होंने डर और डर के डर को त्यागकर देश के हर कोने से आवाज़ उठाई। जवाबदेही से अब सुधार की ओर।
लोकतंत्र के लिए खड़े होने वालों को सलाम
एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने आगे कहा, "मैं सरकार और धर्मेंद्र प्रधान के उठाए गए कदम का स्वागत और सम्मान करता हूं। मैं देश के सभी लोगों को बधाई देता हूं क्योंकि यह लोकतंत्र की जीत है, और हमने आज इसे देखा है। हमें भारत में लोकतंत्र की रक्षा करते रहना चाहिए। मैं देश के युवाओं को भी बधाई और धन्यवाद देना चाहता हूं। मैं अपनी CJP टीम, अपने भाइयों और बहनों को धन्यवाद देता हूं जिन्होंने सबसे पहले यह मुद्दा उठाया, साथ ही उन वॉलंटियर्स को भी जिन्होंने उनका साथ दिया। देश भर से छात्र, युवा और हर उम्र के नागरिक लोकतंत्र के लिए खड़े हुए। मैं उन सभी को सलाम करता हूं..."
सोनम वांगचुक ने किया था भूख हड़ताल
सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नीट पेपर लीक को लेकर जंतर-मंतर पर जारी आंदोलन के समर्थन में 28 जून को अनशन शुरू किया था। तबीयत खराब होने के बाद सोनम को पहले सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था, फिर इसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर उन्हें मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अनशन के 27वें दिन उन्होंने अपना भूख हड़ताल खत्म किया था।
अनशन तोड़ने के बाद किया था ट्वीट
भूख हड़ताल के बाद सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'अभी-अभी केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह और लेह-लद्दाख की सर्वोच्च समिति के वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति में मैंने 26 दिनों के बाद अपना अनशन तोड़ा। इससे पहले विभिन्न राजनीतिक दलों के 65 सांसदों ने मुझसे मुलाकात की थी या पत्र लिखकर मुझसे अनशन तोड़ने का आग्रह किया था। यह देश में संभावित हिंसा को देखते हुए और विभिन्न शर्तों पर लंबी बातचीत के बाद किया गया।'
ये भी पढ़ें:
धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा देते हुए छात्रों और विपक्षी पार्टियों को लेकर क्या कहा?