नई दिल्ली: 1971 के युद्ध के नायक और भारतीय वायुसेना के रिटायर्ड ग्रुप कैप्टन डी के पारुलकर का निधन हो गया है। वह पाकिस्तान को चकमा देकर उसकी कैद से बाहर निकलने के लिए जाने जाते थे। भारतीय वायुसेना ने अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट करके ये जानकारी दी है।
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IAF ने क्या कहा?
भारतीय वायुसेना ने अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट करके कहा, "ग्रुप कैप्टन डीके पारुलकर (रिटायर्ड) वीएम, वीएसएम, 1971 के युद्ध के नायक, जिन्होंने पाकिस्तान की कैद से बहादुरी से निकलकर भारतीय वायुसेना में अद्वितीय साहस, चतुराई और गौरव का परिचय दिया, का स्वर्गवास हो गया है। भारतीय वायुसेना के सभी वायु योद्धा अपनी हार्दिक संवेदना व्यक्त करते हैं।"
पाकिस्तान को दिया था गच्चा
दरअसल 1971 के युद्ध के दौरान पाकिस्तान ने ग्रुप कैप्टन दिलीप कमलाकर पारुलकर (सेवानिवृत्त) को पकड़ लिया था। इस दौरान उन्हें पाकिस्तान के रावलपिंडी स्थित POW (Prisoner of War) कैंप में रखा गया, जहां उन्हें भारतीय वायुसेना के 2 साथी और मिले। इन साथियों के नाम एम.एस. गरेवाल और हरीश सिंहजी थे। तीनों लड़ाकों ने पाकिस्तान की कैद से भागने का प्लान बनाया और इसमें सफल भी हुए।
हालांकि पाकिस्तान की कैद से निकलना इतना आसान नहीं था लेकिन भारत मां के इन वीर सपूतों ने बिना हथियारों के सुरंग बनाई और गार्ड की नजरों से बचते हुए वह सुरंग खोदने में लगे रहे और आखिरकार वो दिन आ ही गया, जब उन्हें सुरंग से निकलकर आजादी मिल गई।
डीके पारुलकर ने पाकिस्तान की कैद से न केवल खुद को निकाला बल्कि अपने साथियों को भी भागने में मदद की थी। ग्रुप कैप्टन रहे डीके पारुलकर 13 अगस्त, 1972 को अपने साथी मलविंदर सिंह गरेवाल और हरीश सिंह जी के साथ रावलपिंडी के युद्धबंदी कैंप से भागे और पाकिस्तान को चकमा दे दिया। उन्हें उन्हें विशिष्ट सेना मेडल से भी नवाजा जा चुका है।